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बच्चों को दाखिले के लिए भेज दिया बंद स्कूलों में, तीन महीने से दफ्तर के चक्कर लगा रहे अभिभावक

Wed, 07 Oct 2020 03:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 07 Oct 2020 03:28 PM IST
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Children sent to admissions in closed schools Under Right to Education Act
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत कई विद्यार्थियों को ऐसे स्कूल आवंटित कर दिए गए हैं, जो या तो बंद पड़े हैं या फिर प्रबंध तंत्र सत्र शून्य होने का हवाला देकर दाखिले से पल्ला झाड़ रहा है। तीन महीने से अभिभावक स्कूल से लेकर बीएसए दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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कोरोना संकट की वजह से शासन ने आरटीई के तहत इस वर्ष तीन चरणों में प्रवेश के लिए आवेदन फार्म ऑनलाइन मंगाया था। लॉटरी के माध्यम से तीनों चरणों में 3500 विद्यार्थियों को स्कूल का आवंटन हुआ। आवंटन पत्र लेकर जब अभिभावक विद्यालय पर पहुंच रहे हैं तो विद्यालय के बंद होने की सूचना मिल रही है। या फिर सत्र शून्य होने का हवाला दिया जा रहा है।  ज्यादातर अभिभावक तो थक हारकर बैठ गए हैं, लेकिन जो शिकायत कर रहे हैं, उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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केस-1
बक्शीपुर के अनन्या, परी, अमृता, हर्ष और यश का नाम आरटीई के तहत प्रवेश के लिए लॉटरी के बाद जारी सूची में दर्ज है। इन्हें तीन महीने पहले बक्शीपुर स्थित माउंट हेरा स्कूल का आवंटन हुआ। मगर तब से इन बच्चों के अभिभावक स्कूल के चक्कर लगा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन ने सत्र शून्य होने का हवाला देकर प्रवेश लेने से मना कर दिया है।
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केस-2
बक्शीपुर के ही रहने वाले रमेश निषाद को लॉटरी के तहत आरपीएम बक्शीपुर का ब्रांच आवंटित हुआ। रिक्शा चलाने वाले रमेश ने बताया कि आवंटन पत्र लेकर स्कूल पर पहुंचे तो पता चला कि विद्यालय मार्च से ही बंद है। तब से वह बेसिक शिक्षा विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। बताया कि कई अन्य अभिभावक भी प्रवेश को लेकर परेशान हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

केस-3
एवरग्रीन स्कूल में आरटीई के तहत प्रवेश को लेकर स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच पिछले दिनों विवाद हो गया था। अभिभावकों का आरोप था कि स्कूल प्रबंधन मनमानी कर रहा है। जबकि स्कूल प्रबंधन आवेदकों के वार्ड के बाहर निवास करने का दावा कर रहा है। मामले की जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से की जा रही है।

आरटीई का लाभ यह

आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शहर के निजी स्कूलों में दाखिले का मौका मिलता है। इनकी फीस शासन की ओर से वहन की जाती है। वहीं कॉपी और किताब के लिए पांच हजार रुपये की धनराशि अभिभावकों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है।


बीएसए बीएन सिंह ने बताया कि आरटीई के तहत दाखिला लेना सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य है। ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर नोटिस जारी किया जाएगा। कोई भी स्कूल मनमानी नहीं कर सकता। अगर किसी विद्यालय ने आवंटित ब्रांच को बंद कर दिया है तो उन्हें दूसरी ब्रांच में प्रवेश लेना होगा। साथ ही इसकी सूचना विभाग को देनी होगी। यू डायस कोड बंद न होने की वजह से स्कूल का आवंटन हुआ है।
 
आरपीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के डायरेक्टर अजय शाही ने बताया कि आरपीएम बक्शीपुर ब्रांच को मार्च में ही बंद कर दिया गया है। इसकी सूचना विभाग को दी गई है। स्कूल की दूसरी ब्रांचों में आरटीई के तहत प्रवेश लिया जा रहा है। जब से आरटीई लागू है, शत प्रतिशत बच्चों का प्रवेश लिया जाता है।

माउंट हेरा स्कूल के डायरेक्टर तंजील अहमद ने बताया कि आठवीं तक के विद्यालयों में छह महीने से ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। आगे स्कूल खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं स्कूल फीस जमा कराने से अभिभावकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इस परिस्थिति में प्रबंध समिति ने सत्र को शून्य करने का फैसला लिया है। ऐसे में बच्चों का प्रवेश कैसे लिया जाए?

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