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UP News: 5.60 करोड़ रुपये की जालसाजी की आरोपी डायरेक्टर गिरफ्तार, गोरखपुर के बड़े प्रोजेक्ट पर कर चुकी है काम

Mon, 29 May 2023 01:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 29 May 2023 01:14 PM IST
सार

रंजना ने कंपनी के डायरेक्टर का फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर एसएस कंपनी के नाम फर्जी खाता लखनऊ के विजय बैंक में खोल दिया और उसमें 1 करोड़ 38 लाख 21 हजार रुपये की राशि की जालसाजी कर ली।

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Director Ranjana accused of forgery of Rs 5.60 crore, arrested
आरोपी डायरेक्टर रंजना सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाराष्ट्र के फर्म के साथ समझौता कर गोरखपुर के चिड़ियाघर बाउंड्रीवाल, कचहरी बस स्टैंड, ऑडिटोरियम जैसे कामों को कराने वाली फर्म की डायरेक्टर रंजना सिंह को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि आवंटित धन को धोखे व कूटरचित दस्तावेज पर रंजना ने 5 करोड़, 60 लाख 83 हजार रुपये अपने फर्म के खाते में मंगवा लिए। मामला सामने आने पर रामगढ़ताल थाने में न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज किया गया था। दो साल की जांच के बाद पुलिस ने रविवार को आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेजा गया।
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पकड़ी गई आरोपी की पहचान गोविंद भवन, लखनऊ निवासी रंजना सिंह के रूप में हुई है। वह एल्फेन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में डायरेक्टर थीं। पुलिस के मुताबिक, महाराष्ट्र के एसएस कंस्ट्रक्शन के जनरल मैनेजर रमेश भालचन्द बोरनारकर ने 20 अप्रैल 2021 को केस दर्ज कराया था। रमेश का आरोप है कि उनकी फर्म एसएस कंस्ट्रक्शन को सरकारी कामों के लिए बैंक गांरटी भरकर बोली के माध्यम से काम मिला था। इसके बाद लखनऊ की फर्म से समझौता किया गया।
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रंजना सिंह ने बताया कि फर्म में लालबहादुर सिंह भी डायरेक्टर हैं और वह भी कंपनी के कामकाज को देखते हैं। तय समझौते के हिसाब एल्फेन कंपनी को काम कराकर उस कार्य से संबंधित बिल बाउचर को भुगतान के लिए राजकीय निर्माण निगम विभाग को भेजना था और उस बिल का भुगतान राजकीय निगम द्वारा एसएस कांस्ट्रक्शन को करना था। इसके बाद भुगतान में से सात प्रतिशत राशि व अन्य खर्च कटौती करके एसएस कांस्ट्रक्शन द्वारा एल्फेन कंपनी को भुगतान करना तय हुआ था। लेकिन, एल्फेन कंपनी की रंजना सिंह ने जू बाउंड्रीवाल, सुकरौली में डिग्री कॉलेज का निर्माण कराया, लेकिन उस काम को कराने के बाद रंजना ने एसएस कंपनी को पैसे नहीं भेजे।
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रंजना ने कंपनी के डायरेक्टर का फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर एसएस कंपनी के नाम फर्जी खाता लखनऊ के विजय बैंक में खोल दिया और उसमें 1 करोड़ 38 लाख 21 हजार रुपये की राशि की जालसाजी कर ली। इसके बाद 24 नवंबर 2018 को दोनों कंपनी के बीच समझौता हुआ कि रंजना रुपये वापस कर देगी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।


इसके बाद कंपनी ने 20 फरवरी 2019 को ऑडिटोरियम व कचहरी बस स्टैंड के कामों को कराने के लिए रंजना के फर्म को अलग कर दिया। लेकिन, पूर्व के करार के अनुसार राज्य निर्माण निगम ने कराए गए काम के लिए दो करोड़, 31 लाख 83 हजार रुपये के राशि भी रंजना के खाते में ट्रांसफर कर दी। उसने उस रकम को भी वापस नहीं किया। इसके अलावा ठेकेदारों का भी भुगतान नहीं किया। इस प्रकार रंजना ने कुल मिलाकर 5 करोड़, 60 लाख 83 हजार रुपये की जालसाजी कर हड़प लिया।

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