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Gorakhpur News: 70 प्रतिशत गिरई मछली की आंत में परजीवी, संभलकर खाएं

Sat, 20 Jun 2026 02:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 02:27 AM IST
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Dr. Sushil Kumar and researcher Anil Kumar from the Department of Zoology at DDU conducted the research.
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने गिरई (गरई) मछली पर अहम शोध किया है। शोध के दौरान 70 प्रतिशत गिरई मछलियों की आंत में परजीवी पाए गए। यह मछलियों के साथ ही मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं।
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यह शोध किया है डीडीयू के प्राणि विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार और उनके शोधार्थी व बीआरडी पीजी कॉलेज, देवरिया के असिस्टेंट प्रोफेसर अनिल कुमार ने। यह शोध इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के जर्नल ''''''''इंडियन जर्नल ऑफ एनिमल साइंसेज'''''''' के जून के अंक में प्रकाशित हुआ है।
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डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि जून 2024 से मई 2025 यानी पूरे एक वर्ष तक चला था। प्रक्रिया के बाद अब इसका प्रकाशन हुआ है। इसके तहत देवरिया की घाघरा और गंडक नदियों से चार जगहों और सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी से तीन जगहों से नमूने लिए गए। दोनों जनपदों से 200-200 नमूने लिए गए।
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शोध में गिरई (चन्ना पंकटाटा- वैज्ञानिक नाम) में पाए जाने वाले हेल्मिंथ परजीवियों, जैसे फीता कृमि, चपटा कृमि व गोल कृमि का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि ये परजीवी जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं। ये परजीवी अपने जीवन चक्र के दौरान घोंघों, मछलियों, पक्षियों एवं विभिन्न स्तनधारी जीवों के बीच संचरित होते रहते हैं। इन परजीवियों के अंडीय, लार्वा व वयस्क चरण मछलियों के शरीर में पाए जा सकते हैं।


सालभर एक जैसा रहा फैलाव
स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के लिए चुने गए नमूनों को 2.5 प्रतिशत ग्लूटाराल्डिहाइड में फिक्स किया गया, बफर में धोया गया, इथेनॉल की बढ़ती सांद्रता वाली सीरीज में डिहाइड्रेट किया गया, क्रिटिकल पॉइंट ड्रायर में सुखाया गया और हाई वैक्यूम में इमेजिंग से पहले स्पटर कोटिंग की गई। मीठे पानी की मछलियों में हेलमिंथ पैरासाइट (कीड़े) के फैलाव, संख्या और औसत तीव्रता का स्तर देवरिया और सुल्तानपुर में साल भर एक जैसा रहा।



गिरई के आंतरिक अंगों को हटाना जरूरी

डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि परजीवी के कारण मछलियों का विकास भी प्रभावित होता है। मछलियों की आंत को निकाले बिना खाने पर परजीवी पेट में पहुंच सकता है और पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। मछलियों का सेवन करने से पहले उनके आंतरिक अंगों को ठीक प्रकार से हटाना और पूर्ण रूप से पकाकर खाना अत्यंत आवश्यक है। सही प्रकार से साफ करने एवं पकाने से संभावित संक्रमण के जोखिम को समाप्त कर देती है।
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