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Gorakhpur News: अधिकार से पहले होनी चाहिए कर्तव्य की बात
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दीवानी न्यायालय के दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के चित्र के अनावरण में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पंकज मित्थल
गोरखपुर। सर्वोच्च न्यायालय का ध्येय वाक्य है यतो धर्मस्ततो जयः, जहां धर्म है वहां विजय है। कर्तव्य की बात अधिकार से पहले होनी चाहिए। केवल अधिकारों की लड़ाई से हिंसा बढ़ती है। इतिहास गवाह है कि कर्तव्य और अधिकार की लड़ाई में हमें महासंग्राम ही मिला है।
ये बातें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मित्थल ने गोरखपुर में शुक्रवार को अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहीं। वह दीवानी न्यायालय के दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं कैलाशपति मिश्र व ओंकारनाथ मिश्र के चित्र के अनावरण के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने स्मृतिशेष अधिवक्ला कैलाशपति मिश्र व ओंकारनाथ मिश्र के चित्र का अनावरण किया। उन्होंने पौधरोपण भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि न्याय दिलाने में अधिवक्ता कैलाश व ओंकारनाथ के कार्य सराहनीय रहा है। सिविल कोर्ट गोरखपुर में न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की श्रृंखला है। इसी कड़ी में स्मृतिशेष (स्वर्गीय) कैलाश पति मिश्रा व स्मृति शेष ओंकार नाथ मिश्र के कार्य मिसाल हैं।
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उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट की बड़ी ही गौरवशाली परंपरा रही है। इसकी स्थापना 1895 में हुई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष मुंशी हरिहर दत्त थे। सुप्रसिद्ध अधिवक्ता स्वर्गीय चारुचंद्र दास ने यहीं से विधि व्यवसाय शुरू किया था। उनकी ज्ञान की महत्ता से प्रभावित होकर विषम परिस्थितियों में अदालतें उनके आवास पर भी लगती थीं, जो न्याय जगत के लिए एक अनूठा उदाहरण है। उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति ट्रस्ट बनाकर दान कर दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु प्रताप पांडेय एवं संचालन मंत्री गिरिजेश मणि त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में प्रभारी जनपद न्यायाधीश राजेश पति त्रिपाठी, प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन मधुसूदन त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में प्रमुख आयोजक एडवोकेट ऑन रिकाॅर्ड सर्वोच्च न्यायालय अनुपम मिश्र व एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु प्रताप पांडेय ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।
इस मौके पर अवनीश नाथ मिश्र, आदित्य मिश्र, अक्षत मिश्र, रत्नाभ पति त्रिपाठी, अशोक नारायण धर दूबे, पद्माकर दत्त तिवारी, केडी पाठक, लालमन, प्रियानंद सिंह, संजय पति त्रिपाठी, उमापति उपाध्याय समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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गोरखपुर। सर्वोच्च न्यायालय का ध्येय वाक्य है यतो धर्मस्ततो जयः, जहां धर्म है वहां विजय है। कर्तव्य की बात अधिकार से पहले होनी चाहिए। केवल अधिकारों की लड़ाई से हिंसा बढ़ती है। इतिहास गवाह है कि कर्तव्य और अधिकार की लड़ाई में हमें महासंग्राम ही मिला है।
ये बातें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मित्थल ने गोरखपुर में शुक्रवार को अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहीं। वह दीवानी न्यायालय के दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं कैलाशपति मिश्र व ओंकारनाथ मिश्र के चित्र के अनावरण के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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इस अवसर पर उन्होंने स्मृतिशेष अधिवक्ला कैलाशपति मिश्र व ओंकारनाथ मिश्र के चित्र का अनावरण किया। उन्होंने पौधरोपण भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि न्याय दिलाने में अधिवक्ता कैलाश व ओंकारनाथ के कार्य सराहनीय रहा है। सिविल कोर्ट गोरखपुर में न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की श्रृंखला है। इसी कड़ी में स्मृतिशेष (स्वर्गीय) कैलाश पति मिश्रा व स्मृति शेष ओंकार नाथ मिश्र के कार्य मिसाल हैं।
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उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट की बड़ी ही गौरवशाली परंपरा रही है। इसकी स्थापना 1895 में हुई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष मुंशी हरिहर दत्त थे। सुप्रसिद्ध अधिवक्ता स्वर्गीय चारुचंद्र दास ने यहीं से विधि व्यवसाय शुरू किया था। उनकी ज्ञान की महत्ता से प्रभावित होकर विषम परिस्थितियों में अदालतें उनके आवास पर भी लगती थीं, जो न्याय जगत के लिए एक अनूठा उदाहरण है। उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति ट्रस्ट बनाकर दान कर दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु प्रताप पांडेय एवं संचालन मंत्री गिरिजेश मणि त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में प्रभारी जनपद न्यायाधीश राजेश पति त्रिपाठी, प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन मधुसूदन त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में प्रमुख आयोजक एडवोकेट ऑन रिकाॅर्ड सर्वोच्च न्यायालय अनुपम मिश्र व एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु प्रताप पांडेय ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।
इस मौके पर अवनीश नाथ मिश्र, आदित्य मिश्र, अक्षत मिश्र, रत्नाभ पति त्रिपाठी, अशोक नारायण धर दूबे, पद्माकर दत्त तिवारी, केडी पाठक, लालमन, प्रियानंद सिंह, संजय पति त्रिपाठी, उमापति उपाध्याय समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।