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गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मनोज का कोरोना से निधन, सीएम योगी ने शोक जताया
Sat, 07 Nov 2020 08:47 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 07 Nov 2020 08:47 PM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला व संगीत विभाग के पूर्व अध्यक्ष और शहर के मशहूर कला चित्रकार प्रो. मनोज कुमार सिंह (66) का शुक्रवार की देर रात कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। वह गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थे। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक जताया है।
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मुख्यमंत्री ने ट्विटर के जरिए शोक संदेश में कहा है कि प्रो. मनोज का चित्रकला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में भी उन्होंने ख्याति अर्जित की थी। वह मृदुभाषित और मिलनसार व्यक्ति थे। कला जगत में उनकी भरपाई होना कठिन है।
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उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। वहीं, उनके निधन की जानकारी होने के बाद विश्वविद्यालय के ललित कला व संगीत विभाग में शोकसभा का आयोजन किया गया।
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विभागाध्यक्ष प्रो. उषा सिंह और विभाग के विद्यार्थियों ने प्रो. मनोज के व्यक्तित्व व कृतित्व को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। शोकसभा में विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सत्येंद्र सिंह भी मौजूद रहे। प्रो. मनोज अपने पीछे पत्नी रीता मनोज, दो बेटियों और एक बेटे से भरापुरा परिवार छोड़ गए हैं।
शहर से लेकर रेलवे स्टेशन और विवि को संवारने में विशेष योगदान
प्रदेश सरकार के कला भूषण सम्मान सहित दर्जनों पुरस्कारों से सम्मानित प्रो. मनोज कुमार सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीएफए और एमएफए करने के बाद पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य के देखरेख में पीएचडी की। 1980 में वह गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला व संगीत विभाग में शिक्षक हो गए। 2003 से लेकर 2014 तक उन्होंने विभाग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई।
उन्होंने समूचे पूर्वांचल में चित्रकारों की नई फौज की। शहर को सजाने-संवारने में भी महत्वपूर्ण योगदान था। रेलवे स्टेशन पर उनके निर्देशन में बनी मधुबनी पेंटिंग हर यात्री का ध्यान आकर्षित करती है। विश्वविद्यालय गेट और कुलपति कार्यालय पर बना म्युरल और परिसर के बीचोबीच बना स्कल्पचर प्रो. मनोज की ही देन है।
उन्होंने समूचे पूर्वांचल में चित्रकारों की नई फौज की। शहर को सजाने-संवारने में भी महत्वपूर्ण योगदान था। रेलवे स्टेशन पर उनके निर्देशन में बनी मधुबनी पेंटिंग हर यात्री का ध्यान आकर्षित करती है। विश्वविद्यालय गेट और कुलपति कार्यालय पर बना म्युरल और परिसर के बीचोबीच बना स्कल्पचर प्रो. मनोज की ही देन है।