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गोरखपुर: 23 फीसदी लोगों को मनोरोगी बना गया कोरोना, शोध में हुआ खुलासा

Sat, 07 Oct 2023 01:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 07 Oct 2023 01:19 PM IST
सार

कोरोना के दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही कोविड का लेवल-3 अस्पताल था। मेडिकल कॉलेज में केवल इमरजेंसी मरीजों का इलाज किया जा रहा था। कोविड लेवल-3 के भय की वजह से सामान्य रोगी भी बीआरडी नहीं पहुंचे। इससे उनका इलाज नहीं हो पाया।

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Corona turned 23 percent people into psychopaths
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : निखिल मेहता

विस्तार

कोरोना संकट के दौरान लगे लॉकडाउन का लोगों की मन:स्थिति पर गहरा असर हुआ था। इलाज नहीं मिलने की वजह से 23 प्रतिशत लोग मानसिक रोगी हो गए थे। वहीं इस दौरान हो रही मौतों व अन्य कारणों के चलते 16 प्रतिशत लोग अवसाद के शिकार हो गए थे। इस स्थिति से पूरी तरह उबरने में लोगों को लंबा वक्त लगेगा। अब जाकर स्थिति सामान्य की ओर बढ़ रही है।

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यह निष्कर्ष निकला है बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टरों व छात्रों के सम्मिलित शोध में। विभागाध्यक्ष डॉ. तापस कुमार आईच की अगुवाई में डॉ. आमिल एच खान, दीपा सिंह, ऋचा पांडेय, गौरव एस यादव और प्रभात के अग्रवाल की टीम ने अप्रैल 2020 से अक्तूबर 2020 के बीच मानसिक रोग विभाग में टेली कंस्लटेशन के जरिए अपना इलाज कराने वाले 968 लोगों पर यह शोध कार्य किया।
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डॉ. तापस ने बताया कि कोरोना की पहली लहर के दौरान जब लॉकडाउन किया गया तो अचानक ही ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में 95 प्रतिशत तक कमी आ गई। इसके बाद लोगों को ऑनलाइन उपचार की सुविधा दी गई। डॉक्टरों की टीम ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लॉकडाउन शुरू होने से पहले और बाद में आने वाले रोगियों की संख्या का एक तुलनात्मक अध्ययन किया।
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इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान उपचार कराने वाले रोगियों के अनुभव के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई। अध्ययन अवधि के दौरान रोगियों के ओपीडी पंजीकरण में 94.5 प्रतिशत की गिरावट आई। मानसिक रोग विभाग की तरफ से शुरू की गई टेली-परामर्श सेवा के तीन महीने के दौरान ही 23.5 प्रतिशत लोगों के मानसिक रोग का उपचार किया गया। 21.4 प्रतिशत लोग विभिन्न प्रकार के सिरदर्द से परेशान थे। इसके अलावा 15.9 प्रतिशत मरीजों में अवसाद के लक्षण थे। 15.3 प्रतिशत को चिंता विकार और 8.8 प्रतिशत को द्विध्रुवी-प्रभावी विकार (किंतु-परंतु) था।

कोविड अस्पताल के चलते प्रभावित हुआ बीआरडी
कोरोना के दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही कोविड का लेवल-3 अस्पताल था। मेडिकल कॉलेज में केवल इमरजेंसी मरीजों का इलाज किया जा रहा था। कोविड लेवल-3 के भय की वजह से सामान्य रोगी भी बीआरडी नहीं पहुंचे। इससे उनका इलाज नहीं हो पाया।

साथ ही बीआरडी के संसाधनों का भी उपयोग नहीं हो सका। शोध में यह बात भी सामने आई कि कोविड लेवल-3 अस्पताल इसी परिसर में होने की वजह से लोग अपने अन्य बीमारियों का इलाज कराने नहीं आए। इसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा।
 

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