Doctor Transferred: गोरखपुर में पहले ही डॉक्टर कम थे, तबादलों ने बढ़ाई मुसीबत
जिला अस्पताल से डॉक्टरों के तबादले के बाद मरीजों की मुसीबत बढ़ गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत बाल रोग विशेषज्ञ और फिजिशयन के स्थानांतरण के बाद हुई है। इन दोनों विभागों में मरीजों की ओपीडी सबसे अधिक होती है।
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गोरखपुर जिला अस्पताल, पहले ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा था, हाल ही में हुए तबादलों ने मुसीबत और बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें डॉक्टर के अभाव में समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है या फिर उन्हें निजी अस्पतालों की शरण में जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल से डॉक्टरों के तबादले के बाद मरीजों की मुसीबत बढ़ गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत बाल रोग विशेषज्ञ और फिजिशयन के स्थानांतरण के बाद हुई है। इन दोनों विभागों में मरीजों की ओपीडी सबसे अधिक होती है।
जिन आठ डॉक्टरों के तबादले हुए हैं, उनमें तीन बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। इन डॉक्टरों के जाने के बाद दो पीआईसीयू और एक संविदा पर तैनात डॉक्टर बचे हैं। इनमें केवल एक डॉक्टर के भरोसे ओपीडी चल रही है। 52 डॉक्टरों के सापेक्ष इस वक्त केवल 26 डॉक्टरों के भरोसे जिला अस्पताल चल रहा है।
300 से अधिक बच्चों की हैं ओपीडी
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज आते हैं। डॉक्टरों के स्थानांतरण के बाद यह संख्या 70 से 80 के बीच सिमटकर रह गई है। अन्य मरीज बिना इलाज कराए ही लौट जा रहे हैं। क्योंकि, मौजूदा समय में संविदा पर तैनात एक डॉक्टर ही ओपीडी में मरीजों को देख रहे हैं। इनके पास भी मरीजों की भीड़ लग रही है। अन्य दो बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती 17 बेड के पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर (पीआईसीयू) यूनिट में है। यहां गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों का इलाज चल रहा है।
फिजिशियन के स्थानांतरण के बाद लौट रहे 150 से अधिक मरीज
जिला अस्पताल में तीन फिजिशियन की तैनाती थी। एक फिजिशियन के स्थानांतरण के बाद केवल दो डॉक्टर रह गए हैं। इसकी वजह से प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज बिना इलाज के लौट जा रहे हैं। जबकि, मौजूदा समय में लोगों को सबसे अधिक दिक्कतें सर्दी, जुकाम, वायरल फीवर के हैं। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
हड्डी रोग विभाग के दो डॉक्टर गए, ओपीडी में बढ़ी परेशानी
हड्डी रोग विभाग के दो डॉक्टरों के तबादले के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अचानक एक डॉक्टर पर लोड अधिक हो गया है। इसकी वजह से प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज बिना इलाज के ही लौट जा रहे हैं। इसके अलावा ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की भी परेशानी बढ़ गई है। प्रतिदिन तीन से चार ऑपरेशन टाले जा रहे हैं।
पांच दिन से बुखार, नहीं मिला इलाज
अलीनगर की रहने वाली आशा अपने बेटी रिया को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंची थी। काउंटर पर पर्चा कटवाया। इस पर टीम ने बाल रोग विशेषज्ञ के कमरे में जाने की सलाह दी। लेकिन, वहां पहुंचने पर पता चला कि बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। मजबूरी में आशा इलाज के लिए महिला अस्पताल के बाल रोग विभाग आईं। यहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
बच्चे को दस्त और उल्टी, नहीं मिले बाल रोग विशेषज्ञ
चिलमापुर की रहने वाली नूरजहां के बेटे सलमान को तीन दिन से उल्टी दस्त की शिकायत थी। तारामंडल स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग लेकर आए, लेकिन डॉक्टर न होने की वजह से उन्हें निजी चिकित्सक के पास जाना पड़ा।
ओपीडी में मरीजों की संख्या घटी
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन दो हजार से लेकर 2200 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इधर, डॉक्टरों के तबादले के बाद ओपीडी में मरीजों की संख्या घट गई है। पिछले तीन दिनों से ओपीडी में मरीजों की संख्या 1700 से 1800 के बीच हो गई है। जबकि, इस मौसम में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती है। क्योंकि, इस मौसम में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, बुखार, मलेरिया जैसी बीमारियां बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक होती हैं।
जिला अस्पताल एसआईसी डॉ. जेएसपी सिंह ने कहा कि डॉक्टरों के तबादले के बाद परेशानी बढ़ी है। आठ डॉक्टरों का तबादला हुआ, इसके बदले केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ अब तक मिले हैं। इसके बाद भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है।