Diwali 2021: आतिशबाजी करने से पहले हो जाएं सतर्क, ऐसे बरतें सावधानियां
आतिशबाजी करें लेकिन हाथ, आंख व चेहरा सुरक्षित रखें। पटाखे फोड़ते समय बच्चों के प्रति ज्यादा सावधानी बरतनें की जरूरत है। आतिशबाजी करना ही है तो अपनी ही देखरेख में ही पटाखे जलाएं।
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दिवाली में पटाखे फोड़ने और आतिशबाजी के दौरान हाथ, आंख और चेहरा सुरक्षित रखें। खासकर बच्चों को आतिशबाजी के दौरान अपनी सख्त निगरानी बनाए रखिए। आतिशबाजी के दौरान यदि जल जाएं तो सबसे पहले जले हुए हिस्से को बहते हुए पानी से साफ कर लें। तत्काल नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में परामर्श लें।
जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह कहते हैं कि ध्यान रखें जले हुए भाग को ठंडे पानी या बर्फ से नहीं धोना है और जले हुए हिस्से पर टूथपेस्ट या हल्दी भी न लगानी है। उन्होंने बताया कि आतिशबाजी का प्रदूषण आंखों, नाक और गले के अलावा फेफड़ों को भी प्रभावित करता है। प्रदूषण से सांस और एलर्जी की समस्या होती है। डॉ सिंह ने बताया कि बच्चों को पटाखों से दूर रखें। यदि आतिशबाजी करना ही है तो अपनी ही देखरेख में ही पटाखे जलाएं।
कैसे करें आतिशबाजी
- आतिशबाजी के दौरान बच्चों को सख्त निगरानी में रखें।
- आतिशबाजी स्थल पर एक बाल्टी पानी और प्राथमिक उपचार किट साथ में रखें।
- एक समय में एक व्यक्ति और एक पटाखा ही जलाएं।
- जला चुके पटाखे को दोबारा न छूएं, कभी भी फट सकता है।
- झोपड़ी के आसपास या फिर बंद कमरे में कभी भी पटाखा न जलाएं।
- राकेट या हवा में उड़ने वाले पटाखे जलाने से पहले सीधा कर लें।
- यथासंभव जीरो पावर वाला चश्मा लगाकर ही आतिशबाजी करें ।
दूर रखें सैनिटाइज
- आतिशबाजी से पहले पटाखों और अपने हाथ को सैनिटाइज करने से बचें।
- आतिशबाजी से पूर्व साबुन से हाथ धोएं।
- सैनिटाइजर एक ज्वलनशील सामग्री है, इससे आग लगने का खतरा रहता है।
हरित पटाखे ही खरीदें
हरित पटाखों को प्रदूषण के मानकों पर तैयार किया जाता है। इसमें सल्फर और नाइट्रोजन की मात्रा कम रखी जाती है। इनकी आवाज और रोशनी भी पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम होती है। हालांकि हरित पटाखे भी सामान्य पटाखों की तरह तैयार किए जाते हैं।