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डीडीयू : विद्यार्थियों को अब महंगी किताबों को खरीदने की जरूरत नहीं
Tue, 16 Jan 2024 03:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 16 Jan 2024 03:17 AM IST
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के हाथ में अब पांच हजार ई-बुक्स और आठ हजार लाइब्रेरी
डेलनेट के साथ करार से हुआ संभव, आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी पुस्तकें
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। इंटरनेट के इस दुनिया में
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को अब महंगी किताबों को खरीदने की जरूरत नहीं है। अब उनके हाथ में पांच हजार से ज्यादा ई-बुक्स और देश के आठ हजार से ज्यादा संस्थानों की लाइब्रेरी मौजूद है। इन संस्थानों की लाइब्रेरी से वे महंगी या विशेष किताबों को मंगवाकर पढ़ सकते हैं। यह विश्वविद्यालय और डेवलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क (डेलनेट) के बीच करार से संभव हो सका है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने लाइब्रेरी की वेबसाइट को एक नया स्वरूप दिया है। यहां पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय की महत्वपूर्ण वेबसाइट और उनके लिए महत्वपूर्ण पठन सामग्री उपलब्ध है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी ने जिस भी संस्थान से करार किया है उसका लाभ विद्यार्थी यहां से ले सकते हैं। विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में चार लाख से भी ज्यादा किताबें हैं। इसके अलावा पांच हजार से ज्यादा ई-बुक्स छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ने को मिल जाएंगी।
डेलनेट से करार
हाल ही में विश्वविद्यालय ने डेवलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क (डेलनेट) से करार किया था। डेलनेट से देश के 8100 से ज्यादा संस्थानों की लाइब्रेरी जुड़ी हुई है। इसका लाभ गोरखपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक उठा सकते हैं। कई बार ऐसा होता है कि विद्यार्थी या शोधार्थी को अपनी पढ़ाई के लिए ऐसी पुस्तक की जरूरत होती है जिसे खरीदने में वे असमर्थ है या कहीं भी उपलब्ध नहीं है। डेलनेट के जरिए उन्हें यह किताबें आसानी से मिल जाएंगी।
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ऐसे मिलेंगी किताब
डेलनेट से पुस्तक मंगवाने के लिए सबसे पहले विश्वविद्यालय की आईपी से अपने फोन या लैपटाॅप को जोड़ना होगा। लाइब्रेरी की वेबसाइट पर लाइब्रेरी नेटवर्क पर डेलनेट की वेबसाइट का लिंक मिलेगा। डेलनेट से जुड़े संस्थानों की लाइब्रेरी में अपनी जरूरत की किताब या शोध सामग्री को सर्च कर सकेंगे। किताब दिखने पर पत्र लिखकर अपने विभागाध्यक्ष या शोध गाइड से फारवर्ड करवाकर लाइब्रेरियन को देंगे। लाइब्रेरियन इसे डेलनेट के मुख्यालय दिल्ली भेजेंगे। वहां से फिर संबंधित लाइब्रेरी से इंटर लाइब्रेरी लोन के तहत इस किताब को मंगवाकर विश्वविद्यालय में भेजा जाएगा। जहां 15 दिनों तक विद्यार्थी इसे पढ़ सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थी को कोरियर का शुल्क देना होगा। फिलहाल मोबाइल डाटा से यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके लिए उन्हें विश्वविद्यालय के वाईफाई को कनेक्ट करना पड़ेगा।
इंस्टीट्यूट ऑफ इम्युनोलॉजी से आई किताब
लाइब्रेरियन डॉ. बिभाष कुमार मिश्र ने बताया कि हाल ही में गणित विभाग के एक शिक्षक ने डेलनेट के जरिए एक किताब को मंगवाया था। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्युनोलाॅजी, दिल्ली से इंटर लाइब्रेरी लोन के तहत एक किताब मंगवाई थी। 15 दिनों तक अध्ययन करने के बाद उन्होंने इसे लौटा दिया। सुविधा का लाभ अन्य विद्यार्थी और शोधार्थी भी ले सकते हैं।
