हाल गोरखपुर तहसील का: मामूली फीस बचाने के चक्कर में न गंवा बैठना लाखों की जमीन
बेतियाहाता निवासी राजीव मिश्र पुत्र दिवंगत मेजर शेषमणि मिश्र ने बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक सहित पांच लोगों के खिलाफ कैंट थाना में मुकदमा दर्ज कराया। पीड़ित ने बैंक की तरफ से सूचना पर तीन प्लाट लिए। इसके लिए 26,54400 रुपये जमा कराए। 11 दिसंबर 2020 को तीनों प्लाटों का बिक्री प्रमाण पत्र मिलने के बाद वह जमीन पर मिट्टी पटवाने गए ,तो तहसील कर्मियों ने सार्वजनिक पोखरे की भूमि बताकर काम रोक दिया।
विस्तार
आप कोई जमीन या मकान खरीदने वाले हैं, तो सभी दस्तावेजों की जांच जरूर करा लें। कहीं ऐसा न हो कि जांच-पड़ताल में खर्च होने वाले दो-ढाई हजार बचाने के फेर में लाखों रुपये खतरे में पड़ जाएं। फर्जीवाड़े के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। दलालों के झांसे में आकर प्रापर्टी खरीद ली और बैनामे के बाद जब खारिज-दाखिल या कब्जा लेने गए ताे पता चला कि प्रापर्टी पहले ही किसी और को बेच दी गई है। ऐसे कई लोग अब कोर्ट-कचहरी का चक्कर काट रहे हैं। गाढ़ी कमाई तो डूब ही गई है, पूरा परिवार तनाव में है।
पुराने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में रोजाना औसतन 100 रजिस्ट्री होती है। भूमि की रजिस्ट्री होने के बाद इसका खारिज-दाखिल कराया जाता है। नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होने पर कई बार ऐसे पेच फंसते हैं, जिनसे लाखों रुपये की डीड करने वाले खरीदार कब्जा नहीं पाते हैं। पता चलता है कि प्रॉपर्टी बेच दी गई है। अधिवक्ताओं की सलाह है कि इस तरह की समस्या से बचने के लिए जमीन खरीदने से पहले उसकी बारीकी से पड़ताल कराएं।
केस एक :
राजस्व की जमीन दिखाकर हड़प ली रकम
बेतियाहाता निवासी राजीव मिश्र पुत्र दिवंगत मेजर शेषमणि मिश्र ने बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक सहित पांच लोगों के खिलाफ कैंट थाना में मुकदमा दर्ज कराया। पीड़ित ने बैंक की तरफ से सूचना पर तीन प्लाट लिए। इसके लिए 26,54400 रुपये जमा कराए। 11 दिसंबर 2020 को तीनों प्लाटों का बिक्री प्रमाण पत्र मिलने के बाद वह जमीन पर मिट्टी पटवाने गए ,तो तहसील कर्मियों ने सार्वजनिक पोखरे की भूमि बताकर काम रोक दिया।
केस दो :
जमीन पर पहुंचे तो कोई और करा रहा था निर्माण
गुलरिहा थाना जंगल डुमरी नंबर दो, मंदिर बाजार के बरई टोला के बबलू को झांसा देकर जालसाजों ने 21,5000 रुपये में जमीन का सौदा तय किया। एडवांस के रूप में साढ़े छह लाख रुपये ले लिए। जून 2022 में बबलू जमीन पर पहुंचे, तो वहां कोई अन्य व्यक्ति निर्माण कार्य करा रहा था। इस मामले में पीड़ित ने गुलरिहा पुलिस को तहरीर दी। जालसाजी, धोखाधड़ी, जानमाल की धमकी देने, कूट रचना दर्ज करने सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करके पुलिस कार्रवाई में जुटी है।
जमीन के रिकाॅर्ड से लें पूरी जानकारी, तब करें सौदेबाजी
खेती की जमीन हो फिर अन्य कोई भूमि, खरीदने से पहले पूरी जानकारी करना जरूरी है। भू राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दस्तावेज मौजूद रहते हैं। खसरा खतौनी का बस्ता बनाकर रखा जाता है। जमीन के खसरा नंबर से उसकी पूरी जानकारी मिल जाती है। तहसील में आवेदन करके जमीन का मुआयना कराया जाता है। पैतृक भूमि से खतौनी के सही नाम की जानकारी हो जाती है। भूमि किस-किस के नाम से रही है।
