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Gorakhpur: सीएम योगी ने एम्स में 500 बेड की क्षमता वाले विश्राम सदन का किया शिलान्यास; मिलेंगी ये सुविधाएं

Fri, 18 Apr 2025 08:39 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 18 Apr 2025 08:39 PM IST
सार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि यदि किसी डॉक्टर के मन में संवेदना नहीं है तो वह डॉक्टर कहलाने का अधिकारी है या नहीं, इस पर विचार होना चाहिए। उसकी पहचान ही संवेदना से है।

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CM Yogi laid foundation stone of a 500 bed capacity rest house in AIIMS
कार्यक्रम को संबोधित करते सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक चिकित्सक की सबसे बड़ी पहचान उसकी संवेदना होती है। यदि किसी डॉक्टर के मन में संवेदना नहीं है तो वह डॉक्टर कहलाने का अधिकारी है या नहीं, इस पर विचार होना चाहिए। उसकी पहचान ही संवेदना से है। चिकित्सक की संवेदना गंभीर से गंभीर मरीज की आधी बीमारी को दूर कर सकती है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टरों को यह नसीहत भी दी कि वे बेवजह मरीजों को हायर सेंटर रेफर करने की प्रवृत्ति से बचें और मरीज को क्रिटिकल केयर उपलब्ध कराने में रिस्क लेने की आदत डालें।

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सीएम योगी शुक्रवार दोपहर बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के परिसर में 500 लोगों की क्षमता वाले विश्राम सदन (रैन बसेरे) का भूमि पूजन-शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। 44.34 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह विश्राम सदन पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा विश्राम सदन होगा। इसका निर्माण पावरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के सीएसआर निधि से कराया जा रहा। शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी चिकित्सा संस्थान डॉक्टर के व्यवहार के माध्यम से संवेदना का केंद्र भी होता है। संवेदना के इस केंद्र में अगर एक मरीज भर्ती होने आता है तो उसके साथ कम से कम 3 या 4 अटेंडेंट होते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में तो कई बार अटेंडेंट की संख्या 10 तक हो जाती है। ऐसे में मरीज के साथ आने वाले अटेंडेंट को आश्रय की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 500 बेड के विश्राम सदन के शिलान्यास के साथ ही गोरखपुर एम्स को एक नई उपलब्धि प्राप्त हुई है। 
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वटवृक्ष वन चुका है 2016 में एम्स के रूप में रोपा गया बीज
मुख्यमंत्री ने कहा कि एम्स गोरखपुर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2016 में किया था। 2019 में एम्स गोरखपुर का पहला मैच एडमिशन लिया था और 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एम्स का लोकार्पण किया था। 2016 में जो बीज एम्स के रूप में गोरखपुर में रोपा गया था, आज वह एक वटवृक्ष बनकर हजारों पीड़ितों को आरोग्यता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, एक नया जीवनदान देने का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि एम्स गोरखपुर में होगा, यह एक कल्पना मात्र लगती थी। हम लोग 2003 से इस आवाज को उठा रहे थे। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। एम्स दिल्ली के बाहर भी स्थापित होंगे, इसके लिए उन्होंने छह एम्स की घोषणा की थी। पर, उसके बाद यह क्रम थम सा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बिना भेदभाव, सबका साथ, सबका विकास के मंत्र का साकार रूप स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। देश के अंदर 22 नए एम्स पीएम मोदी के कार्यकाल में, 10 वर्षों में बने हैं या बन रहे हैं। उनमें से गोरखपुर एम्स भी एक है। गोरखपुर में एम्स बने, इसके लिए 2003 में उठाई गई आवाज को 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकार दिया।
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कोई गर्मी, सर्दी, बारिश में खुले में रहे, यह अमानवीय
सीएम योगी ने कहा कि वर्तमान में एम्स गोरखपुर की ऑक्युपेंसी 75 से 80 प्रतिशत है। आईसीयू, क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती होने वाले मरीज के परिजन उनके साथ नहीं रह सकते। उन्हें बाहर ही रहना पड़ता है। इस कैम्पस में कम से कम 1200 लोग ऐसे होंगे जिनको बाहर जहां-तहां सिर छुपाने के लिए पटरी पर, सड़कों के किनारे या फिर किसी अन्य जगह पर जाकर रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति खुले में गर्मी, सर्दी या बारिश झेलने को मजबूर हो तो यब अमानवीय लगता है। ऐसे में उन लोगों के बारे में सोचा जो अपने मरीज की पीड़ा के साथ यहां पर जुड़े हुए हैं। विश्राम सदन के रूप में हम ऐसी व्यवस्था बनाएं जहां पर अटेंडेंट को मिनिमम यूजर चार्ज पर रहने और सस्ती कैंटीन की सुविधा हो।

चिकित्सा संस्थानों में अटेंडेंट के लिए व्यवस्था होनी ही चाहिए
मुख्यमंत्री ने करीब डेढ़ वर्ष पहले लखनऊ में एसजीपीजीआई के अपने दौरे के दौरान सड़कों पर बड़ी संख्या में लोगों को देख उनकी व्यवस्था के लिए अटेंडेंट शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए थे। मन में आया कि एसजीपीजीआई, केजीएमयू, बीएचयू में और एम्स गोरखपुर में पेशेंट अटेंडेंट के लिए कोई केंद्र बनने चाहिए। इसकी जिम्मेदारी अवनीश अवस्थी को दी गई। उन्होंने प्रयास शुरू किए तो पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने एसजीपीजीआई, केजीएमयू और आरएमएल के लिए तीन रैन बसेरे दिए। पावर मिनिस्ट्री के सहयोग से एम्स गोरखपुर के लिए रैन बसेरा स्वीकृत हुआ।

याद दिलाया तीमारदारों के भोजन के लिए रियायती मॉडल
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 20 साल पहले इंसेफेलाइटिस के पीक समय में शुरू किए गए तीमारदारों के भोजन के लिए रियायती मॉडल का भी उल्लेख किया। कहा कि एक समय बीआरडी मेडिकल कॉलेज इंसेफेलाइटिस का हॉटस्पॉट था। वहां पर समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश के पेशेंट आते थे। वहां पर बड़ी अव्यवस्था देखने को मिलती थी। लोगों के पास खाने के लिए भोजन नहीं होता था। उस समय हम लोगों ने एक स्वयंसेवी संस्था से मिलकर व्यवस्था कराई थी। उस समय आठ रुपये में तीमारदारों के लिए दाल, चावल, रोटी, सब्जी की व्यवस्था शुरू की गई। उन्होंने कहा कि आज भी पेशेंट के अटेंडेंट को बीआरडी मेडिकल कॉलेज और गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय में भी दस रुपये में भरपेट दाल, चावल, सब्जी, रोटी की सुविधा आज भी प्राप्त हो रही है।


एम्स गोरखपुर की स्थापना के लिए सीएम योगी ने बहाया खून-पसीना : रविकिशन
सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि एम्स गोरखपुर की स्थापना का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को है। उन्होंने इस संस्थान के लिए अपना खून-पसीना बहाया है। जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना हमेशा से उनकी उच्च प्राथमिकता रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौनिहालों के लिए त्रासदी रही इंसेफेलाइटिस पर पूर्ण नियंत्रण इसका प्रमाण है। 

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