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डीडीयू: जनवरी के मध्य में होगी बीएड और बीटेक की परीक्षा
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खामियों को ठीक करने वाले महाविद्यालय बने परीक्षा केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीटेक और बीएड का कोर्स न पूरा होने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब यह परीक्षा जनवरी माह के मध्य में कराने का निर्णय लिया है।
उधर, विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं 18 जनवरी से प्रस्तावित हैं। पहले ये परीक्षाएं 15 दिसंबर से शुरू होने वाली थीं, बाद में कुछ छात्रों ने कुलपति से मिलकर इसमें परिवर्तन की मांग की। इसके बाद इसे तीन दिनों के लिए टाल दिया गया।
उधर, कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि परीक्षा केंद्र निर्धारण में पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाया गया। विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय दस टीमों ने महाविद्यालयों का भौतिक निरीक्षण किया। इनकी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी। इसके आधार पर करीब 35 महाविद्यालयों को नोटिस दिया गया। नोटिस के बाद खामियों को दूर करने वाले कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया।
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परीक्षा केंद्र के निर्धारण में छात्राओं की सुविधा का ध्यान रखा गया है। बिहार की सीमा पर स्थित एक महाविद्यालय में केवल 50 विद्यार्थियों के पंजीकृत होने के बाद भी उसे परीक्षा केंद्र बनाया गया, जबकि मानक में परीक्षा केंद्र बनने के लिए कम से कम 150 की संख्या होनी चाहिए। इस महाविद्यालय के 25 किमी. के एरिया में कोई कॉलेज न होने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे केंद्र बनाने का फैसला लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीटेक और बीएड का कोर्स न पूरा होने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब यह परीक्षा जनवरी माह के मध्य में कराने का निर्णय लिया है।
उधर, विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं 18 जनवरी से प्रस्तावित हैं। पहले ये परीक्षाएं 15 दिसंबर से शुरू होने वाली थीं, बाद में कुछ छात्रों ने कुलपति से मिलकर इसमें परिवर्तन की मांग की। इसके बाद इसे तीन दिनों के लिए टाल दिया गया।
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उधर, कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि परीक्षा केंद्र निर्धारण में पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाया गया। विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय दस टीमों ने महाविद्यालयों का भौतिक निरीक्षण किया। इनकी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी। इसके आधार पर करीब 35 महाविद्यालयों को नोटिस दिया गया। नोटिस के बाद खामियों को दूर करने वाले कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया।
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परीक्षा केंद्र के निर्धारण में छात्राओं की सुविधा का ध्यान रखा गया है। बिहार की सीमा पर स्थित एक महाविद्यालय में केवल 50 विद्यार्थियों के पंजीकृत होने के बाद भी उसे परीक्षा केंद्र बनाया गया, जबकि मानक में परीक्षा केंद्र बनने के लिए कम से कम 150 की संख्या होनी चाहिए। इस महाविद्यालय के 25 किमी. के एरिया में कोई कॉलेज न होने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे केंद्र बनाने का फैसला लिया।