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शिक्षा व शिक्षण प्रणाली स्थान आधारित होनी चाहिए: प्रो सीमा
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गोरखपुर। आज के परिदृश्य को देखते हुए शिक्षा और शिक्षण प्रणाली स्थान आधारित होनी चाहिए। कोविड-19 के कारण तकनीक का महत्व तो बढ़ा है। लेकिन तकनीक के जनतंत्रीकरण पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। मूल्यांकन व्यवस्था में सुधार करने भी जरूरत है। यह बातें
प्रो. सीमा मलिक ने कहीं। वे मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में समाज विज्ञान एवं मानविकी की अधिष्ठाता पद पर कार्यरत हैं।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी-एचआरडी सेंटर और अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में ‘हायर एजुकेशन रीसेंट ट्रेंड्स एंड इनोवेशन इन टीचिंग ऑफ लैंग्वेज एंड लिटरेचर’ विषय पर 14 दिवसीय ऑनलाइन पुनश्चर्या पाठ्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार से हुई। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. राजेश कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान दौर मार्केट बेस्ट इकोनॉमी का है। ऐसे में जिस कोर्स की डिमांड ज्यादा रहेगी, उसे उसी अनुसार लाना पड़ेगा। वैश्विक मांग के अनुरूप मिश्रित पाठ्यक्रम बनाना होगा।
मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. निशी पांडेय रहीं। उन्होंनेे कहा कि मौजूदा पाठ्यक्रम में जिज्ञासा और कल्पना का अभाव है। शिक्षा मूल्यपरक होनी चाहिए, उसे राष्ट्रीय मूल्य से जोड़ना होगा। विशिष्ट अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की प्रो. अनीता सिंह ने कहा कि शिक्षण में नवाचार की जरूरत है।
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स्वागत भाषण कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. नंदिता सिंह ने दिया। समन्वयक की जिम्मेदारी प्रो. अजय शुक्ल ने निभाई। प्रो. हिमांशु पांडेय ने विषय के बारे में जानकारी दी। आयोजन में प्रो. आलोक कुमार, प्रो. हुमा सब्जपोश, प्रो. सुनीता मुर्मू, प्रो. गौरहरि बेहरा, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. अवनीश राय आदि का विशेष योगदान रहा।
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प्रो. सीमा मलिक ने कहीं। वे मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में समाज विज्ञान एवं मानविकी की अधिष्ठाता पद पर कार्यरत हैं।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी-एचआरडी सेंटर और अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में ‘हायर एजुकेशन रीसेंट ट्रेंड्स एंड इनोवेशन इन टीचिंग ऑफ लैंग्वेज एंड लिटरेचर’ विषय पर 14 दिवसीय ऑनलाइन पुनश्चर्या पाठ्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार से हुई। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. राजेश कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान दौर मार्केट बेस्ट इकोनॉमी का है। ऐसे में जिस कोर्स की डिमांड ज्यादा रहेगी, उसे उसी अनुसार लाना पड़ेगा। वैश्विक मांग के अनुरूप मिश्रित पाठ्यक्रम बनाना होगा।
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मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. निशी पांडेय रहीं। उन्होंनेे कहा कि मौजूदा पाठ्यक्रम में जिज्ञासा और कल्पना का अभाव है। शिक्षा मूल्यपरक होनी चाहिए, उसे राष्ट्रीय मूल्य से जोड़ना होगा। विशिष्ट अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की प्रो. अनीता सिंह ने कहा कि शिक्षण में नवाचार की जरूरत है।
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स्वागत भाषण कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. नंदिता सिंह ने दिया। समन्वयक की जिम्मेदारी प्रो. अजय शुक्ल ने निभाई। प्रो. हिमांशु पांडेय ने विषय के बारे में जानकारी दी। आयोजन में प्रो. आलोक कुमार, प्रो. हुमा सब्जपोश, प्रो. सुनीता मुर्मू, प्रो. गौरहरि बेहरा, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. अवनीश राय आदि का विशेष योगदान रहा।