{"_id":"6a554ecca96de7471000fd1c","slug":"during-the-religious-discourse-saint-harikrishna-das-gave-a-soulful-description-of-the-childhood-pastimes-of-rama-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1384260-2026-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: शिव-पार्वती का बिल्वपत्र से सहस्रार्चन, गूंजे जयकारे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: शिव-पार्वती का बिल्वपत्र से सहस्रार्चन, गूंजे जयकारे
Tue, 14 Jul 2026 02:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 14 Jul 2026 02:17 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर। गीता वाटिका के 41वें स्थापना दिवस के पांचवें दिन सोमवार को भगवान शिव-पार्वती का बिल्वपत्र से सहस्रार्चन वैदिक मंत्रोच्चार एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
शाम को आयोजित रामचरितमानस कथा में वृंदावन से पधारे संत हरिकृष्ण दास ने भगवान राम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हरि अनंत, हरि कथा अनंता और प्रभु के प्रति अटूट निष्ठा ही जीव के कल्याण का सबसे सरल मार्ग है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कृष्ण की बाल लीलाएं भक्तों को आनंदित करती हैं, उसी प्रकार श्रीराम की बाल लीलाएं भी दिव्य और कल्याणकारी हैं। श्रद्धापूर्वक रामचरितमानस का श्रवण मन, बुद्धि और हृदय को निर्मल बनाता है।
कथावाचक ने भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के दिव्य स्वरूप का प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे।
विज्ञापन
शाम को आयोजित रामचरितमानस कथा में वृंदावन से पधारे संत हरिकृष्ण दास ने भगवान राम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हरि अनंत, हरि कथा अनंता और प्रभु के प्रति अटूट निष्ठा ही जीव के कल्याण का सबसे सरल मार्ग है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कृष्ण की बाल लीलाएं भक्तों को आनंदित करती हैं, उसी प्रकार श्रीराम की बाल लीलाएं भी दिव्य और कल्याणकारी हैं। श्रद्धापूर्वक रामचरितमानस का श्रवण मन, बुद्धि और हृदय को निर्मल बनाता है।
विज्ञापन
कथावाचक ने भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के दिव्य स्वरूप का प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे।