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वनटांगियों की विकास यात्रा पर शार्ट फिल्म का लोकार्पण, सीएम ने स्टॉल का निरीक्षण कर की सराहाना

Sat, 14 Nov 2020 07:06 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 14 Nov 2020 07:06 PM IST
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Chief Minister yogi adityanath inaugurates short film on development journey of Vantangis
योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
दिवाली के मौके पर अयोध्या से सीधे गोरखपुर के वनग्राम तिनकोनिया नंबर 3 पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया गांवों को 66 लाख रुपये की विकास परियोजनाओं का तोहफा दिया। इनमें 22.39 लाख के पांच कार्यों का लोकार्पण तथा 42.93 लाख की परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
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इस दौरान मुख्यमंत्री ने शनिवार को वनग्राम जंगल तिनकोनिया नंबर 3 के मंच से हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश महासचिव ई. पीके मल्ल द्वारा निर्मित वनटांगिया ग्राम वासियों की अब तक की संघर्ष यात्रा पर शार्ट फिल्म का भी लोकार्पण किया। यह फिल्म वनटांगियों की विकास यात्रा को दिखाती है जिसमें वनटांगिया बस्ती के लोग अपने संघर्ष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले सहयोग को रेखांकित करते हैं। फिल्म के निर्माण में विनय गौतम का भी सहयोग रहा है।
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सीएम ने स्टॉल का किया निरीक्षण, सराहा
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों की तरफ से लगाए गए स्टॉलों का भी निरीक्षण किया और उनकी प्रशंसा की। वहीं टेरोकोटा, कृषि और वन विभाग के स्टॉलों पर आमजन की भी खूब भीड़ लगी रही। लोगों ने अपनी जरूरतों के सामान खरीदे। 
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गोरखपुर के जंगलों में ऐसे आए वनटांगिया परिवार
ब्रिटिश हुकूमत में जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं तो स्लीपर के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों से साखू के पेड़ों की कटान हुई। इसकी भरपाई के लिए अंग्रेज सरकार ने साखू के पौधों के रोपण और उनकी देखरेख के लिए गरीब भूमिहीनों, मजदूरों को जंगल में बसाया। ये अलग- अलग गांवों के वो लोग थे जिनके पास जीवनयापन का कोई जरिया नहीं था।

साखू के जंगल बसाने के लिए वर्मा देश की टांगिया विधि का इस्तेमाल किया गया, इसलिए वन में रहकर यह कार्य करने वाले वनटांगिया कहलाए। कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी व चिलबिलवा में इनकी पांच बस्तियां वर्ष 1918 में बसीं।

नहीं हारा हौसला, जंगल में बने रहने को दो की जान भी गई

जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन के पूर्व मुखिया चन्द्रजीत बताते हैं कि साखू के पेड़ों से जंगल संतृप्त हो गया तो वन विभाग ने अस्सी के दशक में वनटांगियों को जंगल से बेदखल करने की कार्रवाई शुरू कर दी। इसी सिलसिले में वन विभाग की टीम 6 जुलाई 1985 को जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन में पहुंची। न कहीं और घर, न जमीन, आखिर वनटांगिया लोग जाते कहां।

उन्होंने जंगल से निकलने को मना कर दिया । जोर जबरदस्ती पर उतारू वन विभाग की तरफ से फायरिंग कर दी गई। इस घटना में परदेशी और पांचू नाम के वनटांगियों को जान गंवानी पड़ी, जबकि 28 लोग घायल हो गए। इसके बाद भी वन विभाग सख्ती करता रहा। यह सख्ती तब रूकी जब सांसद बनने के बाद 1998 से योगी आदित्यनाथ ने वनटांगियों की सुधि ली।

एक दशक से वनटांगियों के साथ दिवाली मनाते आ रहे सीएम 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वर्ष 2009 से ही वनटांगियां परिवारों के साथ दिवाली मनाते आ रहे हैं। योगी ने यह परंपरा मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जारी रखी है। हर साल दिवाली पर वह यहां के बच्चों को मिठाई, टॉफी, कापी-किताब और आतिशबाजी का उपहार देकर पढ़ने को प्रेरित करते हैं तो वहीं बस्ती के लोगों मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी तमाम सौगात देते हैं। इन गांवों के बच्चे मुख्यमंत्री को टॉफी वाले बाबा कहकर भी पुकारते हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने दिलाया राजस्व ग्राम का दर्जा

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने बीते तीन दिवाली में वनटांगिया समुदाय को ढेर सारी सौगातें दी। लोकसभा में वनटांगिया अधिकारों के लिए लड़ने वाले योगी ने 2007-08 में वन अधिकार संशोधन अधिनियम पास कराया लेकिन जमीनी तौर पर यह लागू हुआ उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद ही। अपने सीएम कार्यकाल के पहले ही साल अक्टूबर 2017 में उन्होंने वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाया।

इससे सिर्फ गोरखपुर के ही पांच वनग्राम नहीं बल्कि महराजगंज के 18 समेत प्रदेश के सभी वनटांगिया गांवों को मिला। राजस्व ग्राम घोषित होने के साथ ही यहां के लोग हर तरह की सुविधा के हकदार हो गए। तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने वनटांगिया गांवों को आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाएं मुहैया कराई।

वनटांगिया गांवो में आज सभी के पास अपना सीएम योजना का पक्का आवास, कृषि योग्य भूमि, आधारकार्ड, राशनकार्ड, रसोई गैस है। बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, पात्रों को वृद्धा, विधवा, दिव्यांग आदि पेंशन योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
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