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गोरखपुर: कमिश्नर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठक, कहा- 'किसी हाल में नहीं होनी चाहिए मरीजों की मौत'

Tue, 21 Jul 2020 10:35 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 21 Jul 2020 10:35 AM IST
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Divisional Commissioner Jayant Narlikar gave Instructions to health department officials in gorakhpur
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंडलायुक्त जयंत नार्लीकर ने आयुक्त सभागार में कोविड संक्रमण से बचाव को लेकर सोमवार को बैठक की। निर्देश दिया कि किसी भी हाल में मरीजों की मौत नहीं होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि जिले के ब्रह्मपुर, डेरवा, गगहा, सरदारनगर, कुशीनगर के रामकोला, कप्तानगंज, विशुनपुरा सहित पडरौना एवं अन्य पीएचसी के एमओआईसी को निर्देशित किया कि कोविड की मॉनिटरिंग की जाए। सीएमओ भी मामले की निगरानी करते रहे। नान कोविड अस्पतालों में भर्ती किए जा रहे मरीजों की सर्जरी से पहले ट्रूनेट मशीन से जांच की जाए। इसकी पूरी रिपोर्ट पांच अगस्त तक दें।
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उन्होंने जेई/एईएस की मृत्यु की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि पशुपालन, मत्स्य, जलनिगम, पंचायत एवं स्वास्थ्य विभाग गांव में सफाई, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था एवं अन्य कार्यों में तेजी लाए। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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इस बीच मंडलायुक्त ने शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए संयुक्त विकास आयुक्त की अध्यक्षता में जलनिगम, पंचायत, स्वास्थ्य, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के तकनीकी विशेषज्ञ की समिति का गठन किया। समिति तीन दिनों में जांच करके खराब नलों के चिन्हीकरण, शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उपायों, संसाधन एवं आदि के बारे में रिपोर्ट देगी।

निर्देश दिया कि 15 से 30 जुलाई तक जांच कर रिपोर्ट दी जाए की जेई/एईएस के कितने मरीज ईटीसी पर भर्ती न होकर किन परिस्थितियों में सीधे बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए हैं। इस मौके पर संयुक्त विकास आयुक्त उग्रसेन पांडेय, अपर निदेशक स्वास्थ्य जेएम त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

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