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उपचुनाव: क्या है परिसीमन, जिसके आने के बाद खत्म हो गया इस विधानसभा क्षेत्र का चुनाव
Thu, 15 Oct 2020 02:17 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 15 Oct 2020 02:17 PM IST
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यूपी उपचुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश विधानसभा की 7 सीटों पर उपचुनाव होने वाला है। इनमें वेस्टर्न यूपी की टूंडला (फिरोजाबाद), बुलंदशहर, नौगांवा सादात (अमरोहा), सेंट्रल यूपी की घाटमपुर (कानपुर नगर), बांगरमऊ (उन्नाव) और ईस्ट यूपी की मल्हनी (जौनपुर) और देवरिया सदर सीट शामिल है।
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बता दें कि देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र का परिसीमन 2009 में हुआ था लेकिन परिसीमन के बाद 2012 में पहला विधानसभा चुनाव कराया गया था। इस चुनाव से पहले ही गौरीबाजार विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व खत्म कर दिया गया।
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इसके बाद दो नए विधानसभा क्षेत्रों (रामपुर कारखाना व पथरदेवा) का गठन किया गया। गौरीबाजार विधानसभा क्षेत्र से ब्राह्मण प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे और जीते भी थे लेकिन देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र के साथ ऐसा नहीं हुआ। अब देवरिया जिले में सात विधानसभा सीटें हैं। इसमें से देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव कराया जा रहा है।
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देवरिया से अब तक रहे विधायक
- एफ चिशिति (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)- 1967-1968
- दीप नारायण मणि (भारतीय क्रांति दल) 1969-1974
- दीप नारायण मणि (भारतीय क्रांति दल) 1974-1977
- कृष्णा राय (जनता पार्टी) 1977-1980
- रुद्र प्रताप सिंह (जनता पार्टी सेक्युलर) 1980-1985
- फजले मसूद (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)- 1985-1989
- राम छबीला मिश्रा (जनता दल) 1989-1991
- रविंद्र प्रताप मल्ल (भाजपा)- 1991-1992
- रविंद्र प्रताप मल्ल (भाजपा) 1992-1995
- सुभाष चंद्र श्रीवास्तव (जनता दल) 1996-2002
- दीनानाथ कुशवाहा (नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी) 2002-2007
- दीनानाथ कुशवाहा (सपा) 2007-2012
- जन्मेजय सिंह (भाजपा) 2012-2017
- जन्मेजय सिंह (भाजपा) 2017-2020
क्या है परिसीमन
परिसीमन आयोग को भारतीय सीमा आयोग भी कहा जाता है। परिसीमन से तात्पर्य किसी भी राज्य की लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं (राजनीतिक) का रेखांकन है। अर्थात इसके माध्यम से लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की हदें तय की जाती हैं।
संविधान के अनुच्छेद 82 के मुताबिक, सरकार हर 10 साल बाद परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है। इसके तहत जनसंख्या के आधार पर विभिन्न विधानसभा व लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण होता है। जनसंख्या के हिसाब से अनुसूचित जाति-जनजाति सीटों की संख्या बदल जाती है।