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किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म का मामला: मकान मालिक के बेटे-भतीजे बनाते थे हवस का शिकार, फजीहत के बाद पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

Mon, 23 Aug 2021 02:20 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 23 Aug 2021 02:20 PM IST
सार

एक किशोरी ने सामूहिक दुष्कर्म, धमका कर दूसरों के साथ सोने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। तिवारीपुर थाना इंचार्ज ने सीएम कैंप कार्यालय से मामले की जांच के निर्देश को हल्के में लिया था। डीआईजी, एसएसपी के संज्ञान लेने पर कार्रवाई हुई। एसएसपी बोले, मेडिकल और बयान के आधार पर कार्रवाई होगी, तिवारीपुर पुलिस की निष्क्रियता की जांच करेंगे सीओ कोतवाली।

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case filed agaist Landlord son and nephew in case of sexual assolted minor girl in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर जिले के तिवारीपुर इलाके में किराए के मकान में रहने वाली 13 साल की किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी मकान मालिक के बेटे और भतीजे के खिलाफ रविवार को पुलिस ने आखिर केस दर्ज कर लिया है। खबर है कि दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया है। हालांकि, आगे की कार्रवाई किशोरी की मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही अमल में लाई जाएगी।
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उधर, सीएम के कैंप कार्यालय से पुलिस को सूचना देने के बाद भी कार्रवाई ना करने पर थाना इंचार्ज तिवारीपुर इंस्पेक्टर नासीर के खिलाफ डीआईजी जे रविंद्र गौड़ और एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने सीओ कोतवाली को जांच के आदेश दिए हैं। इस मुद्दे को अमर उजाला ने रविवार को प्रमुखता से उठाया था। इसका संज्ञान लेकर ही आला अफसरों ने तिवारीपुर थाना पुलिस के पेंच कसे हैं तो बिजली की गति से कार्रवाई होती चली गई।  
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जानकारी के मुताबिक, 13 साल की एक किशोरी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में पहुंचकर शिकायत की थी कि उसके मकान मालिक के बेटे-भतीजे ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और अब दूसरों के साथ सोने को मजबूर करते हैं। मना करती है तो बेल्ट और लाठी से उसकी पिटाई करते हैं।
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कैंप कार्यालय प्रभारी ने ऐसा गंभीर आरोप सुनते ही तिवारीपुर इंस्पेक्टर को कार्रवाई के लिए कहा था, लेकिन इस मामले में पुलिस केस दर्ज कर जांच करने की जगह किराएदारी का विवाद बताकर मामले की लीपापोती करने में जुट गई। यहां तक की इंस्पेक्टर थाना तिवारीपुर ने मौके पर जाना तक मुनासिब नहीं समझा। अब जब मामले ने तूल पकड़ा और इसकी जानकारी अफसरों को हो गई तो पुलिस भी हरकत में आ गई। आनन फानन सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। 

...आखिर फजीहत के बाद आए लाइन पर

किशोरी से दुष्कर्म का मामला सार्वजनिक हुआ तो तिवारीपुर पुलिस हरकत में आई। जो इंस्पेक्टर पुलिस किशोरी के घर जाने का वक्त नहीं निकाल पा रहे थे, वही रविवार को किशोरी के घर भागते हुए पहुंचे। हालात यह हैं कि गंभीर मामले में भी थानों पर कार्रवाई तभी हो पा रही है। जब भी मुख्यमंत्री का जनता दरबार यहां लगता है, बड़ी संख्या में फरियादी पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने को लेकर शिकायत करते हैं। सीएम ने शहर के आलाअफसरान से इस प्रवृत्ति पर कई बार नाराजगी भी जताई है। लेकिन, हम नहीं सुधरेंगे की प्रवृत्ति कई पुलिसकर्मियों में स्थायी भाव से घर कर गई है। तिवारीपुर का यह मामला सबसे ताजा उदाहरण है।

एक किशोरी न केवल सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा रही थी, बल्कि वह इससे आगे यह भी आरोप लगा रही थी कि उसे बार-बार दूसरों के साथ सोने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सीधा सा मामला था, सीएम कैंप कार्यालय से संज्ञान में लाया गया, कानून साफ है, केस दर्ज करके मेडिकल करा लेेते लड़की से यौन संबंध बनाने की पुष्टि होती तो आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई कर देते। मेडिकल में पुष्टि नहीं होती, मामला झूठा निकलता तो फरियादी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर देते। लेकिन, आदत तो लीपापोती की पड़ी है, मौके पर जाने की आदत खत्म हो गई है। अमर उजाला ने पुलिस की इसी प्रवृत्ति पर सवाल उठाया और आखिर तिवारीपुर पुलिस ने फजीहत के बाद वही किया जो उसे स्वेच्छा से पहले ही करना चाहिए था।

दुष्कर्म पीड़िता की फरियाद ना सुनने पर पुलिस वालों पर दर्ज हुआ था केस
तीन मार्च 2021 को भी पुलिस की कुछ ऐसी ही करतूत सामने आई थी। तब एक डांसर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें वह आरोप लगा रही थी कि हड़हवा फाटक चौकी पर शिकायत लेकर जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। मामला उसी दिन तत्कालीन एसएसपी जोगेंद्र कुमार के संज्ञान में आ गया और फिर वह खुद ना सिर्फ मौके पर पहुंचे थे बल्कि ऐसी कार्रवाई की थी कि पुलिस वालों में डर हो, मगर उनके जाने के बाद से ही पुलिस वाले फिर से कुछ उसी दौर में पहुंच गए हैं। तब तत्कालीन एसएसपी ने चौकी इंचार्ज और सिपाही पर फरियाद ना सुनने के आरोप में एफआईआर तक दर्ज करा दिया था। उस समय इसका असर यह देखने को मिलने लगा था कि पुलिस वाले हर फरियादी की ना सिर्फ सुनते, बल्कि गलत होने पर अफसरों से बातचीत करने के बाद ही फैसला लेते थे। केस दर्ज कराने के लिए किसी को बहुत परेशान भी नहीं होना होता था।

प्रार्थना पत्र देकर पीड़िता ने यह कहा था

एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि किशोरी की तहरीर के आधार पर दुष्कर्म का केस दर्ज कर लिया गया है। प्रकरण की जांच कराई जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट और बयान के आधार पर इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की लापरवाही की जांच के भी निर्देश दे दिए गए हैं।
 
13 साल की किशोरी ने सीएम कैंप कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि वह तिवारीपुर थाना इलाके में पिता और मां के साथ किराए के कमरे में रहती थी। उसका परिवार बहुत ही गरीब है। पिता रिक्शा चलाते हैं तथा मां इधर-उधर से मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करती थीं। एक दिन मकान मालिक का बेटे तथा भतीजे ने उससे दुष्कर्म किया। विरोध किया तो जान मारने की धमकी देने लगे। उसके बाद दोनों ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया।

बताया कि अब यह लोग उसे पैसों के लिए दूसरी जगह ले जाते हैं और दूसरे लोगों के साथ सोने को मजबूर करते हैं। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देते हैं। विरोध पर कई बार लाठी और बेल्ट से उसकी पिटाई भी की गई। घर छोड़कर दूसरी जगह चले गए तो वहां से भी ये लोग उसे दूसरों के यहां जबरदस्ती ले जाने लगे।
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