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गोरखपुर में बाढ़ का खतरा सिर पर: नेपाल में बारिश थमने से कुछ राहत, नदियों में कटान की आफत

Tue, 04 Jul 2023 02:35 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 04 Jul 2023 02:35 PM IST
सार

सिंचाई विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि वर्ष 2022 में राप्ती का पानी नवंबर माह में 76.11 मीटर पहुंचा था। वर्ष 2021 में 77.29 मीटर तक इसे दर्ज किया गया था। इसको देखते हुए इस साल भी प्रशासनिक तैयारी शुरू हाे गई है।

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danger of flood in Gorakhpur Rapti just a few steps away from danger mark
गोरखपुर राप्ती नदी उफनाई। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

नेपाल में दो दिन से हो रही भारी बारिश रविवार को थम गई तो जिले में नदियां स्थिर हो गईं। अंदेशा जताया जा रहा था कि अगर नेपाल में इसी तरह से जबरदस्त बारिश होती रही तो राप्ती और रोहिन समेत सभी नदियों का जलस्तर बढ़ जाएगा। इससे जल्द ही बाढ़ आने की आशंका थी, लेकिन नेपाल में बारिश के हल्की पड़ने से राहत मिली है। मगर खतरा बहुत दूर नहीं है। राप्ती नदी का बर्डघाट में खतरे का निशान 74.98 मीटर निर्धारित है और सोमवार शाम चार बजे यहां पर नदी का बहाव 72.50 मीटर रहा। उधर, अब एक नई समस्या सामने है। जलस्तर स्थिर होने के बाद भी बहाव तेज है। इससे नदियों में कटान का खतरा है।

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सोमवार की रात आठ बजे श्रावस्ती के राप्ती ब्रिज पर नदी स्थिर रही। जानकारों का कहना है कि दो दिन पूर्व जिस तरह नदी का जलस्तर बढ़ रहा था, अगर वैसा ही रहता तो चार दिन में बाढ़ के हालात पैदा हाे जाते। जिला प्रशासन से जुड़े लोगों ने बताया कि नेपाल सहित अन्य जगहों पर बारिश कम होने से सोमवार को नदी बढ़ाव कम रहा। लेकिन नदी की धारा काफी तेज है, इससे किनारों पर कटान तेजी से हो रही है।

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नेपाल में बारिश से राप्ती नदी का पानी से तेजी से बढ़ा। शनिवार की शाम चार बजे से रविवार की शाम चार बजे तक राप्ती नदी 2.28 मीटर बढ़ गई। नदी का यह रूप देखकर प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। राप्ती के अलावा अन्य नदियों में चढ़ाव पाया गया। लेकिन सोमवार को रोहिन, राप्ती, घाघरा, कुआनो, बूढ़ी राप्ती, कुन्हरा और गोर्रा सहित अन्य नदियाें के चढ़ाव की गति बेहद धीमी रही। जानकारों का कहना है कि रविवार को नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में कम बारिश होने से नदियां धीमी पड़ी हैं।
 

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बाढ़ आए या ना आए, शुरू हो गई तैयारी

सिंचाई विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि वर्ष 2022 में राप्ती का पानी नवंबर माह में 76.11 मीटर पहुंचा था। वर्ष 2021 में 77.29 मीटर तक इसे दर्ज किया गया था। इसको देखते हुए इस साल भी प्रशासनिक तैयारी शुरू हाे गई है। बाढ़ बचाव समितियों को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही कई जगहों पर बंधों को मरम्मत कार्य भी चल रहा है। रेनकट और रैटहोल भरे जा रहे हैं।

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सोमवार की सुबह आठ बजे और शाम चार बजे नदी का जलस्तर
 

नदी स्थान खतरे का निशान सुबह आठ बजे शाम चार बजे
घाघरा अयोध्या पुल 92.73  90.95 91.14
घाघरा तुर्तीपार 64.01 61.35  61.67
कुआनो मुखलिसपुर 78.65    75.62    75.68
राप्ती बांसी 84.90  81.23   00
राप्ती बर्डघाट 74.98 72.49 72.50
रोहिन त्रिमुहानी 82.44 79.28 79.00


