सराफा बाजार: सोने से आयात शुल्क घटा, गोरखपुर धंधेबाजों के डूब गए करोड़ों- जिले के दक्षिणांचल पर पड़ा खासा असर
लियन के धंधे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर शहर में एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) के जरिए बुलियन धंधेबाजों और बिचौलियों ने मिलकर 100 किलो से अधिक सोने की बुकिंग की थी। इसमें शहर के बड़े व्यापारी अपने काले धन को भी निवेश करवाने वाले माध्यमों से खपाते हैं। उन्होंने भी बुकिंग कराई थी।
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बुलियन के धंधे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर शहर में एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) के जरिए बुलियन धंधेबाजों और बिचौलियों ने मिलकर 100 किलो से अधिक सोने की बुकिंग की थी। इसमें शहर के बड़े व्यापारी अपने काले धन को भी निवेश करवाने वाले माध्यमों से खपाते हैं। उन्होंने भी बुकिंग कराई थी।
अक्सर बजट के बाद सोने के दाम में तेजी आती थी। ऐसे में धंधेबाज बजट जारी होने के पहले ही एमसीएक्स में ऑनलाइन ही सोने की बुकिंग पहले से कर लेते हैं, ताकि बाद में तगड़ा मुनाफा कमा सकें। इसके लिए उन्हें अपनी आईडी बनानी होती है और प्रति किलो के भाव पर 100 ग्राम सोने के भाव की बुकिंग करनी होती है। ऐसे में 70 लाख रुपये के बदले उन्हें सात लाख रुपये जमा करने होते हैं।
इसके अलावा बंद डिब्बे (कच्चा सोना) वाले धंधेबाजों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा। इसमें निवेशक को खरीद वाली लागत का 20 प्रतिशत धन मार्केट होल्डर (बिचौलिए) के पास जमा करना होता है। इस खरीद-बिक्री को सीए निवेशक के बैंक खाते से नहीं दिखाता है।
ऑनलाइन ट्रेडिंग से खूब खपाया जाता है काला धन
शहर के बाजार से ऑनलाइन सोने-चांदी, लोहे और तेल के अवैध बाजार का बड़ा कारोबार संचालित हो रहा है। आय निवेशक इस वित्तीय धोखाधड़ी में काले धन को सफेद कर रहे हैं। शहर में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का ऑनलाइन अवैध व्यापार हो रहा है।
इसमें कुल लागत का 40 प्रतिशत तो ऑनलाइन पंजीकृत खाताधारक संचालित कर रहे, जबकि 60 प्रतिशत का बाजार आय निवेशक और खाताधारक की लाल डायरी में सिमट कर रह जाता है। कमोडिटी मार्केट के माध्यम से इन दिनों सीए शहर के सभी वर्ग के बड़े व्यापारियों का काला धन, सफेद बनाकर रियल एस्टेट लाइन में खपाया जा रहा है।
बजट के बाद दक्षिणांचल के धंधेबाजों को भी झटका
बजट में आयात शुल्क में कटौती ने जिले के दक्षिणांचल के धंधेबाजों को भी झटका दिया है। यहां के कई स्थानीय लोग बैंकॉक जाकर वहां की नागरिकता ले चुके हैं। पुलिस प्रशासन और एजेंसियों की सांठगांठ से वे लंबे समय से बैंकॉक से सोने को खपा रहे हैं। आयात शुल्क में कटौती होने से इनका धंधा ठप हो गया है।