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ओवरलोड ट्रकों से वसूली प्रकरणः सख्ती बढ़ने पर लोकेशन लेकर बाइक गैंग पास कराते थे ट्रक
Thu, 30 Jan 2020 05:27 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Thu, 30 Jan 2020 05:27 PM IST
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इसी ट्रक से हुआ हादसा
- फोटो : अमर उजाला
ओवरलोड ट्रकों को पास कराने के लिए के पीछे सिर्फ आरटीओ महकमा के अफसर ही नहीं शामिल थे। इस काम में धंधेबाजों ने अपना एक पूरा रैकेट बनाकर रखा था। जब भी सरकारी सख्ती बढ़ती थी तो धंधेबाजों के बाइक गैंग सक्रिय हो जाते थे। सचल दस्ता किधर है, इसका लोकेशन बाइक गैंग रखता था। यह चेकिंग प्वाइंट के आसपास ही घूमते थे।
रात दस बजे से भोर में पांच बजे तक यह सक्रिय रहते थे जिसके बदले इन्हें मोटी रकम दी जाती थी। जानकारी के मुताबिक आरटीओ महकमे के अफसर से सौदा तय होने के बाद कोड जारी कर दिया जाता था। सचल दस्ता को यह कोड बताते ही वह ट्रक को पास करा देते थे लेकिन जहां पर ऐसा नहीं हो पाता था वहां पर मुखबिर पाले जाते थे। वह बाइक लेकर सचल दस्ता की लोकेशन की निगरानी करते थे इनकी मदद सचल दस्ता में ही शामिल कुछ ड्राइवर, सिपाही किया करते थे। बताया जा रहा है कि सोनभद्र से ज्यादातर ट्रकें निकलकर प्रदेश के अन्य हिस्सों में जाती हैं।
यहीं से पूरी सेटिंग की जाती है। यहां पर सेटिंग होने के बाद फिर हर जिले को साधा जाता है, जहां पर बात बनी वहां के लिए कोड जारी होता नहीं तो फिर बाइक गैंग की मदद से लोकेशन लेकर दूसरे रास्तों से ट्रक को गुजारा जाता था।
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यह है मामला
एसटीएफ ने जांच के बाद 24 जनवरी को मधुबन होटल के मालिक धर्मपाल सिंह समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर ओवरलोड ट्रकों से वसूली का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपितों के पास से डायरी बरामद की थी, जिसमें कई आरटीओ, एआरटीओ, सिपाहियों के नाम सामने आए। बेलीपार थाने में 24 पन्ने की फर्द बनानी पड़ी।
फर्द लिखने के बाद शुक्रवार आधी रात को एसटीएफ ने बेलीपार थानेदार को सुपुर्द किया। वहीं थाने की जीडी में एफआईआर दर्ज होते-होते सुबह हो गई। शनिवार को ही पुलिस ने आरोपितों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उनको जेल भेजा था।
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रात दस बजे से भोर में पांच बजे तक यह सक्रिय रहते थे जिसके बदले इन्हें मोटी रकम दी जाती थी। जानकारी के मुताबिक आरटीओ महकमे के अफसर से सौदा तय होने के बाद कोड जारी कर दिया जाता था। सचल दस्ता को यह कोड बताते ही वह ट्रक को पास करा देते थे लेकिन जहां पर ऐसा नहीं हो पाता था वहां पर मुखबिर पाले जाते थे। वह बाइक लेकर सचल दस्ता की लोकेशन की निगरानी करते थे इनकी मदद सचल दस्ता में ही शामिल कुछ ड्राइवर, सिपाही किया करते थे। बताया जा रहा है कि सोनभद्र से ज्यादातर ट्रकें निकलकर प्रदेश के अन्य हिस्सों में जाती हैं।
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यहीं से पूरी सेटिंग की जाती है। यहां पर सेटिंग होने के बाद फिर हर जिले को साधा जाता है, जहां पर बात बनी वहां के लिए कोड जारी होता नहीं तो फिर बाइक गैंग की मदद से लोकेशन लेकर दूसरे रास्तों से ट्रक को गुजारा जाता था।
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यह है मामला
एसटीएफ ने जांच के बाद 24 जनवरी को मधुबन होटल के मालिक धर्मपाल सिंह समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर ओवरलोड ट्रकों से वसूली का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपितों के पास से डायरी बरामद की थी, जिसमें कई आरटीओ, एआरटीओ, सिपाहियों के नाम सामने आए। बेलीपार थाने में 24 पन्ने की फर्द बनानी पड़ी।
फर्द लिखने के बाद शुक्रवार आधी रात को एसटीएफ ने बेलीपार थानेदार को सुपुर्द किया। वहीं थाने की जीडी में एफआईआर दर्ज होते-होते सुबह हो गई। शनिवार को ही पुलिस ने आरोपितों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उनको जेल भेजा था।