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जिसकी हत्या में जेल में हैं चार साध्वियां, वो जिंदा मिला तो भाई बोला-विश्वास नहीं होता

Tue, 28 Jan 2020 06:45 AM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, बस्ती।
डिजिटल न्यूज डेस्क, बस्ती। Published by: विजय जैन Updated Tue, 28 Jan 2020 06:45 AM IST
सार

  • भाई बोला, तपस्यानंद के जिंदा होने की मिली है जानकारी
  • लालगंज थाने में नौ मार्च 18 को दर्ज हुआ था हत्या का मुकदमा
  • पेशबंदी में बिहार के नवादा में भी हुई थी एफआईआर
  • बिहार जाने से घबरा रहे तपस्यानंद के घर वाले

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Whose four ladies are in jail for murder, if he is alive then brother says- I do not believe
संत कुटीर आश्रम, जो अभी तक सील है। - फोटो : amarujala

विस्तार

तपस्यानंद उर्फ श्यामचंद्र का अपहरण कर हत्या मान चुके परिवार वालों को उसके जिंदा मिलने की जानकारी तो हुई लेकिन अब तक संपर्क नहीं हो पाया। तपस्यानंद के भाई कल्पनाथ चौधरी निवासी सेल्हरा थाना लालगंज जनपद बस्ती ने अमर उजाला को बताया कि मीडिया के माध्यम से श्यामचंद्र के जिंदा मिलने की जानकारी मिली है। मगर पुलिस वालों ने अब तक उनसे बात नहीं कराई है।
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बिहार जाकर मिलने के प्रश्न पर कल्पनाथ का कहना है कि डर के मारे वे बिहार जाने से घबरा रहे हैं। डर की वजह नवादा थाने में बीते दीपावली के दिन दर्ज हुआ दुष्कर्म का मुकदमा है, जिसमें तपस्यानंद के विपक्षी ने उसके परिवार वालों पर दर्ज कराया था। इस मुकदमे में कल्पनाथ चौधरी समेत अन्य वे सभी आरोपी शामिल हैं, जिसने तपस्यानंद का अपहरण करके हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।   
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नौ मार्च 2018 को लालगंज थाने में तपस्यानंद उर्फ श्यामचंद्र चौधरी व उसकी दो बहनों का अपहरण करने का मुकदमा दर्ज किया गया। जिसमें कहा गया कि दोनों बहनें तो वापस आ गईं लेकिन श्यामचंद्र को गायब कर दिया गया। पुलिस ने हत्या, साक्ष्य मिटाने और साजिश की धारा में महंत सच्चिदानंद और उनके सहयोगियों पर मुकदमा पंजीकृत किया।
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पुलिस ने इस मामले में चार साध्वियों को जेल भेजा था। मगर चार दिन पहले अचानक तपस्यानंद के बिहार के शेखपुरा में कुछ साध्वियों के साथ साधुवेश में जिंदा मिलने की खबर आते ही मामले में नया मोड़ आ गया। एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि पुलिस विधि संगत कदम उठाएगी। इसके लिए लालगंज थाने की टीम व विवेचक को तलब किया गया है।

क्या था मामला

लालगंज थाना के सेल्हरा गांव की कमलावती देवी ने नौ मार्च 2018 को पुलिस को तहरीर देकर कहा था कि 30 नवंबर 2017 की शाम सच्चिदानंद उर्फ दयानंद, उनके सहयोगी दीपानंद, अभेदानंद, कमलाबाई, शीतला बाई, मांडवी, रश्मिबाई, मालती सत्यलोक आश्रम स्थित सेल्हरा आए। उनके बेटे श्यामचंद, बेटी सरोज व बिलायती को यह कह कर अपने साथ ले गए कि बस्ती स्थित आश्रम में इनके साथ ट्रस्ट संबंधी मामलों में कुछ विचार करना है। बेटियां तो बाद में वापस आ गईं, मगर बेटा लौटकर नहीं आया। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला।
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सुपारी की रकम पर शक
पुलिस को तपस्यानंद के जिंदा होने का शक तब हुआ जब पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे दिलचंद को गिरफ्तार किया। आरोप था कि दो लाख रुपये में सौदा हुआ था। मगर जब जांच की गई तो पता चला कि वह बहुत गरीब है और किसी को मारने के लिए दो लाख की सुपारी देने की उसकी हैसियत नहीं है। 
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