एक्सक्लूसिव: मुख्यमंत्री योगी के इंसेफेलाइटिस उन्मूलन के ड्रीम प्रोजेक्ट में घपला, यहां पढ़े खास रिपोर्ट
- गोरखपुर आए नहीं, न इंसेफेलाइटिस हुआ, फिर भी बांसगांव ईटीसी के इंसेफेलाइटिस मरीजों की सूची में दर्ज
- सूची में दर्ज कई मरीजों का अस्तित्व नहीं, मोबाइल नंबर रायबरेली-हरदोई के लोगों के
- अमर उजाला की पड़ताल में खुली स्वास्थ्य विभाग की घपलेबाजी
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां सीएचसी बांसगांव के इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) में इंसेफेलाइटिस का इलाज कराने वालों की सूची में कुछ ऐसे लोगों के मोबाइल नंबर दर्ज हैं, जो कभी गोरखपुर आए ही नहीं।
घपलेबाजी का आलम यह है कि जुलाई से अक्तूबर के बीच ईटीसी में कथित रूप से इलाज कराने वाले 15 लोगों की सूची में दर्ज कई मरीजों का अस्तित्व ही नहीं है। नाम के आगे अंकित मोबाइल नंबर के धारक रायबरेली और हरदोई जैसे जिलों के हैं। अमर उजाला की पड़ताल में स्वास्थ्य विभाग का यह हैरतनाक खेल पकड़ में आया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इंसेफेलाइटिस उन्मूलन के ड्रीम प्रोजेक्ट में उन्हीं के गृह नगर में इस तरह की घपलेबाजी किसी को भी हैरत में डालने वाली है। आशंका है कि जिला अस्पताल समेत 22 स्थानों पर बनाए गए इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटरों में भी इसी तर्ज घपलेबाजी हो सकती है। मामला सीएमओ के संज्ञान में लाने पर उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है।
जानकारी के मुताबिक, सीएचसी बांसगांव में छह बेड का इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया है। इलाज कराने वालों की सूची में दर्ज पंकज यादव पुत्र महेंद्र यादव निवासी गोछरन के बारे में जब पड़ताल की गई तो पता चला कि इस का नाम का व्यक्ति पूरे गांव में नहीं है। सूची में इनके नाम के समक्ष अंकित मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया तो पता चला कि यह नंबर हरदोई के नसीम नाम के व्यक्ति का है। उन्होंने बताया कि उनके घर में न तो कोई इंसेफेलाइटिस से बीमार हुआ और न ही कभी कोई गोरखपुर गया।
इसी तरह प्रतिभा पुत्री लालू के नाम पर दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो पता चला कि यह नंबर रायबरेली का है। महिला ने बताया कि उनके घर से कभी कोई गोरखपुर गया ही नहीं। कुछ ऐसी ही कहानी खुशी पुत्री रामबीर की है। यह नाम भी इसेंफेलाइटिस मरीजों की सूची में है। इस मरीज के मोबाइल नंबर पर कॉल करने पर रामबीर की जगह सन्नी नाम के किसी व्यक्ति ने फोन उठाया। उन्होंने खुशी पुत्री रामबीर नाम के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। अपनी पुत्री का नाम संजना बताया।
एक अन्य मरीज रिया पुत्री राज, पता बड़ावन बांसगांव तहसील की है। दर्ज मोबाइल फोन पर एक महिला से बात हुई। महिला ने बताया कि तीन वर्ष की खुशी को बुखार-खांसी थी। इलाज कराने गए थे, लेकिन बच्ची को इंसेफेलाइटिस नहीं था। वह बिल्कुल ठीक है।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में इंसेफेलाइटिस, फिर भी लगा रहे पलीता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली प्राथमिकताओं में इंसेफेलाइटिस की रोकथाम है। वह जब भी गोरखपुर आते हैं, तब इंसेफेलाइटिस से संबंधित जानकारी लेते हैं। मुख्यमंत्री कहते हैं कि 90 फीसदी तक इंसेफेलाइटिस का कहर रोकने में सरकार कामयाब रही है। इस बीमारी के खिलाफ वह लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। अब कामयाबी मिल रही है। मुख्यमंत्री का दावा बिल्कुल सही है।
इंसेफेलाइटिस पर रोकथाम का आंकड़ा और बढ़ सकता है लेकिन स्वास्थ्य महकमा इसपर पलीता लगाने में जुटा है। बांसगांव स्थित इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) पर जो मामला सामने आया है, उससे लगता है कि इंसेफेलाइटिस के मामले और कम हुए हैं। गलत रिपोर्टिंग व फर्जीवाड़े से इंसेफेलाइटिस के मरीज बढ़ाए जा रहे हैं।
बांसगांव सीएचसी अधीक्षक डॉ. महेश कुमार ने बताया कि मरीजों का नाम, पता और उनका मोबाइल नंबर रिकॉर्ड में दर्ज रहता है। गलत नाम और पते कैसे दर्ज हुए, इसकी जानकारी नहीं है। मेरी तबीयत खराब है। मैं छुट्टी पर हूं। सीएचसी पर जाते ही इसका पता लगाया जाएगा कि आखिर चूक कहां से हुई है।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि मामले की जानकारी मीडिया के जरिए मिली है। इस संबंध में सीएचसी से पूरी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद ही सही जानकारी मिल सकेगी।