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Gorakhpur: पीपीगंज और पिपराइच से चलने लगीं इलेक्ट्रिक बसें, हरी झंडी दिखाकर किया गया रवाना

Tue, 23 Aug 2022 01:46 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 23 Aug 2022 01:46 PM IST
सार

आज से करीब 30 साल पहले अक्टूबर 1992 में गोरखपुर शहर में सिटी बस चलाने की स्वीकृति हुई थी। कुछ इलाकों में सिटी बसें चलीं भी, लेकिन धीरे धीरे बस संचालकों ने बसों को हटा लिया। हालांकि अब भी परिवहन विभाग के कागजों में 50 से ज्यादा सिटी बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं।
 

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Electric buses started running from PPganj and Pipraich
इलेक्ट्रिक बसें। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर जिले के पीपीगंज और पिपराइच से भी इलेक्ट्रिक बसें चलने लगीं। सोमवार को इन दोनों जगहों से बसों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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पिपराइच के रामलीला मैदान से बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के बाद विधायक महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि इस वातानुकूलित बस से पिपराइच से गोरखपुर की यात्रा आसान और सुविधाजनक हो जाएगी। मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीके तिवारी ने बताया कि पिपराइच से गोलघर काली मंदिर तक किराया 26 रुपये निर्धारित किया गया है। बस पिपराइच के रामलीला मैदान से सुबह आठ बजे एक से दो घंटे के अंतराल पर काली मंदिर के लिए मिलेगी। काली मंदिर से सुबह सात बजे पिपराइच के लिए मिलेगी।
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कार्यक्रम में चेयरमैन जितेंद्र कुमार जायसवाल, ब्लॉक प्रमुख जनार्दन जायसवाल, सांसद प्रतिनिधि संघर्ष मणि उपाध्याय, हियुवा प्रमुख आनंद शाही, राघवेंद्र प्रताप सिंह, राजेश जायसवाल, अष्टभुजा तिवारी, धर्मेंद्र सिंह सैंथवार आदि मौजूद रहे।
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वहीं, पीपीगंज में भाजपा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित सिंह मोनू और विधायक प्रतिनिधि दिनेश सिंह ने बस को हरी झंडी दिखाई। पीपीगंज के लिए बस गोलघर स्थित काली मंदिर से मिलेगी। इस दौरान विपिन सिंह, शेष मणि त्रिपाठी, राकेश चौधरी, आदर्श सिंह, विजय शंकर यादव आदि उपस्थित रहे।

 

यह है कालीमंदिर से पिपराइच का रूट
काली मंदिर, असुरन चौक, गीता वाटिका, पादरी बाजार, जंगल धूषण, तुर्रा बाजार, पतरा बाजार, पिपराइच

करीब 30 साल पहले चलती थीं सिटी बसें
फिर से सिटी बस चलने की शुरुआत से न सिर्फ शहर बल्कि ग्रामीण अंचल के लोगों के बीच खुशी की लहर है। कुछ लोगों की पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। आज से करीब 30 साल पहले अक्टूबर 1992 में गोरखपुर शहर में सिटी बस चलाने की स्वीकृति हुई थी। कुछ इलाकों में सिटी बसें चलीं भी, लेकिन धीरे धीरे बस संचालकों ने बसों को हटा लिया। हालांकि अब भी परिवहन विभाग के कागजों में 50 से ज्यादा सिटी बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं।

पीपीगंज के तिघरा निवासी ध्रुव नारायण सिंह ने बताया कि पहले जब सिटी बस चलती थी तो बहुत कम समय में गोरखपुर से अपने गांव तिघरा पहुंच जाते थे। सेवा बंद होने से दिक्कत बढ़ गई। अब इलेक्ट्रिक सिटी बस की शुरुआत से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी।

 
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