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यूपी: गोरखपुर में कोरोना संकट के बीच इंसेफेलाइटिस की दस्तक, 20 मरीज मिले, चार की मौत

Wed, 09 Jun 2021 09:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 09 Jun 2021 09:39 PM IST
सार

बीमार बच्चों का इम्युन सिस्टम कमजोर, संक्रमण का खतरा ज्यादा, तीसरी लहर से पहले चिकित्सकों के सामने पीड़ित बच्चों के इलाज की चुनौती।

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Encephalitis knocked in Gorakhpur 20 patients found 4 died
इंसेफेलाइटिस। (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

गोरखपुर में कोरोना महामारी के बीच इंसेफेलाइटिस की दस्तक ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इस साल (जनवरी) से अब तक इंसेफेलाइटिस के 20 मरीज मिल चुके हैं। जबकि चार की मौत भी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंसेफेलाइटिस से पीड़ित से बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत है। इनमें संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है।

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बीआरडी के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा बताते हैं कि इंसेफेलाइटिस के बीच अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है और उसमें बच्चे संक्रमित होते हैं, तो मुश्किलें बढ़ेंगी। इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चों का इम्युन सिस्टम कमजोर हो जाता है। ऐसे में संक्रमण का खतरा भी अधिक रहेगा। लिहाजा, विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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वहीं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज हर तरह की चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। तीसरी लहर से पहले ही मेडिकल कॉलेज में बच्चों के लिए अलग से 100 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड बनकर तैयार है। रही बात इंसेफेलाइटिस की तो उसके अलग वार्ड बनाए गए हैं। इन वार्डों में मरीजों का इलाज चल भी रहा है।
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इन क्षेत्रों में मिले हैं मरीज

सहजनवां में तीन, पिपरौली में एक, सरदारनगर में दो मरीज मिले व एक की मौत, पिपराइच में दो, बेलघाट में तीन मरीज मिले व एक की मौत, चरगांवा में दो मरीज व एक की मौत, खोराबार में एक, खजनी एक, गोला में दो मरीज मिले व एक की मौत हुई है। जंगल कौड़िया में दो और कैंपियरगंज में इंसेफेलाइटिस का एक मरीज मिला है।

2020 में हुई थीं 13 मौतें
कोरोना की पहली लहर में बच्चे संक्रमण की चपेट में कम आए थे। लेकिन इंसेफेलाइटिस के 227 मरीज मिले थे और 13 की मौत हुई थी। दूसरी लहर के बीच इंसेफेलाइटिस से अब तक चार मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं कोरोना से जिले में अब तक छह बच्चों की मौत हुई है।

जिले के 12 हजार बच्चों पर एक डॉक्टर
आबादी की बात करें तो जिले में करीब 18 लाख बच्चे हैं। इसमें 0 से पांच साल के करीब छह लाख और छह से 18 साल के करीब 12 लाख बच्चे शामिल हैं। इस आबादी के अनुपात में 12 हजार बच्चों पर एक डॉक्टर हैं। इनमें निजी अस्पतालों के चिकित्सक भी शामिल हैं। सिर्फ सरकारी डॉक्टरों पर यह संख्या 20 हजार के आसपास हो जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के पास प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर केवल 14 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जिला अस्पताल में यह संख्या 12 और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 25 से 30 के बीच है।

 

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