गोरखपुर में कोरोना संक्रमण की कम होती रफ्तार ने स्वास्थ्य विभाग की कई मुश्किलों को कम कर दिया है। विशेषज्ञ इसे सुखद संकेत मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे तीन वजहें हो सकती हैं। पहली शहरवासियों की हर्ड इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता), दूसरा वायरस का ट्रांसमिशन कम होना और तीसरा वायरस में म्यूटेशन (बदलाव)। इन्हीं वजहों से संक्रमण की रफ्तार कम होती जा रही है।
गोरखपुर में तेजी से कम हो रहे हैं कोरोना मरीज, डॉक्टर ने बताई ये तीन वजह
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हालांकि विशेषज्ञों का जिलावासियों को संदेश है कि जब तक दवाई नहीं, तब तक लापरवाही नहीं। फिलहाल विशेषज्ञों को सीरो सर्वे रिपोर्ट का इंतजार है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में जांच का दायरा बढ़ गया है। पहले जहां दो हजार जांच घंटे में होती थी, अब यह संख्या तीन हजार से ज्यादा हो गई है। जांच का दायरा बढ़ने के बावजूद मरीजों की संख्या कम होती जा रही है।
यह शहरवासियों के लिए अच्छी खबर है। वे कहते हैं कि वायरस का ट्रांसमिशन मरीजों के होम आइसोलेट होने की वजह से भी कम हुआ है। काफी हद तक लोग जागरूक भी हुए हैं। जिन्हें हल्का बुखार या सांस लेने में तकलीफ हुई, खुद को लोगों से अलग कर लिए।
वायरस कमजोर हुआ है
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि वायरस काफी हद तक कमजोर हो गया है। अब तक केवल एंटीजन किट की जांच में लोग निगेटिव आ रहे थे, लेकिन एंटीजन से निगेटिव आने वाले लोगों की जांच जब आरटीपीसीआर से की जा रही है तो करीब 95 प्रतिशत लोग निगेटिव आ रहे हैं। इससे संकेत मिला है कि वायरस म्युटेशन की वजह से काफी कमजोर हो गया है।
हर्ड इम्युनिटी सबसे बड़ा कारण
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि शहरवासियों की हर्ड इम्युनिटी भी एक बड़ा कारण है। शहर में कुछ ऐसे लोग मिले हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में कोरोना से जंग जीत ली। इन लोगों ने प्लाज्मा भी दान किया है। यह अच्छा संकेत है। इससे काफी हद तक संक्रमण पर काबू पाया गया है। बताया कि एंटीबॉडी की जांच भी की गई है। तब यह परिणाम मिले हैं कि लोगों की इम्युनिटी अच्छी है।