40 सेकेंड की दिमागी कसरत से बढ़ रही बच्चों की सीखने की क्षमता, मनोवैज्ञानिक आचार्य ने किया ये खास दावा
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जिस प्रकार मैदान में उतरने से पहले बच्चे के शरीर को वार्मअप की जरूरत होती है, वैसे ही पढ़ाई से पहले अगर बच्चा दिमाग का वार्मअप कर ले तो उसकी सीखने की क्षमता में बढ़ोतरी हो जाती है। ऐसा करने के बाद बच्चा पढ़ने वाली बातों को लंबे समय तक याद रख सकता है। इसके लिए ज्यादा नहीं केवल 40 सेकेंड की जरूरत होती है। यह दावा किया है पढ़ाई का अलग तरह का तरीका ईजाद करने वाले शैक्षिक मनोवैज्ञानिक डॉ. आचार्य पवन का। उनके तरीके पर देश के 1200 से अधिक स्कूलों में अमल किया जा रहा है। फिलहाल वह गोरखपुर के स्कूलों में भी संभावना तलाशने आए हैं।
डॉ. आचार्य पवन का कहना है कि पढ़ाई शुरू करने से पहले बच्चे को आंख बंद करके श्वसन व्यायाम करना होता है। इस प्रक्रिया में बच्चा आंखों को बंद करके 20 सेकेंड तक सांस को अंदर खींचने के साथ-साथ बाहर छोड़ता है। इससे मन एकाग्र होता है और बच्चा ध्यान लगाकर पढ़ाई करता है। इसी का ख्याल रखकर आचार्य पवन ने लर्न हाउ टू लर्न नाम का स्टडी पैटर्न (पढ़ने का तरीका) ईजाद किया है। इस तरीके को गोरखपुर में भी लागू करने की योजना है।
अमर उजाला से बातचीत में आचार्य पवन ने बताया कि उनके स्टडी पैटर्न में बच्चों के अंदर याद करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए रिटेंशन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। आचार्य पवन मूलरूप से ग्वालियर के रहने वाले हैं। मनोविज्ञान से एमए की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक स्कूलों में अध्यापन कार्य किया है। इस दौरान बच्चों के सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे तरीकों से वह संतुष्ट नहीं थे। इसलिए खुद इसे सुधारने का बीड़ा उठाया।
कंप्यूटर के सीपीयू पर आधारित है स्टडी पैटर्न
आचार्य पवन ने बताया कि उनका स्टडी पैटर्न कंप्यूटर के सीपीयू पर आधारित है। इसमें सी का मतलब कांशियस स्टडी, पी का मतलब पार्शियल कांशियस स्टडी और यू का मतलब अनकांशियस स्टडी है। बच्चा पढ़ाई के दौरान इन तीनों में से किसी न किसी एक चरण से गुजरता है। हमारे स्टडी पैटर्न में बच्चे को चरणबद्ध तरीके से कांशियस स्टडी की ओर ले जाया जाता है।