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Gorakhpur News: 80 कॉलेजों में चलती हैं बीएससी की कक्षाएं, सिर्फ आठ में एमएससी की पढ़ाई
Thu, 07 Sep 2023 01:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 07 Sep 2023 01:51 AM IST
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बीएससी करने के बाद पीजी में प्रवेश के लिए विद्यार्थी परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर।
केस 1
गगहा क्षेत्र की रहने वाली कृतिका मिश्रा ने बीएससी की परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर प्राणि विज्ञान से एमएससी करने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय में आवेदन किया। कटऑफ अधिक जाने के चलते प्रवेश नहीं हो पाया। अब वह शहर के अन्य कॉलेजों में प्रवेश के लिए चक्कर रही हैं। अधिकतर कॉलेज वाले सीट भरने की बात कह रहे हैं। अब वह आगे की पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं।
केस 2
बीएससी करने के बाद रुद्र प्रताप सिंह ने गोरखपुर विश्वविद्यालय समेत शहर के अन्य कॉलेजों में रसायन शास्त्र से एमएससी करने के लिए आवेदन किया। गोविवि में कटऑफ अधिक जाने के चलते वह वंचित रह गए। अब कॉलेजों में वह प्रवेश के लिए चक्कर लगा रहे हैं लेकिन निराशा मिल रही है। कॉलेज से सीट बढ़ने पर प्रवेश लेने का आश्वासन दिया जा रहा है।
यह तो महज बानगी भर है। बीएससी करने के बाद एमएससी में प्रवेश पाने के लिए विद्यार्थी परेशान हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध 80 कॉलेजों में बीएससी की पढ़ाई होती है। इन कॉलेजों से प्रत्येक सत्र में करीब 10 हजार विद्यार्थी बीएससी की पढ़ाई कर निकलते हैं। इसके सापेक्ष एमएससी की पढ़ाई गोरखपुर विश्वविद्यालय के अलावा महज आठ कॉलेजों में होती है। वह भी साइंस के सभी पांच विषय (भौतिकी, रसायन शास्त्र, प्राणि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और गणित) विश्वविद्यालय के अलावा शहर के दो कॉलेजों सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज और महात्मा गांधी पीजी कॉलेज में ही है।
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अन्य कॉलेजों में एक-दो विषय में ही एमएससी की पढ़ाई होती है। इनमें बमुश्किल करीब 500 विद्यार्थी ही एमएससी में प्रवेश पाते हैं। अन्य विद्यार्थी आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे शहर का रुख करते हैं या मजबूरी में अन्य पढ़ाई करने के लिए विवश होते हैं।
इन कॉलेजों में होती है एमएससी की पढ़ाई
शहर में महात्मा गांधी पीजी कॉलेज, सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में सभी पांच विषयों में एमएससी की पढ़ाई होती है। जबकि दिग्विजयनाथ डिग्री कॉलेज व महाराणा प्रताप जंगल धूसड़ में गणित व रसायन शास्त्र और सरस्वती विद्या मंदिर आर्यनगर में जूलॉजी, बॉटनी की पढ़ाई होती हैं। इसके अलावा इस्लामिया कॉलेज, मारवाड़ कॉलेज, नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज बड़हलगंज में एक-एक विषय में एमएससी की पढ़ाई होती है।
वहीं, बुद्धा पीजी कॉलेज कुशीनगर व स्वामी देवानंद पीजी कॉलेज मठलार, देवरिया में एक-एक विषय से एमएससी की पढ़ाई होती है। कॉलेजों ने एमएससी की सीटें भरने का दावा किया है।
सीमित सीट होने के चलते भी बढ़ी दिक्कत
विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों में एमएससी में प्रवेश के लिए सीमित सीट निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय में एमएससी के एक विषय में 40 जबकि कॉलेजों में 22 सीट पर प्रवेश लेने की अनुमति है। हालांकि, सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में गणित में 60 सीटों पर प्रवेश लेने की अनुमति है। कुछ कॉलेजों ने विद्यार्थियों की दिक्कत को देखते हुए सीट वृद्धि के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा है।
कोट...
विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। जल्द ही एमएससी में प्रवेश की स्थिति की समीक्षा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा। कॉलेजों से सीट वृद्धि के लिए आवेदन आने पर उसपर सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, गोविवि
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर।
केस 1
गगहा क्षेत्र की रहने वाली कृतिका मिश्रा ने बीएससी की परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर प्राणि विज्ञान से एमएससी करने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय में आवेदन किया। कटऑफ अधिक जाने के चलते प्रवेश नहीं हो पाया। अब वह शहर के अन्य कॉलेजों में प्रवेश के लिए चक्कर रही हैं। अधिकतर कॉलेज वाले सीट भरने की बात कह रहे हैं। अब वह आगे की पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं।
केस 2
बीएससी करने के बाद रुद्र प्रताप सिंह ने गोरखपुर विश्वविद्यालय समेत शहर के अन्य कॉलेजों में रसायन शास्त्र से एमएससी करने के लिए आवेदन किया। गोविवि में कटऑफ अधिक जाने के चलते वह वंचित रह गए। अब कॉलेजों में वह प्रवेश के लिए चक्कर लगा रहे हैं लेकिन निराशा मिल रही है। कॉलेज से सीट बढ़ने पर प्रवेश लेने का आश्वासन दिया जा रहा है।
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यह तो महज बानगी भर है। बीएससी करने के बाद एमएससी में प्रवेश पाने के लिए विद्यार्थी परेशान हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध 80 कॉलेजों में बीएससी की पढ़ाई होती है। इन कॉलेजों से प्रत्येक सत्र में करीब 10 हजार विद्यार्थी बीएससी की पढ़ाई कर निकलते हैं। इसके सापेक्ष एमएससी की पढ़ाई गोरखपुर विश्वविद्यालय के अलावा महज आठ कॉलेजों में होती है। वह भी साइंस के सभी पांच विषय (भौतिकी, रसायन शास्त्र, प्राणि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और गणित) विश्वविद्यालय के अलावा शहर के दो कॉलेजों सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज और महात्मा गांधी पीजी कॉलेज में ही है।
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अन्य कॉलेजों में एक-दो विषय में ही एमएससी की पढ़ाई होती है। इनमें बमुश्किल करीब 500 विद्यार्थी ही एमएससी में प्रवेश पाते हैं। अन्य विद्यार्थी आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे शहर का रुख करते हैं या मजबूरी में अन्य पढ़ाई करने के लिए विवश होते हैं।
इन कॉलेजों में होती है एमएससी की पढ़ाई
शहर में महात्मा गांधी पीजी कॉलेज, सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में सभी पांच विषयों में एमएससी की पढ़ाई होती है। जबकि दिग्विजयनाथ डिग्री कॉलेज व महाराणा प्रताप जंगल धूसड़ में गणित व रसायन शास्त्र और सरस्वती विद्या मंदिर आर्यनगर में जूलॉजी, बॉटनी की पढ़ाई होती हैं। इसके अलावा इस्लामिया कॉलेज, मारवाड़ कॉलेज, नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज बड़हलगंज में एक-एक विषय में एमएससी की पढ़ाई होती है।
वहीं, बुद्धा पीजी कॉलेज कुशीनगर व स्वामी देवानंद पीजी कॉलेज मठलार, देवरिया में एक-एक विषय से एमएससी की पढ़ाई होती है। कॉलेजों ने एमएससी की सीटें भरने का दावा किया है।
सीमित सीट होने के चलते भी बढ़ी दिक्कत
विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों में एमएससी में प्रवेश के लिए सीमित सीट निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय में एमएससी के एक विषय में 40 जबकि कॉलेजों में 22 सीट पर प्रवेश लेने की अनुमति है। हालांकि, सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में गणित में 60 सीटों पर प्रवेश लेने की अनुमति है। कुछ कॉलेजों ने विद्यार्थियों की दिक्कत को देखते हुए सीट वृद्धि के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा है।
कोट...
विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। जल्द ही एमएससी में प्रवेश की स्थिति की समीक्षा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा। कॉलेजों से सीट वृद्धि के लिए आवेदन आने पर उसपर सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, गोविवि