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Aditya L1: सूरज का रहस्य खोलेगा आदित्य एल-1 में लगा गोरखपुर के वागीश का उपकरण, DDU के रहे हैं छात्र

Mon, 04 Sep 2023 10:22 AM IST
vivek shukla राम मनोहर त्रिपाठी, गोरखपुर।
राम मनोहर त्रिपाठी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 04 Sep 2023 10:22 AM IST
सार

डॉ. वागीश ने बताया कि इस संयंत्र के जरिए सूर्य पर हर समय नजर रखने में कोई भी बाधा नहीं आएगी, यहां तक कि सूर्य ग्रहण के दौरान भी आसानी से निगरानी की जा सकेगी। यह पहला मिशन है, जो सूर्य की परिधि (कोरोना) के अंदरूनी हिस्से को करीब से देखेगा।

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device of Gorakhpur Dr Vagish installed in Aditya L 1 will reveal secret of sun
आदित्य एल 1 के लिए संयंत्र तैयार करने वाले वैज्ञानिक डॉ. वागीश मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सूर्य के अध्ययन के लिए भारत के पहले समर्पित वैज्ञानिक मिशन ‘आदित्य-एल1’ में लगे मुख्य पेलोड (संयंत्र) विजिबल इमिसन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) का निर्माण दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. वागीश मिश्रा व उनकी टीम ने किया है। इसरो ने इस संयंत्र को वीईएलसी से तैयार कराया है। इसके जरिए सूर्य पर हर समय नजर रखने में कोई भी बाधा नहीं आएगी, यहां तक कि सूर्य ग्रहण के दौरान भी। सूर्य के व्यापक अध्ययन और अवलोकन के लिए उपग्रह के साथ गए सात उपकरणों में से यह प्रमुख है।

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वागीश, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स बंगलूरू में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। वह मूलत: देवरिया जिले के रामनाथ, देवरिया के निवासी शिक्षक नागेश मिश्रा के पुत्र हैं। डॉ. वागीश ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीएससी और वर्ष 2009 में एमएससी फिजिक्स की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद से खगोल और अंतरिक्ष पर शोध किया। इसके बाद वह पोस्ट डाॅक्टरल के लिए विदेश चले गए, जहां विश्व की दूसरी प्रयोगशालाओं में काम किया।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के आदित्य एल-1 प्रोजेक्ट की जानकारी होने पर वह फरवरी 2021 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (भारतीय ताराभौतिकी संस्थान) बंगलूरू से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद तैनात हुए। तभी से वे विजिबल इमिसन लाइन कोरोनाग्राफ की वैज्ञानिक टीम का हिस्सा हैं और वीईएलसी संयंत्र को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है।
 

अंदरूनी हिस्से को करीब से देखने को मिलेगा

डॉ. वागीश ने बताया कि इस संयंत्र के जरिए सूर्य पर हर समय नजर रखने में कोई भी बाधा नहीं आएगी, यहां तक कि सूर्य ग्रहण के दौरान भी आसानी से निगरानी की जा सकेगी। यह पहला मिशन है, जो सूर्य की परिधि (कोरोना) के अंदरूनी हिस्से को करीब से देखेगा। आदित्य-एल1 अंतरिक्ष मिशन का लक्ष्य सूरज के गतिविधियों को समझकर अंतरिक्ष मौसम का जानकारी प्राप्त करना है। आदित्य-एल-1 पर कुल सात संयंत्र हैं, जिसमें मुख्य विजिबल इमिसन लाइन कोरोनाग्राफ़ (वीईएलसी ) है, जो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बंगलूरू में तैयार किया गया है।


 

जर्मनी में पोस्ट-डाक्टरल फेलो के रूप में थे कार्यरत

भारतीय ताराभौतिकी संस्था, बंगलूरू में तैनाती से पूर्व डॉ. वागीश मिश्रा जर्मनी में स्थित विश्व प्रसिद्ध मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फाॅर सोलर सिस्टम रिसर्च में पोस्ट-डॉक्टरल फेलो के रूप में कार्यरत थे। जर्मनी जाने से पहले भी वह चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेस से पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप लेकर चीन में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके साथ ही अमेरिका में स्थित जॉर्ज मैसन यूनिवर्सिटी वर्जीनिया में जाकर भी शोध कार्य किए हैं। भारत में इसरो के आदित्य एल 1 प्रोजेक्ट की जानकारी होने पर वह अपनी सेवा देने स्वदेश चले आए।


 

डॉ. वागीश ने गोविवि के शिक्षकों का जताया आभार

भारत के पहले अंतरिक्ष मिशन आदित्य-एल-1 जैसे प्रोजेक्ट में काम करके वागीश बेहद खुश हैं। वह इस मिशन के नए प्रेक्षणों के विश्लेषण से नई खोज करने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने अपनी इस सफलता के लिए गोविवि भौतिकी विभाग के प्रो. शान्तनु रस्तोगी, सुग्रीव तिवारी, उमाशंकर पांडेय और रविशंकर सिंह से मिले मार्गदर्शन के लिए आभार जताया है।

 
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