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अली हसन और बिस्मिल के बलिदान की गौरवगाथा बयां करने वाला घंटाघर संवरेगा, सीएम योगी ने जीर्णोद्धार करने का दिया आदेश
Sun, 20 Dec 2020 10:00 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 20 Dec 2020 10:00 PM IST
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गोरखपुर घंटाघर।
- फोटो : अमर उजाला।
पहले स्वतंत्रता संग्राम में शहादत देने वाले अली हसन और अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल के बलिदान की गौरवगाथा बयां करने वाले शहर के घंटाघर की भी सूरत बदलेगी। इसका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। रविवार को गोरखनाथ मंदिर में जिले के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल्द इसके जीर्णोद्धार कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि घंटाघर को आकर्षक बनाए जाने के साथ ही इसकी पहचान क्यों हैं इसका भी शिलापट्टों आदि के जरिए जिक्र किया जाए। शहीदों की स्मृति में 1930 में घंटाघर का निर्माण रायगंज के सेठ रामखेलावन व सेठ ठाकुर प्रसाद ने कराया था।
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शहादत की गौरव गाथा समेटे हैं घंटाघर
शहर के हिंदी बाजार में स्थित घंटाघर स्वतंत्रता आंदोलन के वीर बलिदानियों के शहादत की गौरव-गाथा को अपने भीतर समेटे हुए है। वर्तमान में जहां यह घंटाघर है वहां 1857 में एक विशाल पाकड़ का पेड़ हुआ करता था। इसी पेड़ पर पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अली हसन के साथ दर्जनों स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी। वहीं 19 दिसंबर 1927 में जब जिला कारागार में बिस्मिल को फांसी दी गई तो शहर में निकली उनकी शवयात्रा इसी घंटाघर में आकर रुकी थी। यहां पर कुछ देर के लिए उनका शव रखा गया था और उसी दौरान बिस्मिल की माता ने यहां पर एक प्रेरणादायी भाषण भी दिया था। इस घटना के बाद ये स्थान पूरी तरह से पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को समर्पित हो गया।
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90 साल पहले हुआ था घंटाघर का निर्माण
घंटाघर के निर्माण का श्रेय रायगंज के सेठ राम खेलावन और सेठ ठाकुर प्रसाद को जाता है। उन्होंने 1930 में अपने पिता सेठ चिगान साहू की याद में इसी स्थान पर एक मीनार की तरह ऊंची इमारत का निर्माण कराया, जो देश के शहीदों को समर्पित थी।
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सेठ चिगान के नाम पर काफी दिनों तक इस इमारत को चिगान टॉवर भी कहा जाता रहा। इमारत पर एक घंटे वाली घड़ी लगाई गई, जिसकी वजह से बाद में यह इमारत घंटाघर के नाम से मशहूर हो गई। घंटाघर के निर्माण की कहानी हिंदी और उर्दू भाषा में घंटाघर की दीवारों पर अंकित है। वहीं दीवार पर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की तस्वीर भी लगी है।