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यूपी: ऑटो में ही कोरोना मरीज ने तोड़ दिया दम, अनुमति के चक्कर में चली गई जान

Thu, 06 May 2021 02:06 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती। Published by: vivek shukla Updated Thu, 06 May 2021 02:06 PM IST
सार

परिवार के लोगों ने लगाया ओपेक चिकित्सालय प्रशासन पर लगाया भर्ती न करने का आरोप

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Corona patient dies in auto at Basti UP
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बस्ती मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में जिम्मेदारों की उपेक्षा कोरोना संक्रमित मरीजों के जिंदगी पर पड़ रही है। बुधवार को एक घटना ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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हुआ यह कि जमदाशाही गांव निवासी एक व्यक्ति की मंगलवार की शाम सांस फूलने लगी। परिवार के लोग उसे लेकर शहर के एक निजी अस्पताल में पहुंचे। यहां बेड खाली न होने की बात कहकर मरीज को जिला अस्पताल भेज दिया गया। यहां डॉक्टरों ने जब जांच कराई तो कोविड-19 का संक्रमित पाया गया।
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इसके बाद उसे फिर ओपेक चिकत्सालय कैली रेफर कर दिया गया। बुधवार की सुबह नौ बजे तक इंतजार के बाद जब एंबुलेंस नहीं आई, तो परिवार के लोग उसे लेकर ऑटो से ओपेक चिकित्सालय कैली पहुंचे। यहां परिवार के लोग भर्ती करने के लिए डॉक्टरों से गुहार लगाते रहे, मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।
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काफी देर तक वह ऑटो में पड़ा तड़पता रहा, मगर जिम्मेदारों ने परिवार की एक न सुनी। थोड़ी देर तड़पने के बाद उसकी मौत हो गई। परिवार के लोगों का आरोप है कि यदि डॉक्टरों ने भर्ती कर लिया होता तो शायद उसकी जिंदगी बच जाती।

 

बोले सीएमएस

सीएमएस डॉ. जीएम शुक्ला ने कहा कि कैली में भर्ती के लिए समिति बनाई गई है। यहां भर्ती के लिए समिति की अनुमति की जरूरत होती है। बिना समिति की अनुमति किसी को भी भर्ती नहीं किया जा सकता है। ऐसे में किसी की मौत, भर्ती न होने से हो गई है तो उसके लिए जिम्मेदार मैं नहीं हूं।

तब तो अनुमति के चक्कर में चली जाएगी जान
ओपेक चिकित्सालय कैली में गंभीर कोविड मरीजों को भर्ती करने के लिए समिति की अनुमति की जरूरत होती है। अब कमेटी कहां मिलेगी। उससे गंभीर मरीज के तीमारदार कैसे मिलेंगे, यह तो कोई नहीं बता पा रहा है।
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