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विधायक ने प्राथमिक शिक्षा की स्थिति पर जताया असंतोष, कहा- अफसरों की लापरवाही से सड़ रही बेसिक शिक्षा
Wed, 29 Jan 2020 10:36 AM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 29 Jan 2020 10:36 AM IST
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भाजपा के नगर विधायक डाक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल। (फाइल फोटो)
- फोटो : social media
बेसिक शिक्षा विभाग के जमीनी हकीकत से आंखें मूंद बहानेबाजी करने वाले अफसरों पर नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल ने नाराजगी जताई है। उन्होंने ऐसे अफसरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए कहा है। मंगलवार को आयोजित लोकलेखा समिति की बैठक में नगर विधायक ने प्राथमिक शिक्षा की बदहाल स्थिति पर असंतोष जताया। इसके बाद लोक लेखा समिति के सभापति महबूब अली ने विधानसभा के आगामी सत्र के पहले ही 11 फरवरी को समिति की बैठक में जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करके समिति को सूचित करने के लिए निर्देशित किया।
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कुछ समय पहले नगर विधायक ने प्राथमिक विद्यालय गोरखनाथ का निरीक्षण किया था। विद्यालय में पंजीकृत 85 छात्रों की जगह सिर्फ 11 छात्र उपस्थित मिले थे। लेकिन उपस्थिति पंजिका में सभी की उपस्थिति दिखाई गई थी। प्रधानाध्यापक तथा सहायक अध्यापिका दोनों अनुपस्थित थे।
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भगवानपुर के प्राथमिक विद्यालय में 279 छात्र-छात्राओं में से 150 लगातार अनुपस्थित मिले। वे अक्सर ईंट के भट्टों पर बाल मजदूर की तरह काम करने के लिए अपने मां-बाप के साथ चले जाते थे । नगर विधायक ने यह विषय विधानसभा में उठाने के साथ ही लोक लेखा समिति की बैठक में भी उठाया था।
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उड़ीं अफसरों की हवाइयां
बैठक में विद्यालयों में बच्चों की कम उपस्थिति पर जैसे ही मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर दिए गए जवाब को पढ़ते हुए ठंड को जिम्मेदार बताया। वहीं 100 छात्रों पर 15 बच्चों की उपस्थिति की बात बताई। नगर विधायक ने इस पर कड़ा एतराज जताया। कहा कि अगर ऐसे हालात हैं तो विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाकर ठंड के मौसम में स्कूल बंद करवा देते हैं।
जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों के गैर जिम्मेदाराना रवैये को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने पूछा कि आखिर उनके यह विषय उठाने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा नगर शिक्षा अधिकारी ने कितनी बार विद्यालय का निरीक्षण किया। इस पर अपर मुख्य सचिव ने बीएसए की ओर से दो वर्ष में 25 बार प्राथमिक विद्यालयों के निरीक्षण की बात बताई और इसे मानक से कम बताया। इसपर नगर विधायक ने लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई की बात कही। जिसपर अगली बैठक में चर्चा होगी।
विधायक के इन सवालों पर उड़ीं अफसरों की हवाइयां
- 150 बच्चे बाल श्रम करने को मजबूर हैं आखिर इसे सुधारने के लिए जिम्मेदार अफसर ने क्या किया?
- 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। गोरखपुर नगर के मानबेला में 224, भगवानपुर में 202, दाऊदपुर में 188, चरगांवा के 183 , मोगलहा में 178, कांशीराम आवास में 165 बच्चों पर सिर्फ एक शिक्षक क्यों हैं ?
- प्राथमिक विद्यालयों के अधिकांश बच्चे एमडीएम दिए जाने के बावजूद कुपोषण के शिकार क्यों है? क्या बेसिक शिक्षा अधिकारी और नगर शिक्षा अधिकारी ने कभी इन सरकारी विद्यालयों के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया?
- अधिकारी खुद तो अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते नहीं है और जनप्रतिनिधि जब इन विद्यालयों में जाकर इन कमियों को इंगित करते हैं तो लीपापोती क्यों की जाती है ?
जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों के गैर जिम्मेदाराना रवैये को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने पूछा कि आखिर उनके यह विषय उठाने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा नगर शिक्षा अधिकारी ने कितनी बार विद्यालय का निरीक्षण किया। इस पर अपर मुख्य सचिव ने बीएसए की ओर से दो वर्ष में 25 बार प्राथमिक विद्यालयों के निरीक्षण की बात बताई और इसे मानक से कम बताया। इसपर नगर विधायक ने लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई की बात कही। जिसपर अगली बैठक में चर्चा होगी।
विधायक के इन सवालों पर उड़ीं अफसरों की हवाइयां
- 150 बच्चे बाल श्रम करने को मजबूर हैं आखिर इसे सुधारने के लिए जिम्मेदार अफसर ने क्या किया?
