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भारत में पहला नोबल पुरस्कार 1913 में रविंदनाथ टैगोर को नहीं, कबीर को मिला: कुमार विश्वास
Wed, 29 Jan 2020 11:24 AM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, मगहर/बस्ती।
डिजिटल न्यूज डेस्क, मगहर/बस्ती।
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 29 Jan 2020 11:24 AM IST
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Kumar Vishwas
- फोटो : अमर उजाला।
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कबीर महान सूफी संत थे। भारत में पहला नोबल पुरस्कार 1913 में रविंदनाथ टैगोर को नहीं बल्कि कबीर को मिला है, क्योंकि रविंद्र नाथ टैगोर ने कबीर के 100 दोहों को अंग्रेजी में अनुवाद कर ‘वन हंड्रेड पोयम ऑफ कबीर’ किताब लिखी थी।
ये बातें मंगलवार को कवि व लेखक कुमार विश्वास ने कबीर चौरा परिसर में समाधि व मजार के दर्शन करने के बाद कहीं। उन्होंने आगे कहा कि उनके लिखे दोहे सांच बराबर तप नहीं व कबीर जब हम पैदा हुए..., आज भी जीवंत कर देने वाले हैं। कबीर सत्य के कितने करीब थे, यह उनकी शब्दावली से जाना जा सकता है। मगहर बहुत ही शांति का स्थान है। यहां आकर काफी शांति मिली।
28 वर्ष पहले कबीर दर्शन को आया था। आज पुन: उनके दर्शन प्राप्त हुए। उन्होंने मस्ती में धीरे से गाड़ी हांको मेरे भाई गाड़ीवान.., कबीरा जब हम पैदा हुए.., क्या काशी क्या ऊसर मगहर जो पाय हृदय राम बस मोरा... आदि दोहों को गुनगुनाया भी। इससे पूर्व महंत विचारदास ने सद्गुरु कबीर के बारे में उनके साथ विस्तार से चर्चा की। इस दौरान डॉ. हरिशरण शास्त्री ने अपनी किताब कबीर संत भजनावली उन्हें भेंट की।
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ये बातें मंगलवार को कवि व लेखक कुमार विश्वास ने कबीर चौरा परिसर में समाधि व मजार के दर्शन करने के बाद कहीं। उन्होंने आगे कहा कि उनके लिखे दोहे सांच बराबर तप नहीं व कबीर जब हम पैदा हुए..., आज भी जीवंत कर देने वाले हैं। कबीर सत्य के कितने करीब थे, यह उनकी शब्दावली से जाना जा सकता है। मगहर बहुत ही शांति का स्थान है। यहां आकर काफी शांति मिली।
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28 वर्ष पहले कबीर दर्शन को आया था। आज पुन: उनके दर्शन प्राप्त हुए। उन्होंने मस्ती में धीरे से गाड़ी हांको मेरे भाई गाड़ीवान.., कबीरा जब हम पैदा हुए.., क्या काशी क्या ऊसर मगहर जो पाय हृदय राम बस मोरा... आदि दोहों को गुनगुनाया भी। इससे पूर्व महंत विचारदास ने सद्गुरु कबीर के बारे में उनके साथ विस्तार से चर्चा की। इस दौरान डॉ. हरिशरण शास्त्री ने अपनी किताब कबीर संत भजनावली उन्हें भेंट की।
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दोहे बताते हैं सत्य के कितने करीब थे कबीर: कुमार विश्वास
वहीं मगहर में कुमार विश्वास ने कहा कि कबीर महान सूफी संत थे। कबीर ने दोनों समुदायों को बेबाकी के साथ फटकार लगाई और कहा दोनों जनि रहिया बिगाड़े ये भाई-हिंदू अपनी करे बड़ाई....,वहीं मुस्लिम को मुसलमान के पीर औलिया मुर्गी मुर्गा ..। भारत में पहला नोबल पुरस्कार 1913 में रविंदनाथ टैगोर को नहीं, बल्कि कबीर को मिला है, क्योंकि रविंद्र नाथ टैगोर ने कबीर के 100 दोहों को अंग्रेजी में अनुवाद कर वन हंड्रेड पोयम ऑफ कबीर किताब लिखी थी। यह बातें मंगलवार को कवि व लेखक कुमार विश्वास ने कबीर चौरा परिसर आकर समाधि व मजार के दर्शन करने के बाद कही।
उन्होंने आगे कहा कि यहां लिखे उनके दोहे सांच बराबर तप नहीं व कबीर जब हम पैदा हुए.., आज भी जीवंत कर देने वाले हैं। कबीर सत्य के कितने करीब थे, यह उनकी शब्दावली से जाना जा सकता है। यह बहुत ही शांति का स्थान है। यहां आकर काफी शांति मिली।
उन्होंने बताया कि 28 वर्ष पहले कबीर दर्शन को आए थे और आज पुन: उनके दर्शन प्राप्त हुए। उन्होंने मस्ती में धीरे से गाड़ी हांको मेरे भाई गाङी वान.., कबीरा जब हम पैदा हुए.., क्या काशी क्या ऊसर मगहर जो पाय हृदय राम बस मोरा.., आदि दोहों को भी गुनगुनाया। इससे पूर्व महंत विचारदास ने सद्गुरु कबीर के बारे में विस्तार से चर्चा की।
इस दौरान डॉक्टर हरिशरण शास्त्री ने अपनी लिखी हुई किताब कबीर संत भजनावली, जिन ढूंढा तीन पैईया, पंडित बाद बदंते झूठा, उन्हें भेंट की। इस मौके पर संत अमरीक सिंह, संत शांतिदास, संत केशव दस, बाबूराम दास, डॉक्टर हरिशरण शास्त्री, राम सरन दास, विनोद दास, विजय तिवारी आदि मौजूद रहे।
उन्होंने आगे कहा कि यहां लिखे उनके दोहे सांच बराबर तप नहीं व कबीर जब हम पैदा हुए.., आज भी जीवंत कर देने वाले हैं। कबीर सत्य के कितने करीब थे, यह उनकी शब्दावली से जाना जा सकता है। यह बहुत ही शांति का स्थान है। यहां आकर काफी शांति मिली।
उन्होंने बताया कि 28 वर्ष पहले कबीर दर्शन को आए थे और आज पुन: उनके दर्शन प्राप्त हुए। उन्होंने मस्ती में धीरे से गाड़ी हांको मेरे भाई गाङी वान.., कबीरा जब हम पैदा हुए.., क्या काशी क्या ऊसर मगहर जो पाय हृदय राम बस मोरा.., आदि दोहों को भी गुनगुनाया। इससे पूर्व महंत विचारदास ने सद्गुरु कबीर के बारे में विस्तार से चर्चा की।
इस दौरान डॉक्टर हरिशरण शास्त्री ने अपनी लिखी हुई किताब कबीर संत भजनावली, जिन ढूंढा तीन पैईया, पंडित बाद बदंते झूठा, उन्हें भेंट की। इस मौके पर संत अमरीक सिंह, संत शांतिदास, संत केशव दस, बाबूराम दास, डॉक्टर हरिशरण शास्त्री, राम सरन दास, विनोद दास, विजय तिवारी आदि मौजूद रहे।
बस्ती महोत्सव: कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं से जीता लोगों का दिल
जीआईसी ग्राउंड पर आयोजित बस्ती महोत्सव के दौरान मंगलवार की देर रात तक कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का दौर चलता रहा। मशहूर कवि एवं लेखक कुमार विश्वास की अध्यक्षता में देश के कई नामचीन कवियों-गीतकारों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। अमन अक्षर, हेमंत पांडेय, शबा कानपुरी, मुमताज नसीम आदि से सजे मंच पर देश काल के हालात से लेकर शृंगार और हास्य रस की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों की श्रृंखला चलती रही। हल्की-हल्की ओंस की बूंदों के बीच ज्यों-ज्यों रात ढल रही थी त्यों-त्यों रात तालियों, ठहाकों व वाहवाह की गूंज से और जवां होती रही। न ओस की परवाह रही न ढलती रात की चिंता।
