पढ़ाई के लिए रोजाना 60 KM तय किया सफर: पिता बेचते हैं ठेले पर मिठाई, बेटी ने नौ गोल्ड मेडल पाकर धाक जमाई
रचना का सपना आईएएस बनना है। मूलत: देवरिया शहर के गरूढ़पार, न्यू कॉलोनी के रहने वाले राज कुमार गुप्ता की दो बेटियां व एक बेटे में रचना सबसे छोटी हैं।
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मन में अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बाधाएं आपके कदम नहीं रोक सकतीं। कदम मंजिल तक पहुंच ही जाते हैं। इसे साबित करके दिखाया है देवरिया की बेटी रचना गुप्ता ने, जिनके पिता ठेले पर मिठाई बेचते हैं। गरीबी के बीच पली-बढ़ीं रचना को कदम-कदम पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
रोजाना 60 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करके गोरखपुर विश्वविद्यालय पढ़ने आती रहीं। लेकिन, कठिन हालात के आगे हारने के बजाय डटकर उनसे जूझीं और कड़ी मेहनत करके दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक नौ गोल्ड मेडल हासिल किए। अपने पिता और देवरिया का मान बढ़ाने के साथ एक नजीर भी पेश की।
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रचना का सपना आईएएस बनना है। मूलत: देवरिया शहर के गरूढ़पार, न्यू कॉलोनी के रहने वाले राज कुमार गुप्ता की दो बेटियां व एक बेटे में रचना सबसे छोटी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रचना ने देवरिया स्थित मॉडर्न सिटी मांटेसरी स्कूल से 12 वीं तक की तालीम हासिल करने के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीएससी गणित में 68 फीसदी और एमएससी गणित में 93.05 फीसदी अंक प्राप्त किया है।
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रचना की इस उपलब्धि पर दो विश्वविद्यालय गोल्ड मेडल और सात स्मृति गोल्ड मेडल दिए गए हैं। रचना अब सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं। इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है।