- 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। गोरखपुर नगर के मानबेला में 224, भगवानपुर में 202, दाऊदपुर में 188, चरगांवा के 183 , मोगलहा में 178, कांशीराम आवास में 165 बच्चों पर सिर्फ एक शिक्षक क्यों हैं ?
- प्राथमिक विद्यालयों के अधिकांश बच्चे एमडीएम दिए जाने के बावजूद कुपोषण के शिकार क्यों है? क्या बेसिक शिक्षा अधिकारी और नगर शिक्षा अधिकारी ने कभी इन सरकारी विद्यालयों के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया?
- अधिकारी खुद तो अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते नहीं है और जनप्रतिनिधि जब इन विद्यालयों में जाकर इन कमियों को इंगित करते हैं तो लीपापोती क्यों की जाती है ?
75 विद्यालयों का ताबड़तोड़ निरीक्षण
लोक लेखा समिति की बैठक में नगर विधायक की ओर से प्राथमिक शिक्षा की लचर व्यवस्था पर नाराजगी जताए जाने के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग मंगलवार को एक्शन मोड में नजर आया। बेसिक शिक्षा विभाग ने औचक निरीक्षण का महाभियान चलाकर नगर के क्षेत्र के 75 परिषदीय विद्यालयों को खंगाला। जहां बिना बताए विद्यालय से अनुपस्थित मिले 10 सहायक अध्यापकों समेत दो शिक्षा मित्रों का एक दिन का वेतन रोक दिया गया है। वहीं एक शिक्षामित्र को बर्खास्तगी का नोटिस दिया गया है।
मंगलवार को अचानक हुए निरीक्षण से नगर क्षेत्र के विद्यालयों में एक घंटे तक हड़कंप मचा रहा। बीएसए की अगुवाई में नौ खंड शिक्षा अधिकारी, चार जिला समन्वयक और एमआईएस इंचार्ज की मौजूदगी में औचक निरीक्षण का महाभियान चलाया गया। इस दौरान विद्यालयों से बिना सूचना अनुपस्थित मिले शिक्षकों, शिक्षामित्रों का वेतन रोक दिया गया।
निरीक्षण के दौरान उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरा पर जिला समन्वयक एमडीएम की अगुवाई में पहुंची टीम ने विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक सरला लता को विद्यालय पर ही तैनात शिक्षिका चंद्रकला वर्मा की हाजिरी बनाते पकड़ लिया जबकि वो अनुपस्थित थी।
प्रभारी प्रधानाध्यापक रजिस्टर में सादे कागज को प्रार्थना पत्र बता सहयोगी का अवकाश चढ़ाने की फिराक में थीं। इस पर एमडीएम प्रभारी ने उन्हें चेतावनी देते हुए तत्काल सूचना बीएसए को मुहैया कराई। जहां दोनों ही शिक्षिकाओं का एक दिन का वेतन रोक दिया गया।
इन शिक्षकों का रोका वेतन
सहायक अध्यापक आशा शुक्ला, अनिता सिंह, संगीता सिंह, प्रीति रावत, सुमति बाला, पुष्पा सिंह, गरिमा शाही, सरल लता, चंद्रकला वर्मा, सुमन सिंह और शिक्षामित्र फौजिया खातून, भावना चौधरी, कुसुम मौर्या और चंद्रा गुप्ता।
मंगलवार को अचानक हुए निरीक्षण से नगर क्षेत्र के विद्यालयों में एक घंटे तक हड़कंप मचा रहा। बीएसए की अगुवाई में नौ खंड शिक्षा अधिकारी, चार जिला समन्वयक और एमआईएस इंचार्ज की मौजूदगी में औचक निरीक्षण का महाभियान चलाया गया। इस दौरान विद्यालयों से बिना सूचना अनुपस्थित मिले शिक्षकों, शिक्षामित्रों का वेतन रोक दिया गया।
निरीक्षण के दौरान उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरा पर जिला समन्वयक एमडीएम की अगुवाई में पहुंची टीम ने विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक सरला लता को विद्यालय पर ही तैनात शिक्षिका चंद्रकला वर्मा की हाजिरी बनाते पकड़ लिया जबकि वो अनुपस्थित थी।
प्रभारी प्रधानाध्यापक रजिस्टर में सादे कागज को प्रार्थना पत्र बता सहयोगी का अवकाश चढ़ाने की फिराक में थीं। इस पर एमडीएम प्रभारी ने उन्हें चेतावनी देते हुए तत्काल सूचना बीएसए को मुहैया कराई। जहां दोनों ही शिक्षिकाओं का एक दिन का वेतन रोक दिया गया।
इन शिक्षकों का रोका वेतन
सहायक अध्यापक आशा शुक्ला, अनिता सिंह, संगीता सिंह, प्रीति रावत, सुमति बाला, पुष्पा सिंह, गरिमा शाही, सरल लता, चंद्रकला वर्मा, सुमन सिंह और शिक्षामित्र फौजिया खातून, भावना चौधरी, कुसुम मौर्या और चंद्रा गुप्ता।