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Gorakhpur News: एम्स में दो साल से नहीं चलीं 16 करोड़ की सीटी स्कैन और MRI मशीनें, बाहर महंगी है जांच

Tue, 17 Jan 2023 03:44 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 17 Jan 2023 03:44 PM IST
सार

सीएम सिटी में एम्स की शुरुआत हुई तो लोगों को लगा कि अब बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। एम्स में इस समय 18 विभागों की ओपीडी चल रही है। प्रतिदिन 3000 से अधिक मरीजों का इलाज ओपीडी में किया जा रहा है।

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CT scan and MRI machines worth 16 crores not working in AIIMS for two years
गोरखपुर एम्स। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 16 करोड़ रुपये की एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें दो वर्षों से बेकार पड़ी हैं। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होने से दो साल में एक भी मरीज की जांच नहीं हो पाई। मरीजों को निजी जांच केंद्रों में महंगी जांच करानी पड़ रही है।

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सीएम सिटी में एम्स की शुरुआत हुई तो लोगों को लगा कि अब बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। एम्स में इस समय 18 विभागों की ओपीडी चल रही है। प्रतिदिन 3000 से अधिक मरीजों का इलाज ओपीडी में किया जा रहा है। साथ ही 300 बेड का आईपीडी भी चल रहा है।
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ओपीडी में आने वाले 30 से अधिक मरीजों को डॉक्टर प्रतिदिन सीटी स्कैन और एमआरआई जांच के लिए लिखते हैं। दोनों ही जांचें एम्स में नहीं हो पा रही हैं। जबकि एम्स में दो साल पहले 11 करोड़ से एमआरआई और पांच करोड़ से सीटी स्कैन मशीन लगाई गई हैं।
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दोनों मशीनों का ट्रायल हो चुका है। इस्तेमाल नहीं होने से दोनों की टॉली जाम हो गई है। बता दें कि एम्स में गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन मंडल के अलावा बिहार और नेपाल से भी मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं।

 

बीआरडी में एक माह बाद आता है नंबर

एम्स में आने वाले मरीज या तो निजी जांच केंद्र में जांच कराते हैं या मेडिकल कॉलेज जाते हैं। मेडिकल कॉलेज में एमआरआई की जांच के लिए एक माह का लंबा इंतजार करना पड़ता है। एक दिन में करीब 30 मरीजों की एमआरआई हो पाती है। जबकि प्रतिदिन 60 से अधिक मरीज एमआरआई के लिए आते हैं। ऐसी स्थिति में बाहर से आने वाले मरीजों को एक माह बाद का नंबर दिया जाता है।

निजी केंद्रों में महंगी है जांच
निजी केंद्रों में सीटी स्कैन और एमआरआई जांच काफी महंगी है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों के दाम अलग-अलग वसूले जाते हैं। सिर की सीटी स्कैन जांच कराने में 1,700 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। चेस्ट के लिए 3,500, गले के लिए 3,500 रुपये और पेट के लिए 5,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

स्पाइन और जबड़े की जांच के लिए 3,500-3,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन जांच 1500 से 2,500 रुपये में हो जाती है। इसी तरह एमआरआई 4000-4500 रुपये में हो जाती है। जबकि निजी केंद्र में सात से दस हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

रेडियोलॉजिस्ट ने ज्वाइन करने के बाद छोड़ दिया
वर्ष 2020 में एम्स में एक रेडियोलॉजिस्ट ने ज्वाइन किया था। ज्वाइनिंग अल्ट्रासाउंड के लिए हुई, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। नवंबर 2020 में फिर दो रेडियोलॉजिस्ट नियुक्त हुए, लेकिन दोनों ने ज्वाइन नहीं किया।

एम्स मीडिया प्रभारी पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि एम्स में एक रेडियोलॉजिस्ट ने ज्वाइन किया है। वह अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे कर रहे हैं। एमआरआई और सीटी स्कैन के लिए उसी विशेषज्ञ डॉक्टर से एक समझौता हो चुका है। समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। उम्मीद है कि इसी माह के अंत तक एम्स में सीटी स्कैन और एमआरआई जांच शुरू हो जाएगी।
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