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Gorakhpur News: डेंगू सामान्य वायरल बुखार... इससे मृत्यु दर एक फीसदी से भी कम
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राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर आयोजित विविध गतिविधियाें में डॉक्टरों ने दी जानकारी
एक ही व्यक्ति में डेंगू का दूसरी बार संक्रमण अधिक गंभीर और लंबा हो सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। डेंगू भी एक सामान्य वायरल बुखार है। समय से और सही उपचार होने के चलते राज्य में डेंगू से मृत्यु दर एक फीसदी से भी कम है और यह साल दर साल घटती जा रही है। इस बीमारी से लोगों को डरने से बजाय, इससे बचाव के उपायों को अपनाने की जरूरत है। खासतौर से उन लोगों को डेंगू से और अधिक सतर्क रहना चाहिए जो एक बार इसका संक्रमण झेल चुके हैं, क्योंकि ऐसे लोगों में दूसरी बार संक्रमण अधिक गंभीर और लंबा हो सकता है।
राष्ट्रीय डेंगू दिवस के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कैंपियरगंज सीएचसी में आयोजित ब्लॉक स्तरीय जागरूकता गोष्ठी में ये बातें कहीं। सीएमओ ने कहा कि डेंगू एक मच्छर जनित वायरल रोग है। डेंगू का एक स्ट्रेन दूसरे स्ट्रेन से प्रतिरक्षा प्रदान नहीं करता है। पहले डेंगू सिर्फ बरसात के मौसम में ही होता था, लेकिन अब यह वर्ष के किसी भी माह में सामने आने लगा है, क्योंकि इसके मच्छरों को पनपने के लिए घर में कहीं भी एकत्रित एक चम्मच साफ पानी भी पर्याप्त है।
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पिछले साल सिर्फ 0.10 फीसदी मौत हुई डेंगू से
वर्ष 2017 में राज्य में डेंगू से मृत्यु दर 0.91 फीसदी थी, वहीं वर्ष 2023 में यह घट कर 0.10 फीसदी हो गई है। जिले में भी डेंगू से वर्ष 2019 में एक मौत हुई थी और उसके बाद मृत्यु का कोई केस रिपोर्ट नहीं हुआ है। जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह और सहायक मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे ने भी गोष्ठी में लोगों को बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश और मलेरिया निरीक्षक प्रवीण पांडेय ने सरदारनगर के प्राथमिक विद्यालय कर्महा और पीएचसी खजनी, पिपरौली सीएचसी, बेलघाट, भटहट और जंगल कौड़िया आदि जगहों पर जाकर मलेरिया और फाइलेरिया विभाग के स्वास्थ्यकर्मियों की मौजदूगी में जनजागरूकता से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया।
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बचाव ही है श्रेष्ठ उपाय
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह का कहना है कि योग्य चिकित्सक से जांच और इलाज करवाने पर मरीज घर पर ही ठीक हो जाता है। इलाज में देरी करने और अपने मन से दवाएं खाने से जटिलताएं बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के संक्रमण से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनने चाहिए और अपने घर, कार्यस्थल, दुकान आदि किसी भी जगह पर साफ पानी इकट्ठा न होने दें। कूलर, गमलों, एसी, पशुओं के पात्र, नारियल के खोल आदि की सफाई करते रहें। अगर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, हड्डियों में दर्द, सुस्ती जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं, क्योंकि ऐसे लक्षण डेंगू के भी हो सकते हैं।
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एक ही व्यक्ति में डेंगू का दूसरी बार संक्रमण अधिक गंभीर और लंबा हो सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। डेंगू भी एक सामान्य वायरल बुखार है। समय से और सही उपचार होने के चलते राज्य में डेंगू से मृत्यु दर एक फीसदी से भी कम है और यह साल दर साल घटती जा रही है। इस बीमारी से लोगों को डरने से बजाय, इससे बचाव के उपायों को अपनाने की जरूरत है। खासतौर से उन लोगों को डेंगू से और अधिक सतर्क रहना चाहिए जो एक बार इसका संक्रमण झेल चुके हैं, क्योंकि ऐसे लोगों में दूसरी बार संक्रमण अधिक गंभीर और लंबा हो सकता है।
राष्ट्रीय डेंगू दिवस के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कैंपियरगंज सीएचसी में आयोजित ब्लॉक स्तरीय जागरूकता गोष्ठी में ये बातें कहीं। सीएमओ ने कहा कि डेंगू एक मच्छर जनित वायरल रोग है। डेंगू का एक स्ट्रेन दूसरे स्ट्रेन से प्रतिरक्षा प्रदान नहीं करता है। पहले डेंगू सिर्फ बरसात के मौसम में ही होता था, लेकिन अब यह वर्ष के किसी भी माह में सामने आने लगा है, क्योंकि इसके मच्छरों को पनपने के लिए घर में कहीं भी एकत्रित एक चम्मच साफ पानी भी पर्याप्त है।
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पिछले साल सिर्फ 0.10 फीसदी मौत हुई डेंगू से
वर्ष 2017 में राज्य में डेंगू से मृत्यु दर 0.91 फीसदी थी, वहीं वर्ष 2023 में यह घट कर 0.10 फीसदी हो गई है। जिले में भी डेंगू से वर्ष 2019 में एक मौत हुई थी और उसके बाद मृत्यु का कोई केस रिपोर्ट नहीं हुआ है। जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह और सहायक मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे ने भी गोष्ठी में लोगों को बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश और मलेरिया निरीक्षक प्रवीण पांडेय ने सरदारनगर के प्राथमिक विद्यालय कर्महा और पीएचसी खजनी, पिपरौली सीएचसी, बेलघाट, भटहट और जंगल कौड़िया आदि जगहों पर जाकर मलेरिया और फाइलेरिया विभाग के स्वास्थ्यकर्मियों की मौजदूगी में जनजागरूकता से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया।
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बचाव ही है श्रेष्ठ उपाय
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह का कहना है कि योग्य चिकित्सक से जांच और इलाज करवाने पर मरीज घर पर ही ठीक हो जाता है। इलाज में देरी करने और अपने मन से दवाएं खाने से जटिलताएं बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के संक्रमण से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनने चाहिए और अपने घर, कार्यस्थल, दुकान आदि किसी भी जगह पर साफ पानी इकट्ठा न होने दें। कूलर, गमलों, एसी, पशुओं के पात्र, नारियल के खोल आदि की सफाई करते रहें। अगर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, हड्डियों में दर्द, सुस्ती जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं, क्योंकि ऐसे लक्षण डेंगू के भी हो सकते हैं।