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गोरखपुर: गन्ना उत्पादन का रकबा घटने पर कमिश्नर ने जताई नाराजगी, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
Sat, 06 Feb 2021 07:38 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 06 Feb 2021 07:38 PM IST
सार
- दो-दो चीनी मिले खुली उसके बाद भी बढ़ने के बजाए कैसे घट गया रकबा
- 2019-20 में 136 लाख हेक्टेयर बोया गया था गन्ना, 2020-21 में 121 लाख हेक्टेयर हुआ
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गन्ना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के मुंडेरवा और पिपराइच में दो नई चीनी मिलें खुलने के बाद भी पिछले साल की तुलना में इस साल गन्ना उत्पादन का रकबा घटने को कमिश्नर ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए गन्ना, कृषि और सिंचाई विभाग के अफसरों की कमेटी से रकबा घटने की वजह और इसे बढ़ाने के लिए क्या प्रयास किए, इसपर 15 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है।
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कमिश्नर जयंत नार्लिकर शनिवार को एनेक्सी भवन सभागार में गन्ना मूल्य के भुगतान एवं पेराई की समीक्षा कर रहे थे। दरअसल गोरखपुर मंडल में वर्ष 2019-20 में गन्ना का क्षेत्रफल 136 लाख हेक्टेयर था। वर्ष 2020-21 में यह 121 लाख हेक्टेयर रह गया है।
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बैठक में कमिश्नर ने इसी पर सवाल पूछते हुए कहा कि मुंडेरवा और पिपराइच में जब दो नई चीनी मिलों का संचालन शुरू हुआ तो रकबा बढ़ना चाहिए था। मगर यह घट गया। बैठक में यह आंकड़ा सामने आया कि देवरिया में 23 फीसदी गन्ना का रकबा कम हुआ है।
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महराजगंज जिले में वित्त वर्ष 2019-20 में 18636 हेक्टेयर गन्ना बोया गया था, लेकिन वर्ष 2020-21 में घटकर 16500 रह गया। इस पर कमिश्नर ने कड़ी आपत्ति दर्ज की। अधिकारियों ने बताया कि जलभराव और बारिश ज्यादा होने के कारण गन्ना का रकबा प्रभावित हुआ। कमिश्नर ने इस दलील को सही नहीं बताया। निर्देश दिए कि जल जमाव वाले क्षेत्रों में गन्ने की फसल के उत्पादन के लिए मनरेगा के तहत क्या क्या कार्य हो सकते हैं, उसकी पूरी रिपोर्ट दें।
चीनी मिलें समय से भगुतान करें तो किसान गन्ना बोने को प्रोत्साहित होंगे
कमिश्नर ने चीनी मिलों से गन्ना पर्ची, भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। मौजूदा पेराई सत्र में गोरखपुर मंडल की 9 चीनी मिलों पर किसानों का 322 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बकाया होने पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तत्काल चीनी मिलों को गन्ना मूल्य भुगतान के निर्देश दिए जाएं।
विभाग ने बताया कि अब तक मंडल की चीनी मिलों ने 593.36 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना पेरा है। इनमें से सिर्फ 271.36 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। 322 करोड़ रुपये यानी तकरीबन 55 फीसदी गन्ना मूल्य बकाया है। सिर्फ रामकोला चीनी मिल ने ही 11 जनवरी तक गन्ना मूल्य भुगतान किया है। बाकी मिलों ने 25 से 26 दिसंबर तक ही भुगतान किया है।
मंडलायुक्त जयंत नार्लिकर ने एनेक्सी भवन सभागार में गन्ना मूल्य के भुगतान एवं पेराई की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि चीनी मिलें किसानों का शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करें और किसानों को गन्ना उत्पादन के लिए प्रोत्साहित भी करें।
गन्ना विभाग, कृषि विभाग एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कमेटी 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट दे कि किन कारणों से गन्ना उत्पादन के रकबे में कमी आई है। रकबा बढ़ाने के लिए क्या प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि चीनी मिलें समय से किसानों को गन्ने का भुगतान करें तो किसान प्रोत्साहित होंगे और अधिक गन्ने की बुआई करेंगे। इस अवसर पर विभिन्न अधिकारी गण उपस्थित रहे।
विभाग ने बताया कि अब तक मंडल की चीनी मिलों ने 593.36 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना पेरा है। इनमें से सिर्फ 271.36 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। 322 करोड़ रुपये यानी तकरीबन 55 फीसदी गन्ना मूल्य बकाया है। सिर्फ रामकोला चीनी मिल ने ही 11 जनवरी तक गन्ना मूल्य भुगतान किया है। बाकी मिलों ने 25 से 26 दिसंबर तक ही भुगतान किया है।
मंडलायुक्त जयंत नार्लिकर ने एनेक्सी भवन सभागार में गन्ना मूल्य के भुगतान एवं पेराई की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि चीनी मिलें किसानों का शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करें और किसानों को गन्ना उत्पादन के लिए प्रोत्साहित भी करें।
गन्ना विभाग, कृषि विभाग एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कमेटी 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट दे कि किन कारणों से गन्ना उत्पादन के रकबे में कमी आई है। रकबा बढ़ाने के लिए क्या प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि चीनी मिलें समय से किसानों को गन्ने का भुगतान करें तो किसान प्रोत्साहित होंगे और अधिक गन्ने की बुआई करेंगे। इस अवसर पर विभिन्न अधिकारी गण उपस्थित रहे।