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Gorakhpur News: नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से हो रही लंपी की वैक्सीन की मांग
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गोरखपुर। अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार की खोज लंपी प्रोवैक आईएनडी वैक्सीन की मांग दूसरे देशों से भी होने लगी है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश ने अपने देश के गोवंशों को लंपी से बचाने के लिए वैक्सीन की मांग की है। इसके अलावा यूपी समेत देश के 11 राज्यों के तीन लाख से अधिक पशुओं पर इसका परीक्षण पूरा हो चुका है।
भारत में लंपी का पहला केस वर्ष 2019 में सामने आया था। वैक्सीन का फार्मूला खोजने वाले अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि पिछले साल इस वैक्सीन को लांच किया गया था। यह वैक्सीन हरियाणा, दिल्ली, यूपी, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम, मणिपुर, अंडमान-निकोबार, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तराखंड में तीन लाख से अधिक गोवंशों को लगाई जा चुकी है।
बताया कि कुछ दिन पहले हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी इस पर चर्चा हुई थी। अब बांग्लादेश, भूटान और नेपाल की तरफ से इस वैक्सीन के लिए मांग होने लगी है। भारत सरकार की तरफ से अनुमति मिलने के बाद वैक्सीन वहां भेजी जाएगी।
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कोट--
लंपी वैक्सीन की मांग विदेशों से भी हो रही है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद विदेशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी। वैक्सीन निर्माण के लिए बाॅयोवैट समेत कई कंपनियों ने अनुबंध किया है। अभी निर्माता कंपनियों को बाजार में वैक्सीन बेचने की अनुमति नहीं मिली है।
-डॉ. नवीन कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार
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भारत में लंपी का पहला केस वर्ष 2019 में सामने आया था। वैक्सीन का फार्मूला खोजने वाले अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि पिछले साल इस वैक्सीन को लांच किया गया था। यह वैक्सीन हरियाणा, दिल्ली, यूपी, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम, मणिपुर, अंडमान-निकोबार, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तराखंड में तीन लाख से अधिक गोवंशों को लगाई जा चुकी है।
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बताया कि कुछ दिन पहले हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी इस पर चर्चा हुई थी। अब बांग्लादेश, भूटान और नेपाल की तरफ से इस वैक्सीन के लिए मांग होने लगी है। भारत सरकार की तरफ से अनुमति मिलने के बाद वैक्सीन वहां भेजी जाएगी।
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कोट
लंपी वैक्सीन की मांग विदेशों से भी हो रही है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद विदेशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी। वैक्सीन निर्माण के लिए बाॅयोवैट समेत कई कंपनियों ने अनुबंध किया है। अभी निर्माता कंपनियों को बाजार में वैक्सीन बेचने की अनुमति नहीं मिली है।
-डॉ. नवीन कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार