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अलर्ट: ब्लोअर चलाकर देख रहे मोबाइल, लाल हो रहीं बच्चों की आंखें

Tue, 30 Jan 2024 05:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 30 Jan 2024 05:41 PM IST
सार

सामान्य तौर पर गर्मी के मौसम में ड्राई आई के मरीज बढ़ जाते हैं, लेकिन अब सर्दियों में भी आंखों की नमी सूखने के मरीज बढ़ गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में आर्द्रता कम हो जाती है, जबकि ब्लोअर और रूम हीटर से भी आर्द्रता में कमी होती है।

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Dry eye patients reaching doctors even in cold weather
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कड़ाके की ठंड में बंद कमरे में रूम हीटर और ब्लोअर चलाकर एकटक मोबाइल देखने वालों की आखों में लाली और सूजन के साथ दर्द हो रहा है। बच्चों में भी इस तरह की तकलीफ हो रही है, क्योंकि लोग मोबाइल को खिलौना के रूप में बच्चों का थमा दे रहे हैं। ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों में 15 से 20 प्रतिशत ड्राई आई वाले हैं।

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सामान्य तौर पर गर्मी के मौसम में ड्राई आई के मरीज बढ़ जाते हैं, लेकिन अब सर्दियों में भी आंखों की नमी सूखने के मरीज बढ़ गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में आर्द्रता कम हो जाती है, जबकि ब्लोअर और रूम हीटर से भी आर्द्रता में कमी होती है। इसके साथ ही मोबाइल पर एकटक देखने से झपकाने की क्रिया भी कम हो रही है। ऐसी स्थिति में आंखों में सूजन, लालीपन के साथ दर्द हो रहा है।
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डॉक्टरों के अनुसार, सर्दी के मौसम में ब्लोअर और रूम हीटर को कुछ देर चलाने के बाद बंद कर देना चाहिए, जबकि मोबाइल लगातार नहीं देखना चाहिए। इसके साथ ही यदि एलर्जी की समस्या है तो लुब्रिकेंट भी डालना चाहिए।
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पलक झपकाने की क्रिया में कमी
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रामकुमार ने कहा कि रूम हीटर और ब्लोअर के कारण हवा में आर्द्रता कम हो रही है। इसके साथ ही मोबाइल पर लगातार देखने से पलक झपकाने की क्रिया मंद हो जाती है। सामान्य तौर पर एक मिनट में 20 से 25 बार पलक झपकाना चाहिए, जबकि मोबाइल या कंप्यूटर, लैपटाप स्क्रीन पर देखने से यह 10-12 बार में ही सिमट जाता है। इससें आंखों में सूखापन आ रहा है। पलक झपकाने की क्रिया से द्रव्य निकलता है, जिससें आंखों में नमी बनी रहती है। सर्दी के मौसम में भी ओपीडी में 15 से 20 मरीज ड्राई आई के आ रहे हैं।
 

हीटर के रॉड से निकलती है हानिकारक गैस
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने कहा कि सर्दियों में आर्द्रता हो जाती है, यहीं कारण है कि लोगों की त्वचा भी ड्राई हो जाती है। ऐसे मौसम में रूम हीटर लगातार चलाने पर आद्रर्ता और कम हो जाती है। आर्द्रता कम होने से आंखों में सूखापन के कारण तकलीफ हो रही है। हीटर के रॉड जलने से ऑक्सीजन कम होता है, जबकि कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलता है। यह हानिकारक गैस भी नुकसान दायक है। सर्द मौसम में लोगों को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। बच्चे भी ड्राई आई की चपेट में आ रहे हैं।
 

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