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Deoria Assembly By Election 2020: वोट बैंक की सेंधमारी के लिए चुनावी जंग में लगाए जासूस, ऐसे कर रहे हैं काम

Thu, 22 Oct 2020 01:15 AM IST
vivek shukla विनोद कुमार तिवारी, देवरिया।
विनोद कुमार तिवारी, देवरिया। Published by: vivek shukla Updated Thu, 22 Oct 2020 01:15 AM IST
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Deoria Assembly By Election 2020 news update
मतपत्र (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

देवरिया में उपचुनाव चौसर सजी हुई है। शह-मात के लिए सभी दांव आजमाएं जा रहे हैं। वोटर को लुभाया जा रहा है। जीत के लिए सभी पार्टिंयां गोटें बिछाने में जुटी हैं। माहौल को अपने-अपने पक्ष में मोड़ने के लिए कोई कसर राजनीतिक दल नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे दौर में वोट बैंक में सेंधमारी और माहौल बनाने के लिए राजनीतिक दल एक-दूसरे की जासूसी के लिए जासूस लगाए हैं। इसके अलावा चौराहों पर जीत का अफवाह फैलाने के लिए भी लोग लगाए गए हैं।

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 देवरिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा से डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी, सपा से ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, बसपा से अभयनाथ त्रिपाठी और कांग्रेस से मुकुंद भाष्कर मणि त्रिपाठी, निर्दल अजय सिंह पिंटू सहित 14 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इनके भाग्य का फैसला तीन लाख 36 हजार 565 मतदाता तीन नवंबर को करेंगे। लाख कोशिशों के बावजूद भी राजनीतिक दल लोगों में चुनावी कौतूहल पैदा नहीं कर पा रहे हैं। चुनावी माहौल में मतदाता खामोश हैं।
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प्रत्याशियों के सामने उनसे संपर्क साधने और उनका रूख भांपने की बड़ी चुनौती है। सभी दलों के सामने एक ही चुनौती है कि कैसे मतदाताओं की चुप्पी तोड़ी जाए। मतदाता सुन तो सबकी रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि करेंगे अपने मन की ही। ऐसे में हर कोई माहौल अपने-अपने पक्ष में बनाने में जुटा है। मुकाबले की तस्वीर भी साफ नहीं है। बागी भी चुनौती पेश कर रहे हैं। इस बार के चुनाव में सभी दलों ने एक-दूसरे के यहां वोट बैंक एवं समर्थकों की जासूसी कराने के लिए भाड़े पर लोगों को तय किया है।
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नाम न छापने की शर्त पर एक जासूस ने बताया कि दल में निष्ठा का कोई महत्व नहीं है। 30 वर्ष में उसे कुछ नहीं हासिल हुआ तो उसने जासूसी की सुपारी एक माध्यम से थाम लिया है। उसके साथ तीन लोगों की टीम लगाई गई है। सबको अलग-अलग दायित्व सौंपा गया है। हर एक को इसके लिए एक निर्धारित धनराशि भी मिलनी है। क्या करना है यह भी बता दिया गया है।

उधर, प्रशासन ने भी सादे कपड़ों में सिपाहियों को सभी दलों के खेमों में लगाया है। सूत्रों की मानें तो उनका काम सिर्फ इतना है कि कौन कहां जा रहा है। कहीं पैसा और शराब तो मतदाताओं में बांटने की तैयारी तो नहीं है। स्व. जन्मेजय सिंह के पुत्र अजय सिंह पिंटू के साथ जासूसों की दो टोली लगाई गई है।

पिंटू के बारे में गोपनीय सूचनाएं हर रोज एकत्र की जा रही हैं। जिसके आधार पर विभीषण की तलाश में भाजपा लगी है। एक जनप्रतिनिधि ने नामांकन के लिए उन्हें आशीर्वाद दिया, इसकी सूचना पार्टी के पास आई है। पिंटू पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन तैयारी में जुटा है।

 

गांव में कौन किसके साथ, ऐसे लोगों की तैयार हो रही सूची

राजनीतिक दल एक-दूसरे के खेमे में विभीषण के माध्यम से सूचनाएं एकत्र कर पहुंचा रहे हैं। किस गांव में कौन-कौन किस पार्टी की तरफ है। इसकी सूचनाएं सभी दल एकत्र कराने में जुट गए हैं। ग्राम प्रधानों, कोटेदारों और प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की कुंडली बनाने में टीमें लग गई हैं।

सूचनाओं के आधार पर उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए जोर दिए जाने का अंदेशा है। राजनीतिक दलों में कोई टिकट नहीं मिलने से नाराज है तो कोई जाति को टिकट नहीं मिला, इसलिए नाराज होकर बैठा है। ऐसे लोगों को मनाने की कोशिश तो हो रही है, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग पा रही है। भाजपा एवं सपा में इसकी अधिकता ज्यादा है। बसपा, कांग्रेस में भी कुछ इस तरह का मामला चल रहा है।

100 अध्यापकों की बनी सूची
प्राथमिक एवं जूनियर और डिग्री कॉलेजों में कार्यरत अध्यापकों एवं कुछ सरकारी कर्मचारियों सहित तकरीबन 100 लोगों की एक सूची गोपनीय तरीके से तैयार की गई। इन पर प्रत्याशियों का प्रचार करने का आरोप है। डीएम अमित किशोर ने कहा है कि कुछ फोटो और वीडियो प्राप्त हुए हैं। उनकी जांच कराई जा रही है। खास तौर पर बीएसए को इसके लिए निर्देशित किया गया है।

 
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