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Gorakhpur News: नकली दवाओं के खेल में डॉक्टर भी हो रहे फेल

Sun, 30 Apr 2023 09:14 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 30 Apr 2023 09:14 PM IST
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Doctors are also failing in the game of spurious drugs
मरीजों पर ब्रांडेड दवाओं का भी असर नहीं, ड्रग विभाग ने ऐसी 15 दवाएं जांच के लिए भेजी
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हिमाचल और उत्तराखंड में नकली दवा पकड़े जाने के बाद ड्रग विभाग जांच में जुटी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नकली दवाओं के खेल में डॉक्टर भी फेल हो रहे हैं। मरीजों को लिखने वाली दवाओं का असर न के बराबर होता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों को बार-बार दवाएं बदलनी पड़ रही हैं। यही कारण है कि डॉक्टरों ने दवाओं का असर जानने के लिए जांच करा रहे हैं। इसे लेकर विभाग ने भी इस माह 15 अलग-अलग दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है।
नकली दवाओं का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। यह दवाएं हिमाचल और उत्तराखंड से बनकर आ रही हैं, जो पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडी भालोटिया मार्केट में भी खप रही है। एसटीएफ लखनऊ ने इसका खुलासा भी कर दिया है।
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बताया जा रहा है कि यह दवाएं लखनऊ के रास्ते गोरखपुर और वाराणसी पहुंच रही हैं, जहां से इन्हें बिहार, नेपाल और बंगाल तक भेजा जा रहा है। यही कारण है कि शासन ने ड्रग विभाग को निर्देश दिया है कि ऐसी दवाओं पर नजर रखें। इन दवाओं में कैंसर, विटामिन, दर्द निवारक जैसी दवाएं शामिल हैं।
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नई कंपनी की दवाओं में मिलावट का हो रहा खेल
ड्रग विभाग की अधिकारियों की माने तो नई कंपनी की दवाओं में मिलावट का खेल हो रहा है। विभागीय रिपोर्ट देखें तो यह खेल काफी समय से चल रहा है। वर्ष 2022 की बात करें तो दवा के करीब 180 से अधिक सैंपल की जांच की गई। इसमें कुछ दवाएं अधोमानक मिलीं तो कुछ नकली भी पाई गईं। विभाग ने मंडल में करीब तीन से चार करोड़ रुपये की दवाएं सीज की हैं, इनमें सभी दवाएं नई कंपनियों की थी।
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इस वर्ष लिए गए 60 दवाओं के अलग-अलग बैच के सैंपल
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि इस वर्ष 60 अलग-अलग बैच के दवाओं के सैंपल जांच के लिए लिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। इनमें दर्द, कैंसर, विटामिन, घाव सूखने वाली दवाएं, एंटीबायोटिक, खांसी के सीरप शामिल हैं। इस माह भी करीब 15 सैंपल लिए गए हैं।
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दवा असर न करें तो डॉक्टर से जरूर मिले
न्यूरो सर्जन डॉ. सतीश नायक ने बताया कि न्यूरो के रोग में एक माह तक दवा खाने के बाद जब असर नहीं हुआ तो दूसरे बैच की दवाएं दी गईं। दूसरे बैच की दवाओं का असर जल्द शुरू हाे गया। इससे स्पष्ट है कि टैबलेट में दवा की मात्रा कम होगी। ऐसी स्थिति में अगर दवाओं का असर न हो तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें।
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एक्टिव कम्पाउंड कम होगा तो दवा नहीं करेगी असर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के फाॅर्माकोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रो. जमाल हैदर ने बताया कि किसी भी टैबलेट अथवा कैप्सूल में एक्टिव कंपाउंड कम होगा तो उसकी कीमत कम होगी। अगर क्रोसिन के टैबलेट में 500 एमजी के बजाय सिर्फ 100 एमजी की मात्रा होगी तो वह मरीज पर कारगर नहीं होगी। नकली दवा बनाने वाली कंपनियां यही खेल करती हैं।

कोट
अलग-अलग बैच नंबर की दवाओं का सैंपल लिया गया है। अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। अधोमानक और नकली दवाएं अगर मिलती हैं तो संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे लोगों पर विभाग की पूरी नजर है।
- जय सिंह, ड्रग इंस्पेक्टर
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