{"_id":"61163c369c1b4a4c454b33d9","slug":"encephalitis-patients-reduced-due-to-coordinated-interdepartmental-efforts-of-cm-yogi-adityanath-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंसेफेलाइटिस: साल दर साल कम होता गया मरीजों व मौतों का आंकड़ा, सीएम योगी का है बहुत बड़ा योगदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंसेफेलाइटिस: साल दर साल कम होता गया मरीजों व मौतों का आंकड़ा, सीएम योगी का है बहुत बड़ा योगदान
Fri, 13 Aug 2021 03:02 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 13 Aug 2021 03:02 PM IST
सार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अब तक एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के सिर्फ 145 मामले आए हैं जबकि जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के महज नौ मामले मिले हैं।
विज्ञापन
इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करते सीएम योगी।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्वांचल के मासूमों के लिए काल का पर्याय बन चुके इंसेफेलाइटिस की रफ्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के समन्वित अंतर्विभागीय प्रयासों से थम गई है। 2017 से इंसेफेलाइटिस से प्रभावित मरीजों और इस बीमारी से होने वाली मौतों में काफी कमी आई है। पिछले चार सालों के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। इस साल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अब तक एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के सिर्फ 145 मामले आए हैं जबकि जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के महज नौ मामले मिले हैं। इनमें एईएस के 11 मरीजों की मौत हुई है।
जानकारी के मुताबिक 1977-1978 से 2016 तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर साल 1200 से 1500 बच्चे इंसेफेलाइटिस की चपेट में आने से दम तोड़ देते थे। 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इंसेफेलाइटिस प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) बनने के निर्देश दिए। साथ ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को भी मजबूत किया। इसका असर यह हुआ कि मरीजों को प्राथमिक स्तर पर इलाज मिलना शुरू हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे मरीजों की संख्या कम होती गई।
साल दर साल कम हुआ मरीजों व मौतों का आंकड़ा
साल एईएस मौत जेई मौत
2017 2247 511 299 76
2018 1047 168 140 19
2019 617 65 117 13
2020 565 57 57 5
2021 145 11 9 0
(अबतक)
प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज डॉ गणेश कुमार ने बताया कि पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस मरीजों की संख्या में लगातार कमी आई है। प्राथमिक स्तर पर लोगों का इलाज भी शुरू हो गया है। इसका असर यह है कि बीआरडी पर मरीजों का लोड भी कम हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक 1977-1978 से 2016 तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर साल 1200 से 1500 बच्चे इंसेफेलाइटिस की चपेट में आने से दम तोड़ देते थे। 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इंसेफेलाइटिस प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) बनने के निर्देश दिए। साथ ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को भी मजबूत किया। इसका असर यह हुआ कि मरीजों को प्राथमिक स्तर पर इलाज मिलना शुरू हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे मरीजों की संख्या कम होती गई।
विज्ञापन
साल दर साल कम हुआ मरीजों व मौतों का आंकड़ा
साल एईएस मौत जेई मौत
2017 2247 511 299 76
2018 1047 168 140 19
2019 617 65 117 13
2020 565 57 57 5
2021 145 11 9 0
(अबतक)
प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज डॉ गणेश कुमार ने बताया कि पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस मरीजों की संख्या में लगातार कमी आई है। प्राथमिक स्तर पर लोगों का इलाज भी शुरू हो गया है। इसका असर यह है कि बीआरडी पर मरीजों का लोड भी कम हो गया है।
विज्ञापन