कवि सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले काव्य जगत को ऊंचाई पर पहुंचाने वाले कुमार विश्वास ने मंच पर उपस्थित कवियों-रचनाकारों का परिचय कराते हुए आयोजक मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया। कहा कि 31 वर्ष की काव्य यात्रा के दौरान आज 28 जनवरी को महर्षि वशिष्ट एवं महान समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल की धरती का वंदन अभिनंदन करने का अवसर मिला। ग्राउंड में उपस्थित अपार जन समूह देख गदगद कुमार विश्वास ने अपने अंदाज में कटाक्ष किया। बोले कि वह पहला वामपंथ ऐसा देख रहे हैं जो इतना मुखर है। कहा कि शब्दों की गंभीरता कई बार भीड़ में गुम हो जाती है।
स्थानीय कवि विवेकानंद मिश्र से कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई। तेजी से ख्याति प्राप्त करते जा रहे युवा कवि अमन अक्षर ने अपनी बहुचर्चित रचना भाव सूचियां बहुत हैं, भाव सिर्फ राम हैं... सुनकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इस काव्य रचना की एक-एक पंक्तियों पर श्रोता मानो मंत्रमुग्ध होते गए। इस क्रम में हम पर तुम्हारे प्यार ने एहसान कर दिया, पूछा सहेलियों ने दिल में बसा है कौन, मैने तुम्हारे नाम का ऐलान कर दिया... सुनाया गया। सांसद हरीश द्विवेदी, विधायक गण के अलावा आईजी आशुतोष कुमार, डीएम आशुतोष निरंजन, एसपी हेमराज मीणा, एएसपी पंकज पांडेय आदि अधिकारी अंतिम क्षण तक कविता का आनंद उठाते रहे।
कवि सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले काव्य जगत को ऊंचाई पर पहुंचाने वाले कुमार विश्वास ने मंच पर उपस्थित कवियों-रचनाकारों का परिचय कराते हुए आयोजक मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया। कहा कि 31 वर्ष की काव्य यात्रा के दौरान आज 28 जनवरी को महर्षि वशिष्ट एवं महान समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल की धरती का वंदन अभिनंदन करने का अवसर मिला। ग्राउंड में उपस्थित अपार जन समूह देख गदगद कुमार विश्वास ने अपने अंदाज में कटाक्ष किया। बोले कि वह पहला वामपंथ ऐसा देख रहे हैं जो इतना मुखर है। कहा कि शब्दों की गंभीरता कई बार भीड़ में गुम हो जाती है।
स्थानीय कवि विवेकानंद मिश्र से कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई। तेजी से ख्याति प्राप्त करते जा रहे युवा कवि अमन अक्षर ने अपनी बहुचर्चित रचना भाव सूचियां बहुत हैं, भाव सिर्फ राम हैं... सुनकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इस काव्य रचना की एक-एक पंक्तियों पर श्रोता मानो मंत्रमुग्ध होते गए। इस क्रम में हम पर तुम्हारे प्यार ने एहसान कर दिया, पूछा सहेलियों ने दिल में बसा है कौन, मैने तुम्हारे नाम का ऐलान कर दिया... सुनाया गया। सांसद हरीश द्विवेदी, विधायक गण के अलावा आईजी आशुतोष कुमार, डीएम आशुतोष निरंजन, एसपी हेमराज मीणा, एएसपी पंकज पांडेय आदि अधिकारी अंतिम क्षण तक कविता का आनंद उठाते रहे।