इसका 12 साल का रिकार्ड निकाला जाता है। अधिवक्ताओं के अनुसार, यदि कोई व्यावसायिक प्लाट हैं, तो उसका रिकार्ड भी मिलेगा। कुछ लोग बंधक रखी भूमि को बेच देते हैं। आम लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती। ऐसे में वह ठगी के शिकार होते हैं। इसके अलावा भूमि का लैंड यूज ( भू उपयोग) भी जांचना जरूरी होता है।
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विकास प्राधिकरण से अधिग्रहित भूमि खरीदने पर भी कब्जेदारी में दिक्कत आएगी। शहरों में ग्रीन बेल्ट भी आरक्षित होता है। कुछ प्रॉपर्टी कारोबारी ग्रीन बेल्ट को छिपाकर भी जमीन बेच देते हैं। इसलिए भू उपयोग की पूरी जानकारी लेना जरूरी है। खतौनी का मुआयना कराने में 12.50 रुपये का सरकारी शुल्क जमा होता है। 12 साल के रिकॉर्ड लिए 120 रुपये की रसीद कटती है। भेंट कराई, फोटोकापी सहित अन्य खर्चों को मिलाकर कुल ढाई हजार रकम खर्च हो जाती है।
दलालों के चक्कर में फंसकर लोग उठाते नुकसान
अधिकांश लोग दलालों के झांसे में आकर जमीन खरीद लेते हैं। जबकि जमीन बेचने के चक्कर में दलाल सही जानकारी नहीं देते हैं। उनका पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि किसी तरह से बैनामा होकर पैसा मिल जाए। जमीनों के बिचौलिया अक्सर खरीदारों को बता देते हैं कि उन लोगों ने पूरी जांच कर ली है। उनके बातचीत, ऑफिस का तामझाम और मौके पर जमीन देखकर लोग आसानी से उसे खरीद लेते हैं।
जानकारों का कहना है कि इसके पीछे पूरा रैकेट काम करता है। रैकेट के कुछ सदस्यों का काम खरीदार को भरोसा दिलाना होता है कि जमीन पर कोई विवाद नहीं है। अक्सर बिचौलिए ही लोगों को गोपनीयता की बात कहकर गुमराह कर देते हैं। डीड की जानकारी किसी को न हो, इस चक्कर में लोग जांच पड़ताल कराने की जगह विक्रेता की बातों पर यकीन कर लेते हैं।
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ये बरतें सावधानी तो नहीं होगी परेशानी
- किसी जमीन को खरीदने के पहले उसके खसरा- खतौनी की जांच कराएं। जमीन का 12 साल का रिकॉर्ड जरूर चेक करवा लें।
- कोई जमीन कहां पर है। उसका भू-उपयोग क्या है। इसके बारे में जानकारी लें। कई बार कृषि जमीन का उपयोग बदलकर गैर कृषि कर दिया जाता है। इस तरह की जमीन की भी जानकारी लें।
- जो जमीन आप लेने जा रहे हैं। वह व्यावसायिक या इंडस्ट्रियल जोन में है, तो कतई न खरीदें। ऐसे क्षेत्रों में रिहायशी मकान बनाना अवैध होता है।
एक्सपर्ट कमेंट
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किसी जमीन की खरीद के पहले पूरी छानबीन करनी चाहिए। भूमि की खतौनी, उसके इस्तेमाल (लैंडयूज), 12 साला और सीलिंग की जांच हर हाल में जरूरी है। जिस जमीन को आप लेने जा रहे हैं। उसे विकास प्राधिकरण की तरफ से अधिग्रहित तो नहीं किया गया है, इसकी भी जानकारी कर लें। थोड़े से पैसे खर्च करके इसकी जांच हो जाती है। अधिवक्ता अपने हिसाब से जांच फीस लेते हैं। कोई मानक तय नहीं है। : कुलदीप पाठक, वरिष्ठ अधिवक्ता, तहसील सदर।
अधिकांश लोग जमीन की खरीद प्रॉपर्टी डीलर के जरिए करते हैं। प्रॉपर्टी डीलर ही झांसा देकर जमीन बिकवा देते हैं। वह बता देते हैं कि सारी जांच हो गई है। इसलिए तमाम लोग उन पर भरोसा कर लेते हैं। कोई भी जमीन लेने के पहले अपने अधिवक्ता के पास जाएं। उनसे पूरी पड़ताल कराएं। इसके बाद ही भूमि की रजिस्ट्री कराएं। : विनय कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता, तहसील सदर।