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Gorakhpur News: जर्मनी से आ रहा है उपकरण..अभी कुछ दिन और करिए इंतजार
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गोरखपुर। बीआरडी में एमआरआई मशीन 18 दिन से खराब है। इसका एक उपकरण बदला जाना है, जो जर्मनी से मंगाया जा रहा है। अभी यह उपकरण गोरखपुर नहीं पहुंचा है। वहीं जिला अस्पताल में छत से पानी टपकने की वजह से अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हो गई है। एक्सरे का भी फोटो मोबाइल में ले जाकर डॉक्टर को दिखाना पड़ रहा है। इस कारण जांच के लिए मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर जाना पड़ रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच की मशीन का एक उपकरण करीब 18 दिन पहले खराब हो गई। मरम्मत कराने वाली संस्था ने उपकरणों की खरीद के लिए प्रयास किया। इसके बाद जर्मनी से यह मशीन मुंबई और वहां से लखनऊ मंगाई गई है। अब इसे लखनऊ से गोरखपुर लाना है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन एमआरआई की जांच के लिए 50 से 60 मरीज आते हैं। जांच केंद्र पर मशीन खराब होने की बात कहकर मरीजों काे लौटा दिया जा रहा है। डॉक्टर को दिखाने के लिए मरीजों को बाहर से एमआरआई कराना पड़ रहा है।
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आज नहीं होगी जांच का चिपका दिया नोटिस
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की नई मशीन का चिप जल जाने के कारण उससे जांच नहीं हो पा रही है। पुरानी मशीन दो सप्ताह पहले वह भी छत से पानी टपकने के कारण खराब हो गई। अस्पताल में प्रतिदिन 60 से 70 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आते हैं। कमरे के बाहर तकनीकी खराबी से आज जांच सम्भव नहीं है, की नोटिस लगी है। जबकि जांच दो सप्ताह से ठप पडी है। इसके अलावा जिला अस्पताल के डिजिटल एक्सरे की प्रिटिंग मशीन खराब हो जाने के कारण प्रिंट भी नहीं हो पा रहा है। जांच के बाद मरीज कम्प्यूटर पर दिखाई दे रही रिपोर्ट की फोटो लेकर डॉक्टर के पास जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यहां प्रतिदिन 200 से ज्यादा जांच होती है, मरीजों को रिपोर्ट की ज्यादा जरूरत होने पर उन्हें फोटो लेने के लिए कह दे रहे हैं।
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कोट
- पति को पथरी की समस्या है। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा था। जांच केंद्र पर आने पर पता चला कि मशीन खराब है अब बाहर से जांच कराना पड़ेगा। बाहर जांच के लिए 700 रुपये लगेंगे।
संध्या शुक्ला, कुनराघाट
- एक्स रे कराने आई थी। पता चला है कि प्रिटिंग मशीन खराब हो गई है। लाेग फोटो लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए जा रहे हैं। जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है। वह फोटो भी नहीं ले सकते। डॉक्टर फोटो देखकर आगे क्या इलाज करेंगे इसका भी पता नहीं है।
गायत्री राय, बासंगांव
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वर्जन
एमआरआई मशीन के खराब हुए पार्ट को जर्मनी से मंगाया गया है। उपकरण लखनऊ तक पहुंच गया है। दो दिनों में मशीन को ठीक करा दिया जाएगा। पार्ट मिलने में देर की वजह से मरीजों को दिक्कत आई है।
- डॉ. राम कुमार जायसवाल, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच की मशीन का एक उपकरण करीब 18 दिन पहले खराब हो गई। मरम्मत कराने वाली संस्था ने उपकरणों की खरीद के लिए प्रयास किया। इसके बाद जर्मनी से यह मशीन मुंबई और वहां से लखनऊ मंगाई गई है। अब इसे लखनऊ से गोरखपुर लाना है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन एमआरआई की जांच के लिए 50 से 60 मरीज आते हैं। जांच केंद्र पर मशीन खराब होने की बात कहकर मरीजों काे लौटा दिया जा रहा है। डॉक्टर को दिखाने के लिए मरीजों को बाहर से एमआरआई कराना पड़ रहा है।
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आज नहीं होगी जांच का चिपका दिया नोटिस
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की नई मशीन का चिप जल जाने के कारण उससे जांच नहीं हो पा रही है। पुरानी मशीन दो सप्ताह पहले वह भी छत से पानी टपकने के कारण खराब हो गई। अस्पताल में प्रतिदिन 60 से 70 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आते हैं। कमरे के बाहर तकनीकी खराबी से आज जांच सम्भव नहीं है, की नोटिस लगी है। जबकि जांच दो सप्ताह से ठप पडी है। इसके अलावा जिला अस्पताल के डिजिटल एक्सरे की प्रिटिंग मशीन खराब हो जाने के कारण प्रिंट भी नहीं हो पा रहा है। जांच के बाद मरीज कम्प्यूटर पर दिखाई दे रही रिपोर्ट की फोटो लेकर डॉक्टर के पास जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यहां प्रतिदिन 200 से ज्यादा जांच होती है, मरीजों को रिपोर्ट की ज्यादा जरूरत होने पर उन्हें फोटो लेने के लिए कह दे रहे हैं।
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कोट
- पति को पथरी की समस्या है। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा था। जांच केंद्र पर आने पर पता चला कि मशीन खराब है अब बाहर से जांच कराना पड़ेगा। बाहर जांच के लिए 700 रुपये लगेंगे।
संध्या शुक्ला, कुनराघाट
- एक्स रे कराने आई थी। पता चला है कि प्रिटिंग मशीन खराब हो गई है। लाेग फोटो लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए जा रहे हैं। जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है। वह फोटो भी नहीं ले सकते। डॉक्टर फोटो देखकर आगे क्या इलाज करेंगे इसका भी पता नहीं है।
गायत्री राय, बासंगांव
वर्जन
एमआरआई मशीन के खराब हुए पार्ट को जर्मनी से मंगाया गया है। उपकरण लखनऊ तक पहुंच गया है। दो दिनों में मशीन को ठीक करा दिया जाएगा। पार्ट मिलने में देर की वजह से मरीजों को दिक्कत आई है।
- डॉ. राम कुमार जायसवाल, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज