Gorakhpur News: तिवारी हाता में ईडी की टीम खंगाल रही थी दस्तावेज.. बाहर यही चर्चा-आई क्यों
गोरखपुर के धर्मशाला बाजार स्थित पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी के घर पर ईडी का छापा शाम छह बजे खत्म हो गया। सुबह 6 बजे से ही टीम पूर्व मंत्री के घर पर छापेमारी कर रही थी।
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तिवारी हाता में शुक्रवार सुबह ईडी की टीम के पहुंचने के बाद से शहर में हलचल शुरू हो गई। समर्थक गेट के बाहर जुटने लगे तो बाजार में हर ओर एक ही चर्चा थी-आखिर ईडी की टीम किसलिए आई है? पूर्व विधायक विनय शंकर और उनके परिवार को जानने वाले उनसे संपर्क साधने की कोशिश में थे, लेकिन उनके मोबाइल फोन पर बात नहीं हो पा रही थी।
सुबह दस बजते-बजते गेट के बाहर समर्थक जुटने लगे। कुछ की नजर हाता में बैठे पूर्व सांसद भीष्मशंकर तिवारी पर पड़ी। वह आराम से अखबार पढ़ते नजर आए। कई लोगों ने आवाज लगाई, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।
हाता में कार्रवाई की चर्चा शहर के हर चौक-चौराहे पर हो रही थी। दोपहर करीब 12 बजे धर्मशाला चौक के पास ही चाय की दुकान पर खड़े लोग आपस में बातचीत कर रहे थे। चाय की चुस्की के साथ सभी एक ही बात बोल रहे थे-अचानक ईडी की टीम क्यों आई है? इसे लेकर सबके अपने-अपने तर्क भी थे।
तभी वहीं के रहने वाले अभिषेक तिवारी बोल पड़े- यह राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है तो विकास ने इसका विरोध किया। कहा-ईडी अपनी कार्रवाई करती है। जरूर कुछ तो होगा, तभी तो कार्रवाई की जा रही है। शहर के पुराने आरटीओ के पास चाय की दुकान पर कुछ इसी तरह की चर्चा लोगों के बीच सुनी गई।
बातचीत में सभी अपने-अपने ढंग से ईडी की कार्रवाई की व्याख्या करते नजर आए। कोई इसे दबाव बनाने की कोशिश बता रहा था तो कोई बदनाम करने की।
इस बीच शाम छह बजे ईडी अपनी जांच-पड़ताल कर निकलने लगी तो सपा नेता और समर्थकों की भीड़ नारेबाजी करने लगी। कार्यकर्ता इसे दबाव बनाने की कार्रवाई बताकर हर कदम पर हाता का साथ देने का दम भरते नजर आए।
इस बीच हाता में हलचल शाम के बाद बढ़ गई। गेट खुलने के बाद समर्थकों की भीड़ अंदर गई। पूर्व विधायक के बड़े भाई व पूर्व सांसद भीष्म शंकर ने समर्थकों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है। लोकसभा चुनाव में दबाव बनाने के लिए ईडी को भेजा गया था। इतनी देर तक जांच के बाद भी टीम को कुछ हासिल नहीं हुआ है।
वहीं, सूत्रों ने बताया कि ईडी के लखनऊ जोन के अधिकारी गंगोत्री एंटरप्राइजेज लिमिटेड से संबंधित बैंक धोखाधड़ी के मामले में पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी लेने गोरखपुर घर पर पहुंचे हैं। कंपनी सड़कों के निर्माण, टोल प्लाजा के संचालन और सरकारी अनुबंधों में काम करती है। समूह के मुख्य प्रवर्तक विनय शंकर तिवारी, रीता, तिवारी और अजीत पांडे हैं। यह बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के एक संघ द्वारा लगभग 750 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी है। यह धोखाधड़ी 2012 से 2016 की अवधि से संबंधित है।
हाता पर सुबह से ही समर्थक आते-जाते रहे। सब यही जानने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर अंदर चल क्या रहा है और कब तक चलेगा। वहीं, कई ऐसे भी समर्थक थे, जो सुबह से ही डटे और वह ईडी के शाम में जाने के बाद ही अंदर गए, लेकिन बीच में हटे नहीं।
पुलिस को लौटा दी थी टीम
गोरखनाथ पुलिस भी जानकारी होने के बाद मदद के लिए गई थी, लेकिन अंदर मौजूद अर्द्धसैनिक बलों ने कोई जरूरत न होने की बात कहते हुए लौटा दिया। हालांकि, पुलिस अपने स्तर से शाम कार्रवाई होने के बाद तक सक्रिय रही। पुलिस पूरी तरह से सतर्क दिखी।
कारीगर के बाहर आते ही जुट गए लोग, तो कार से छोड़ा
ईडी की टीम के अंदर जाने के बाद अलमारी खोलने के लिए कारीगर की जरूरत थी। इसके बाद लोकल पुलिस से संपर्क कर कोतवाली इलाके से एक कारीगर को लाया गया। गेट खुलते ही वह अंदर गया और आलमारी खोलने के बाद वह बाहर गया। बाहर आते ही उससे लोग अंदर हो रही कार्रवाई के बारे में जानने की कोशिश करने लगे।
इसकी जानकारी होने के बाद अंदर से एक कार आई और कारीगर को उसकी दुकान पर छोड़ दिया गया। ईडी के छापे की कार्रवाई की खबर सुनते ही समर्थक जुटने लगे। हालांकि, अंदर किसी से संपर्क करने की अनुमति किसी को नहीं है। सभी को फोन भी ईडी टीम ने जब्त कर लिए हैं।
हाते की अंदर सिर्फ पूर्व मंत्री के बड़े बेटे पूर्व सांसद कुशल त्रिपाठी हैं और परिजन हैं। छोटे बेटे पूर्व विधायक विनय त्रिपाठी लखनऊ स्थित आवास पर हैं।