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आजादी के बाद से यहां बालिकाओं के लिए नहीं बन सका डिग्री कॉलेज, बाहर जाने को मजबूर हैं छात्राएं
Sun, 29 Nov 2020 04:12 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, बढ़नी (सिद्धार्थनगर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, बढ़नी (सिद्धार्थनगर)।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 29 Nov 2020 04:12 PM IST
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फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के आकांक्षी जिलों में शामिल महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली सिद्धार्थनगर स्थित बढ़नी कस्बा बालिका शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ रहा है। कारण कस्बे में बालिकाओं की उच्च शिक्षा के लिए कोई शिक्षण संस्थान नहीं है। इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं को स्नातक शिक्षा लेने के लिए दूसरे जिले या जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।
कई मेधावी छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण इतनी दूर शिक्षा ग्रहण करने में असमर्थ होती हैं, नतीजतन उन्हें मजबूर होकर पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है। इधर, दिन प्रतिदिन बढ़ रही आपराधिक घटनाएं अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बनी हैं। बढ़नी कस्बे के संभ्रांत नागरिक इलाके में एक डिग्री कॉलेज खोले जाने को जरूरी मानते हैं।
समाजसेवी सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि 73 वर्ष पूर्व सन 1947 में बढ़नी कस्बे में गांधी आदर्श विद्यालय की स्थापना हुई थी। इसमें बालक तथा बालिकाएं शिक्षा ग्रहण करते चले आ रहे हैं। इंटरमीडिएट शिक्षा के बाद में किसी भी प्रकार की टेक्निकल अथवा उच्च शिक्षा की व्यवस्था क्षेत्र में देश आजाद होने के बाद में नहीं हो पाई।
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कई मेधावी छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण इतनी दूर शिक्षा ग्रहण करने में असमर्थ होती हैं, नतीजतन उन्हें मजबूर होकर पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है। इधर, दिन प्रतिदिन बढ़ रही आपराधिक घटनाएं अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बनी हैं। बढ़नी कस्बे के संभ्रांत नागरिक इलाके में एक डिग्री कॉलेज खोले जाने को जरूरी मानते हैं।
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समाजसेवी सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि 73 वर्ष पूर्व सन 1947 में बढ़नी कस्बे में गांधी आदर्श विद्यालय की स्थापना हुई थी। इसमें बालक तथा बालिकाएं शिक्षा ग्रहण करते चले आ रहे हैं। इंटरमीडिएट शिक्षा के बाद में किसी भी प्रकार की टेक्निकल अथवा उच्च शिक्षा की व्यवस्था क्षेत्र में देश आजाद होने के बाद में नहीं हो पाई।
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कारोबारी अशफाक अहमद ने बताया कि चुनाव के समय में बड़े-बड़े नेता लोग यहां से लड़ने के लिए आते हैं शिक्षा की समस्या पर बातचीत करने पर वादे करके चले जाते हैं लेकिन आज तक किसी भी तरीके की उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं हो पाई।
संतराम अग्रहरी ने बताया कि किसी प्रकार से इंटर तक शिक्षा को- एजुकेशन के तहत हो जाती है लेकिन आगे की पढ़ाई करने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए अन्य क्षेत्रों में जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करना मुश्किल होता है।
समाजसेवी मनोज गोयल ने बताया कि कस्बे के आसपास बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षण संस्थान ना होने से अभिभावकों को शिक्षा दिलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साधन संपन्न लोग अपने बच्चियों को किसी प्रकार से उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेज देते हैं लेकिन गरीब तबके के लोग इंटरमीडिएट तक पढ़ाकर आगे की शिक्षा बंद कर देते हैं।
संतराम अग्रहरी ने बताया कि किसी प्रकार से इंटर तक शिक्षा को- एजुकेशन के तहत हो जाती है लेकिन आगे की पढ़ाई करने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए अन्य क्षेत्रों में जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करना मुश्किल होता है।
समाजसेवी मनोज गोयल ने बताया कि कस्बे के आसपास बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षण संस्थान ना होने से अभिभावकों को शिक्षा दिलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साधन संपन्न लोग अपने बच्चियों को किसी प्रकार से उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेज देते हैं लेकिन गरीब तबके के लोग इंटरमीडिएट तक पढ़ाकर आगे की शिक्षा बंद कर देते हैं।