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रील का जाल, बुजुर्गों पर दोहरी मार: साइबर ठगों ने लूट ली जिंदगीभर की कमाई, अब डिप्रेशन का इलाज करा रहे बुजुर्ग
Sun, 31 May 2026 11:09 AM IST
Rohit Singh
निखिल तिवारी, गोरखपुर
निखिल तिवारी, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Sun, 31 May 2026 11:09 AM IST
सार
70 वर्षीय बैंक से रिटायर्ड बुजुर्ग साइबर ठगी में 80 लाख रुपये गंवा बैठे। घटना के बाद उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। काउंसिलिंग में पता चला कि वे रिटायर होने के बाद सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थे। निवेश में अच्छे रिटर्न के चक्कर में उन्होंने अपनी सारी पूंजी लगा दी थी।
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साइबर अपराध (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फ्री-पिक
विस्तार
सेवानिवृत्त होने के बाद अकेलापन काटने के लिए रील का शौक पाले वरिष्ठ नागरिक साइबर ठगों के निशाने पर हैं। दोगुने रिटर्न का लालच देकर साइबर अपराधी बुजुर्गों की जीवनभर की जमा-पूंजी हड़प ले रहे हैं। अपनी मेहनत की कमाई ठगों के हाथों गंवा देने वाले बुजुर्गों में अवसाद, अनिद्रा और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
इससे छुटकारा पाने के लिए बुजुर्ग मनोवैज्ञानिकों के पास पहुंच रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों और मानसिक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर निवेश और शेयर बाजार से जुड़ीं रील बुजुर्गों को तेजी से प्रभावित कर रही हैं। बुजुर्गों में मोबाइल फोन की लत तेजी से बढ़ी है।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही बताते हैं कि ओपीडी में रोजाना 40 से 50 मामले अवसाद के आते हैं। इनमें बुजुर्ग मरीजों का प्रतिशत 10 से 20 फीसदी होता है। पांच फीसदी मामलों में बुजुर्गों में अवसाद और तनाव का कारण साइबर ठगी, मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग, रील्स का शौक पाया गया है। एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल कहते हैं कि साइबर धोखाधड़ी के 35 फीसदी मामले बुजुर्गों से जुड़े होते हैं।
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इससे छुटकारा पाने के लिए बुजुर्ग मनोवैज्ञानिकों के पास पहुंच रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों और मानसिक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर निवेश और शेयर बाजार से जुड़ीं रील बुजुर्गों को तेजी से प्रभावित कर रही हैं। बुजुर्गों में मोबाइल फोन की लत तेजी से बढ़ी है।
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जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही बताते हैं कि ओपीडी में रोजाना 40 से 50 मामले अवसाद के आते हैं। इनमें बुजुर्ग मरीजों का प्रतिशत 10 से 20 फीसदी होता है। पांच फीसदी मामलों में बुजुर्गों में अवसाद और तनाव का कारण साइबर ठगी, मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग, रील्स का शौक पाया गया है। एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल कहते हैं कि साइबर धोखाधड़ी के 35 फीसदी मामले बुजुर्गों से जुड़े होते हैं।
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दो उदाहरण से जानिए, किस तरह बढ़ रहा रील का शौक
-रिटायर होने के बाद एसडीओ रातभर देखते थे रील, हो गया धोखा
बिजली विभाग के एक रिटायर्ड एसडीओ से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया था। परिजन कहते हैं कि वह देर रात तक मोबाइल पर निवेश और शेयर बाजार से जुड़ी रील देखते रहते थे। धीरे-धीरे उनका व्यवहार बदलने लगा। परिवार से बातचीत कम हो गई और रात दो-तीन बजे तक जागने लगे।
तेज आवाज में मोबाइल देखना, गुस्सा करना, खाना सही से नहीं खाना और लोगों से दूरी बनाना उनकी आदत बन गई। अब वह लगातार पैसे और निवेश की बात करते रहते हैं। घटना के बाद परिवार उन्हें मनोवैज्ञानिक के पास लेकर पहुंचा।
-बैंक से रिटायरमेंट के बाद सारी पूंजी रिटर्न के चक्कर में गंवाई
