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बिजली निगम: फर्जी नियुक्ति में तत्कालीन दो एसई और अन्य तीन कर्मचारियों का फंसना तय

Wed, 22 Feb 2023 01:56 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 22 Feb 2023 01:56 PM IST
सार

सीई (मुख्य अभियंता) कार्यालय भी संदेह के दायरे में था। सीई दफ्तर ने रिमाइंडर भेज कर कार्मिकों को नियुक्त करने के लिए कहा था। तत्कालीन मुख्य अभियंता एके सिंह के निर्देश पर मुकदमा दर्ज होने के अलावा सभी की संपत्ति से सेवा अवधि का कुल खर्च वहन करने के लिए संबंधित जिलाधिकारी को पत्र लिखा था।

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Electricity Corporation two SE and three other employees fixed in fake appointment
बिजली संकट। - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

बिजली निगम में कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से नौकरी दिलाने के मामले में पांच कर्मियों पर गाज गिरनी तय है। इनमें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अब सेवानिवृत्त) हैं। जबकि, दो तत्कालीन अधिशासी अभियंता, और कुशीनगर मंडल के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के अलावा मुख्य अभियंता कार्यालय में तैनात एक लिपिक और मुख्यालय पर तैनात एक लिपिक पर कार्रवाई हो सकती है। इनके नाम जांच टीम के सदस्यों ने दिए हैं। इन लोगों ने जानबूझकर पत्रावलियों पर हस्ताक्षर नहीं किए थे और उसी के सहारे सभी ने फर्जी तैनाती की थी। इससे सभी की भूमिका संदिग्ध है।

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दरअसल, कूटरचित नियुक्ति आदेश से पडरौना खंड में राधेश्याम के साथ अन्य तीन साथी श्रमिकों माधुरी श्रीवास्तव, सुधीर सिंह व योगेंद्र यादव की नियुक्ति हुई थी। दो एक्सईएन व एक लेखाकार की जांच टीम की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी ने नियुक्ति आदेश में कूटरचना कर श्रमिक पद पर कार्यभार ग्रहण किया।
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इस मामले में सीई (मुख्य अभियंता) कार्यालय भी संदेह के दायरे में था। सीई दफ्तर ने रिमाइंडर भेज कर कार्मिकों को नियुक्त करने के लिए कहा था। तत्कालीन मुख्य अभियंता एके सिंह के निर्देश पर मुकदमा दर्ज होने के अलावा सभी की संपत्ति से सेवा अवधि का कुल खर्च वहन करने के लिए संबंधित जिलाधिकारी को पत्र लिखा था।
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इसकी जांच के लिए एम़डी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने भी एक टीम का गठन किया था। टीम ने जांच के बाद सभी कर्मचारियों और अभियंताओं के पद की नामावली मांगी थी। सभी के नाम और तत्कालीन पद के हिसाब के सूचना एमडी ऑफिस भेज दी गई है।

 

जांच में इनकी मिली संलिप्तता

जांच टीम के दिए रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता( मुख्य अभियंता) एसके सिंह, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। नेमी चंद, तत्कालीन अधिशासी अभियंता पडरौना, जिनकी वर्तमान तैनाती बनारस मुख्यालय है, राकेश कुमार गुप्ता तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, तत्कालीन अधिशासी अभियंता चंद्रबली, जिनका निधन हो गया है, जांच में संलिप्त पाए गए। इसके अलावा तत्कालीन मुख्य अभियंता कार्यालय में तैनात तत्कालीन वरिष्ठ कार्यकारी सहायक और एक लिपिक जिसका नाम दर्ज नहीं है, इन्हें भी कूटरचित नियुक्ति में संलिप्त पाया गया।

जांच आख्या के अनुसार दोषी सभी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कूटरचित प्रपत्रों का प्रयोग करना और उसे बढ़ावा देते हुए सहयोग करना दोनों गंभीर दोषपूर्ण अपराध है। -शंभु कुमार, एमडी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम

एमडी ऑफिस की तरफ से जो सूचनाएं मांगी गई थी, समय से भेज दी गई हैं। टीम की जांच में उन्हें पूरा सहयोग किया जा रहा है। -आशू कालिया, मुख्य अभियंता
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