नोट: जलस्तर मीटर में है।


 

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तीन साल में नदियों का अधिकतम जलस्तर

स्थान नदी का नाम खतरे का बिंदु वर्ष 2017 वर्ष 2020 वर्ष 2021 वर्ष 2022
अयोध्या घाघरा 92.73 93.22 93.51 93.30 93.93
तुर्तीपार घाघरा 64.01 65.01 65.27 65.08 65.68
बर्डघाट राप्ती 74.98  77.23 76.07 77.29 76.11
त्रिमुहानी रोहिन 82.44 85.45 84.53 84.97 83.59

सिंचाई विभाग अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने कहा कि बंधों की सुरक्षा के लिए हम लोग सजगता बरत रहे हैं। कटान स्थलों की विशेष निगरानी की जाएगी। नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं। लेकिन पानी धीरे धीरे बढ़ रहा है। सोमवार को नदी का बढ़ाव बेहद ही कम रहा। दो दिन पूर्व जिस तरह से पानी चढ़ा था, उस तरह से नदी की रफ्तार रहती तो जल्द ही बाढ़ आ जाती।



 

राप्ती नदी के तटबंधों पर डरा रहे रेनकट

बड़हलगंज ब्लाॅक क्षेत्र के कछार और दियारा में बसे 100 गांव के लोग हर साल की तरह इस बार भी प्राकृतिक आपदा का कहर झेलने के लिए मजबूर हो सकते हैं। इलाके में राप्ती और सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। हालांकि अभी खतरे जैसी स्थिति नहीं है फिर भी राप्ती नदी पर बने कोठा-नवलपुर तटबंध पर रेनकट बनने से बाढ़ की चिंता क्षेत्र के ग्रामीणों को सताने लगी है। लगातार बारिश से तटबंध जगह-जगह धंस गए हैं।

इलाके में हर साल बाढ़ आते ही लाखों हेक्टेयर पानी एक दिन में राप्ती नदी के आसपास बसे ददरी, कंसासुर, खुटभार, सेमरा, नवलपुर, मुहलजलकल, खैरवा, बैरिया खास, आछीडीह, बेलवा दाख़िली, मिश्रौली, कोइलीखाल, पंडितपुर सहित पूरे कछार क्षेत्र को टापू बना देता है। वर्षों की बाढ़ जगदीशपुर, कोलखास, गोनघट गांव का नामोनिशान मिटा चुकी है।

जानकारी के अनुसार, राप्ती नदी का कोठा-नवलपुर तटबंध जहां कच्चा है, वहां जगह-जगह रेनकट, रैटहोल और साही की मांद हर साल लोगों के लिए मुसीबत बनते हैं। यह तटबंध बाढ़ सुरक्षा के साथ ही सैकड़ों गांव का मुख्य मार्ग भी है। इसके बावजूद इतनी बड़ी समस्या के प्रति विभाग संवेदनशील नहीं है। बाढ़ खंड दो सिंचाई विभाग हर साल बांध की मरम्मत के नाम पर कुछ मिट्टी डालकर खानापूरी कर लेता है।



 

ग्रामीण बोले, जल्द होनी चाहिए मरम्मत

क्षेत्र के मनोज शाही, प्रशांत सिंह, अशोक तिवारी, अखिलेश शाही, दिनेश यादव, रामानंद यादव, सनेही साहनी, गरीब साहनी, मनीराम साहनी, रामजी यादव, भीष्म यादव ने कहा कि नदी रौद्र रूप धारण करेगी तो ऐसी दशा में तटबंध को बचाना नामुमकिन होगा। धंसे तटबंध की जल्द से जल्द मरम्मत होनी चाहिए।

सिचाई विभाग बाढ़ खंड दो अधिशासी अभियंता आरके खरे ने कहा कि राप्ती और सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। बारिश की बजह से रेनकट हुए हैं। मौसम साफ होते मरम्मत करा दी जाएगी। जहां तक बंधे पर खड़ंजे की बात है तो जिन-जिन ग्राम पंचायत के तहत बंधे कच्चे हैं वे खड़ंजा कराएं, विभाग से एनओसी दे दी जाएगी।
 
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