70 वर्षीय बैंक से रिटायर्ड बुजुर्ग साइबर ठगी में 80 लाख रुपये गंवा बैठे। घटना के बाद उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। काउंसिलिंग में पता चला कि वे रिटायर होने के बाद सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थे। निवेश में अच्छे रिटर्न के चक्कर में उन्होंने अपनी सारी पूंजी लगा दी थी।
-रिटायर होने के बाद एसडीओ रातभर देखते थे रील, हो गया धोखा
बिजली विभाग के एक रिटायर्ड एसडीओ से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया था। परिजन कहते हैं कि वह देर रात तक मोबाइल पर निवेश और शेयर बाजार से जुड़ी रील देखते रहते थे। धीरे-धीरे उनका व्यवहार बदलने लगा। परिवार से बातचीत कम हो गई और रात दो-तीन बजे तक जागने लगे।
तेज आवाज में मोबाइल देखना, गुस्सा करना, खाना सही से नहीं खाना और लोगों से दूरी बनाना उनकी आदत बन गई। अब वह लगातार पैसे और निवेश की बात करते रहते हैं। घटना के बाद परिवार उन्हें मनोवैज्ञानिक के पास लेकर पहुंचा।
-बैंक से रिटायरमेंट के बाद सारी पूंजी रिटर्न के चक्कर में गंवाई
70 वर्षीय बैंक से रिटायर्ड बुजुर्ग साइबर ठगी में 80 लाख रुपये गंवा बैठे। घटना के बाद उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। काउंसिलिंग में पता चला कि वे रिटायर होने के बाद सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थे। निवेश में अच्छे रिटर्न के चक्कर में उन्होंने अपनी सारी पूंजी लगा दी थी।
मनोरोग विशेषज्ञ बोले- इलाज जरूरी, काउंसिलिंग से करें शुरुआत
साइबर ठगी के बाद बुजुर्गों में नींद न आने, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, भूख कम लगने और लगातार पैसे के बारे में सोचते रहने जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। कई मामलों में मरीजों को दवा और नियमित थेरेपी की जरूरत पड़ रही है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है: डॉ. आकृति पांडेय, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट
रिटायरमेंट के बाद कई बुजुर्ग अकेलेपन और खालीपन का सामना करते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया और ऑनलाइन निवेश से जुड़े वीडियो उन्हें जल्दी आकर्षित करते हैं। जब ठगी होती है तो वे खुद को दोषी मानने लगते हैं, जिससे डिप्रेशन, एंग्जायटी और सामाजिक दूरी बढ़ने लगती है। परिवार को ऐसे लोगों के व्यवहार में बदलाव दिखते ही तुरंत काउंसिलिंग करानी चाहिए: डॉ. अमित शाही, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
जरूरी है बुजुर्गों की डिजिटल सुरक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि बुजुर्गों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में नियमित रूप से जागरूक करना आवश्यक है। परिवार के सदस्यों को भी उनके साथ संवाद बनाए रखना चाहिए। ऑनलाइन लेनदेन में सहायता करनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक पर तुरंत विश्वास न करने की सलाह दी जानी चाहिए।
साइबर ठगी के बाद बुजुर्गों में नींद न आने, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, भूख कम लगने और लगातार पैसे के बारे में सोचते रहने जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। कई मामलों में मरीजों को दवा और नियमित थेरेपी की जरूरत पड़ रही है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है: डॉ. आकृति पांडेय, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट
रिटायरमेंट के बाद कई बुजुर्ग अकेलेपन और खालीपन का सामना करते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया और ऑनलाइन निवेश से जुड़े वीडियो उन्हें जल्दी आकर्षित करते हैं। जब ठगी होती है तो वे खुद को दोषी मानने लगते हैं, जिससे डिप्रेशन, एंग्जायटी और सामाजिक दूरी बढ़ने लगती है। परिवार को ऐसे लोगों के व्यवहार में बदलाव दिखते ही तुरंत काउंसिलिंग करानी चाहिए: डॉ. अमित शाही, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
जरूरी है बुजुर्गों की डिजिटल सुरक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि बुजुर्गों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में नियमित रूप से जागरूक करना आवश्यक है। परिवार के सदस्यों को भी उनके साथ संवाद बनाए रखना चाहिए। ऑनलाइन लेनदेन में सहायता करनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक पर तुरंत विश्वास न करने की सलाह दी जानी चाहिए।