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Gorakhpur News: महिलाओं की उपलब्धियों पर मनाया जाना चाहिए उत्सव
Sun, 05 Jul 2026 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 05 Jul 2026 02:00 AM IST
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि आज महिलाएं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रही हैं। उनकी उपलब्धियों पर उत्सव मनाया जाना चाहिए।
वह एमएमएमयूटी में आईईईई डब्ल्यूआईर्ई डे पर शनिवार को आयोजित विशेष कार्यक्रम एवं पैनल चर्चा के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे प्रौद्योगिकी का उपयोग समाज के व्यापक हित एवं मानव कल्याण के लिए करें।
पैनल चर्चा में स्टेलेनबोश विश्वविद्यालय, दक्षिण अफ्रीका की प्रो. एनी चिम्पांगो ने तकनीकी नवाचार और नैतिक उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। टीआईईटी, पटियाला की प्रो. शालिनी बत्रा ने सफल तकनीकी नेतृत्व के आवश्यक गुणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असफलताओं से सीखकर निरंतर आगे बढ़ना ही प्रभावी नेतृत्व की वास्तविक पहचान है। आईआईटी रुड़की की प्रो. प्रेमलता जीना ने सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार साझा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में तकनीक स्वयं भी स्थिरता की दिशा में अग्रसर है। प्रौद्योगिकी और सतत विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।
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कार्यक्रम में विद्युत अभियंत्रण विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रभाकर तिवारी ने सभी अतिथि विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तीकरण एवं उनके व्यावसायिक विकास में आईईईई की भूमिका पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. शिखा सिंह व आभार ज्ञापन डॉ. ज्योति शर्मा ने किया।
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वह एमएमएमयूटी में आईईईई डब्ल्यूआईर्ई डे पर शनिवार को आयोजित विशेष कार्यक्रम एवं पैनल चर्चा के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे प्रौद्योगिकी का उपयोग समाज के व्यापक हित एवं मानव कल्याण के लिए करें।
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पैनल चर्चा में स्टेलेनबोश विश्वविद्यालय, दक्षिण अफ्रीका की प्रो. एनी चिम्पांगो ने तकनीकी नवाचार और नैतिक उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। टीआईईटी, पटियाला की प्रो. शालिनी बत्रा ने सफल तकनीकी नेतृत्व के आवश्यक गुणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असफलताओं से सीखकर निरंतर आगे बढ़ना ही प्रभावी नेतृत्व की वास्तविक पहचान है। आईआईटी रुड़की की प्रो. प्रेमलता जीना ने सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार साझा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में तकनीक स्वयं भी स्थिरता की दिशा में अग्रसर है। प्रौद्योगिकी और सतत विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।
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कार्यक्रम में विद्युत अभियंत्रण विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रभाकर तिवारी ने सभी अतिथि विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तीकरण एवं उनके व्यावसायिक विकास में आईईईई की भूमिका पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. शिखा सिंह व आभार ज्ञापन डॉ. ज्योति शर्मा ने किया।