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डेलनेट के साथ करार से हुआ संभव, आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी पुस्तकें
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। इंटरनेट के इस दुनिया में
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को अब महंगी किताबों को खरीदने की जरूरत नहीं है। अब उनके हाथ में पांच हजार से ज्यादा ई-बुक्स और देश के आठ हजार से ज्यादा संस्थानों की लाइब्रेरी मौजूद है। इन संस्थानों की लाइब्रेरी से वे महंगी या विशेष किताबों को मंगवाकर पढ़ सकते हैं। यह विश्वविद्यालय और डेवलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क (डेलनेट) के बीच करार से संभव हो सका है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने लाइब्रेरी की वेबसाइट को एक नया स्वरूप दिया है। यहां पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय की महत्वपूर्ण वेबसाइट और उनके लिए महत्वपूर्ण पठन सामग्री उपलब्ध है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी ने जिस भी संस्थान से करार किया है उसका लाभ विद्यार्थी यहां से ले सकते हैं। विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में चार लाख से भी ज्यादा किताबें हैं। इसके अलावा पांच हजार से ज्यादा ई-बुक्स छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ने को मिल जाएंगी।
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डेलनेट से करार
हाल ही में विश्वविद्यालय ने डेवलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क (डेलनेट) से करार किया था। डेलनेट से देश के 8100 से ज्यादा संस्थानों की लाइब्रेरी जुड़ी हुई है। इसका लाभ गोरखपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक उठा सकते हैं। कई बार ऐसा होता है कि विद्यार्थी या शोधार्थी को अपनी पढ़ाई के लिए ऐसी पुस्तक की जरूरत होती है जिसे खरीदने में वे असमर्थ है या कहीं भी उपलब्ध नहीं है। डेलनेट के जरिए उन्हें यह किताबें आसानी से मिल जाएंगी।
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ऐसे मिलेंगी किताब
डेलनेट से पुस्तक मंगवाने के लिए सबसे पहले विश्वविद्यालय की आईपी से अपने फोन या लैपटाॅप को जोड़ना होगा। लाइब्रेरी की वेबसाइट पर लाइब्रेरी नेटवर्क पर डेलनेट की वेबसाइट का लिंक मिलेगा। डेलनेट से जुड़े संस्थानों की लाइब्रेरी में अपनी जरूरत की किताब या शोध सामग्री को सर्च कर सकेंगे। किताब दिखने पर पत्र लिखकर अपने विभागाध्यक्ष या शोध गाइड से फारवर्ड करवाकर लाइब्रेरियन को देंगे। लाइब्रेरियन इसे डेलनेट के मुख्यालय दिल्ली भेजेंगे। वहां से फिर संबंधित लाइब्रेरी से इंटर लाइब्रेरी लोन के तहत इस किताब को मंगवाकर विश्वविद्यालय में भेजा जाएगा। जहां 15 दिनों तक विद्यार्थी इसे पढ़ सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थी को कोरियर का शुल्क देना होगा। फिलहाल मोबाइल डाटा से यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके लिए उन्हें विश्वविद्यालय के वाईफाई को कनेक्ट करना पड़ेगा।
इंस्टीट्यूट ऑफ इम्युनोलॉजी से आई किताब
लाइब्रेरियन डॉ. बिभाष कुमार मिश्र ने बताया कि हाल ही में गणित विभाग के एक शिक्षक ने डेलनेट के जरिए एक किताब को मंगवाया था। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्युनोलाॅजी, दिल्ली से इंटर लाइब्रेरी लोन के तहत एक किताब मंगवाई थी। 15 दिनों तक अध्ययन करने के बाद उन्होंने इसे लौटा दिया। सुविधा का लाभ अन्य विद्यार्थी और शोधार्थी भी ले सकते हैं।

अयोध्या रवाना होते विहिप व बजरंग दल के पदाधिकारी। स्वयं

अयोध्या रवाना होते विहिप व बजरंग दल के पदाधिकारी। स्वयं

अयोध्या रवाना होते विहिप व बजरंग दल के पदाधिकारी। स्वयं

अयोध्या रवाना होते विहिप व बजरंग दल के पदाधिकारी। स्वयं