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कलम के साधक थे जगदीश : प्रो. केसी लाल
Mon, 28 Aug 2023 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 28 Aug 2023 12:48 AM IST
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गोरखपुर। राप्ती नदी के कछार अंचल में पैदाइश के बाद वहीं पले बढ़े पूर्वांचल के कवि एवं प्रगतिशील लेखक संघ गोरखपुर के पूर्व महासचिव जगदीश नारायण श्रीवास्तव के लिए लेखन आत्मिक जरूरत थी। वे कलम के ऐसे साधक थे, जो बिरले होते हैं।
ये बातें गोरखपुर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो.केसी लाल ने कही। वे रविवार को महानगर के जटाशंकर रोड स्थित एक होटल में स्व. जगदीश नारायण श्रीवास्तव की आत्मकथा-पुस्तक ''''कहां से चले थे, कहां आ गए हम'''' के लोकार्पण अवसर पर बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ एवं प्रेमचंद साहित्य संस्थान ने किया था। कार्यक्रम का संचालन युवा साहित्यकार/कवि निखिल पांडेय ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रामदेव शुक्ल ने की। कार्यक्रम के अंत में जनवादी लेखक संघ गोरखपुर के अध्यक्ष जेपी मल्ल ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। पुस्तक की संपादक डा. ऋतु मंजरी श्रीवास्तव ने परिचयात्मक संबोधन से अपने पिता के व्यक्तित्व और कृतित्व से अवगत कराया। पुत्र ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव एवं उनके पोते सुयश श्रीवास्तव ने भी अपनी स्मृतियों को सबसे साझा किया। स्व. जगदीश नारायण श्रीवास्तव के मित्र ब्रह्मानंद सिंह ने इस अवसर उनसे जुड़ीं कुछ बातें बतायीं।
इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी राजाराम चौधरी, वरिष्ठ कवि-गीतकार जय प्रकाश नायक, चंद्र गुप्त प्रसाद अकिंचन, आसिफ सईद, वेद प्रकाश, वीरेंद्र मिश्र दीपक, धर्मेन्द्र त्रिपाठी, संजय कुमार आर्य मौजूद रहे।
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ये बातें गोरखपुर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो.केसी लाल ने कही। वे रविवार को महानगर के जटाशंकर रोड स्थित एक होटल में स्व. जगदीश नारायण श्रीवास्तव की आत्मकथा-पुस्तक ''''कहां से चले थे, कहां आ गए हम'''' के लोकार्पण अवसर पर बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ एवं प्रेमचंद साहित्य संस्थान ने किया था। कार्यक्रम का संचालन युवा साहित्यकार/कवि निखिल पांडेय ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रामदेव शुक्ल ने की। कार्यक्रम के अंत में जनवादी लेखक संघ गोरखपुर के अध्यक्ष जेपी मल्ल ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। पुस्तक की संपादक डा. ऋतु मंजरी श्रीवास्तव ने परिचयात्मक संबोधन से अपने पिता के व्यक्तित्व और कृतित्व से अवगत कराया। पुत्र ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव एवं उनके पोते सुयश श्रीवास्तव ने भी अपनी स्मृतियों को सबसे साझा किया। स्व. जगदीश नारायण श्रीवास्तव के मित्र ब्रह्मानंद सिंह ने इस अवसर उनसे जुड़ीं कुछ बातें बतायीं।
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इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी राजाराम चौधरी, वरिष्ठ कवि-गीतकार जय प्रकाश नायक, चंद्र गुप्त प्रसाद अकिंचन, आसिफ सईद, वेद प्रकाश, वीरेंद्र मिश्र दीपक, धर्मेन्द्र त्रिपाठी, संजय कुमार आर्य मौजूद रहे।
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