{"_id":"5ff6e70124edec56385f1cff","slug":"corona-impact-on-players-of-secondary-school-in-gorakhpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल में अपना भविष्य तलाशने वाले छात्र हुए मायूस, जानिए क्या है बड़ी वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेल में अपना भविष्य तलाशने वाले छात्र हुए मायूस, जानिए क्या है बड़ी वजह
Thu, 07 Jan 2021 04:18 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 07 Jan 2021 04:18 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माध्यमिक विद्यालयों के खिलाड़ियों का इस साल राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल होने की मंशा पर पानी फिर गया है। स्कूली खेल व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन न होने व कोरोना के कारण इस बार खेल का सत्र शून्य कर दिया गया है। ऐसे में इंटर के छात्र इस बार बिना खेल के ही विदा हो जाएंगे। सत्र शून्य होने की जानकारी होने के बाद खेल में अपना भविष्य तलाशने वाले छात्र मायूस हो गए हैं।
विज्ञापन
सरकार खेल के लिए प्रतिवर्ष सत्तर लाख रुपये का बजट देती है। खिलाड़ी स्कूली खर्चे पर ही विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करते हैं। राज्य स्तरीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ही राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में शामिल होने का अवसर मिलता है। राज्य स्तरीय खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र मिलता है, जिसका सीधा फायदा उन्हें अगली कक्षाओं में नामांकन के साथ ही नौकरी में मिलता है।
विज्ञापन
तीन तरह की होती हैं प्रतियोगिताएं
पढ़ाई के साथ-साथ खेल में रुचि रखने वाले छात्रों के चयन के लिए सरकार प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय प्रतियोगिता कराती है। अंडर 14 में कक्षा आठ, अंडर 17 में कक्षा नौ व दस तथा अंडर 19 में कक्षा 11 व 12 के छात्र प्रतिभाग करते हैं। स्कूलों में छात्रों को चयनित करने के लिए विशेष खेल शिक्षक होते हैं, जो जनपद स्तर पर ट्रायल के जरिये अच्छे खिलाड़ियों का चयन करते हैं।
विज्ञापन